Friday, March 27, 2026

देश मंथन डेस्क

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संपूर्णता मिलन में है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

उस 'येलेना' से मैं दुबारा नहीं मिल पाया, जिसकी मैंने चर्चा की थी। हालाँकि जब मैंने येलेना की कहानी आपको दुबारा सुनानी शुरू की थी, तब मैंने यही कहा था कि ताशकंद से लौटते हुए एयरपोर्ट पर नीली आँखों वाली जो लड़की मुझे मिली थी और जिसने मेरी मदद की थी, उसमें भी मुझे येलेना ही दिखी थी। चार दिन पहले मैंने येलेना की कहानी शुरू की थी और यह शुरुआत उसी मुलाकात के साथ हुई थी। 

कश्मीर में कुछ करिए : स्पष्ट संदेश दीजिए कि ‘नहीं मिलेगी आजादी’

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :

गनीमत है कि कश्मीर के हालात जिस वक्त बहुत बुरे दौर से गुजर रहे हैं, उस समय भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में नहीं है। कल्पना कीजिए कि इस समय केंद्र और राज्य की सत्ता में कोई अन्य दल होता और भाजपा विपक्ष में होती तो कश्मीर के मुद्दे पर भाजपा और उसके समविचारी संगठन आज क्या कर रहे होते। इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व की समझ और संयम दोनों की सराहना करनी पड़ेगी कि एक जिम्मेदार विपक्ष के नाते उन्होंने अभी तक कश्मीर के सवाल पर अपनी राष्ट्रीय और रचनात्मक भूमिका का ही निर्वाह किया है।

मन मोह लेती है मनाली की फिजाँ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

मनाली देश के बेहतरीन हिल स्टेशन में शामिल है। मुझसे अगर कोई किसी एक हिल स्टेशन को पहला नंबर देने को कहे तो मैं मनाली का ही नाम लूंगा। क्यों तो इसके कई कारण हैं। मनाली में घूमने को लेकर काफी विविधताएं हैं।

प्रेम रहित विवाह

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

कल देवघर पहुँचा। भोलेनाथ के दर्शन किए।

फिर सारे रास्ते येलेना की कहानी पर आपके कमेंट पढ़ता रहा। सोचता रहा उस फिल्मकार के बारे में जिसने 'प्यासा' और 'कागज' के फूल जैसी फिल्में बनाई थीं। दोनों फिल्में फ्लॉप साबित हुई थीं।

पोकीमान @ अरहर डाट काम

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

पोकीमान गो गेम ने मार मचायी हुई है। जिस देश में नौजवानों को धूर्त-बदमाश नेताओं, अरहर के काला-बाजारियों को पकड़ने के लिए निकलना चाहिए, वहाँ नौजवानों का जत्था पोकीमान को पकड़ने निकल रहा है। मोबाइल की स्क्रीन पर नजरें गड़ाये आपके आसपास कोई नौजवान पोकीमान के चक्कर में इधर-उधर जा रहा होगा।

चंबा से वापसी वाया कमेरा लेक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

तीन दिनों के चंबा प्रवास के बाद वापसी की यात्रा भी काफी मनोरम रही। हमारा होटल चंबा बस स्टैंड से पाँच किलोमीटर आगे परेल में था। इसलिए हमें बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड जाने की कोई जरूरत नहीं थी। टाइम टेबल देख लिया था।

रिश्तों में जरूरी होता है भाव को समझना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

दो दिनों से प्रेम पर लिख रहा हूँ। 

क्या हो गया है मुझे?

जेठानी को जलाना है

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

सरकार चाहती है कि सोने में भारतीय लेडीज की दिलचस्पी कम हो। इसलिए इन दिनों गोल्ड बांड के इश्तिहार आ रहे हैं, आशय यह कि गोल्ड के चक्कर में ना पड़ों कुछ ब्याज कमा लो। सोना सरकार को दे दो, वहाँ ज्यादा काम आयेगा। यह चाहना कुछ इस किस्म का चाहना है कि मानो महाराष्ट्र में शिव सेना के उध्दव ठाकरे चीफ मिनिस्टर कुर्सी की चाह खत्म कर दें। सोने को लेकर सरकार की योजना है कि पुराने सोने को लेकर बांड जारी कर दिये जायें और पब्लिक को प्रोत्साहित किया जाये कि सोना ना खरीदो- सोने के बांड खरीद लो, उस पर ब्याज भी मिलेगा।

चंबा का शॉल, रुमाल और जूतियाँ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

चंबा अपने शॉल, रुमाल और जूतियों के लिए जाना जाता है। अगर आप चंबा से कुछ खरीद कर ले जाना चाहते हैं तो इनमें से कुछ चुन सकते हैं। सबसे पहले बात चंबा के रुमाल की। चंबा का रुमाल वास्तव में कोई जेब में रखने वाला रुमाल नहीं होता। वास्तव में यह शानदार कढ़ाई की हुई वाल पेटिंग होती है।

किसी और में खुद को देख पाना ही प्रेम है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

आप में से बहुत से लोग इंग्लैंड गये होंगे। मैं भी गया हूँ। 

पर आज कहानी न तो आपकी लिखी जा रही है, न मेरी। आज कहानी लिख रहा हूँ उस नौजवान की, जिसे अंग्रेजी नहीं आती थी पर उसे इंग्लैंड जाना था। उसका पासपोर्ट बन चुका था, वीजा लग चुका था। अब बस उड़ना भर बाकी था।