Friday, May 17, 2024

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शमशेरा : हिंदू घृणा और वामपंथी एजेंडा से भरी फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया

शमशेरा हिंदू घृणा से सनी ऐसी फिल्म है, जिसका साहित्य में परीक्षण हुआ, जैसा कि फर्स्ट पोस्ट आदि पर आयी समीक्षाओं से पता चलता है, और फिर बाद में परदे पर उतारा गया। परंतु जैसे साहित्य में फर्जी विमर्श को रद्दी में फेंक कर जनता ने नरेंद्र कोहली को सिरमौर चुना था, वैसे ही अब उसने आरआरआर एवं कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों को चुन लिया है और शमशेरा को गड्ढे में फेंक दिया है!

नेशनल हेराल्ड मामले का फैसला आ सकता है लोकसभा चुनाव से पहले

ईडी ने तो एक तरह से मामले को छोड़ दिया था। ईडी की पकड़ में यह मामला तब आया, जब कोलकाता में हवाला कारोबार करने वाली एक शेल कंपनी के यहाँ एजेएल और यंग इंडिया की हवाला लेन-देन की प्रविष्टि (एंट्री) मिली, और उसके तार ईडी की जाँच में गांधी परिवार तक गये। इसलिए गांधी परिवार से पूछताछ के बिना चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकती है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ हो चुकी है और अब सोनिया गांधी से पूछताछ हो रही है।

पाकिस्तान में बढ़ती शर्मनाक घटनाएँ, फिर भी पश्चिमी देशों का दुलारा पाकिस्तान

अमेरिका की एक व्लॉगर पाकिस्तान में विषय में वीडियो बनाती थी। उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है और बलात्कार करने वाले उसके अपने वही दो दोस्त हैं, जिनके बुलावे पर वह पाकिस्तान आयी।

लिबरल खेमा वैश्विक उथल-पुथल से प्रफुल्लित क्यों है?

उनके हर्ष का विषय तीन वैश्विक घटनाएँ हैं। पहली है यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का इस्तीफा, दूसरी घटना है जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण घटना है श्रीलंका का दीवालिया होना और राष्ट्रपति आवास पर आम जनता का नियंत्रण होना!

राजनीति

नेशनल हेराल्ड मामले का फैसला आ सकता है लोकसभा चुनाव से...

ईडी ने तो एक तरह से मामले को छोड़ दिया था। ईडी की पकड़ में यह मामला तब आया, जब कोलकाता में हवाला कारोबार करने वाली एक शेल कंपनी के यहाँ एजेएल और यंग इंडिया की हवाला लेन-देन की प्रविष्टि (एंट्री) मिली, और उसके तार ईडी की जाँच में गांधी परिवार तक गये। इसलिए गांधी परिवार से पूछताछ के बिना चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकती है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ हो चुकी है और अब सोनिया गांधी से पूछताछ हो रही है।

समाचार विचार

शमशेरा : हिंदू घृणा और वामपंथी एजेंडा से भरी फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया

शमशेरा हिंदू घृणा से सनी ऐसी फिल्म है, जिसका साहित्य में परीक्षण हुआ, जैसा कि फर्स्ट पोस्ट आदि पर आयी समीक्षाओं से पता चलता है, और फिर बाद में परदे पर उतारा गया। परंतु जैसे साहित्य में फर्जी विमर्श को रद्दी में फेंक कर जनता ने नरेंद्र कोहली को सिरमौर चुना था, वैसे ही अब उसने आरआरआर एवं कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों को चुन लिया है और शमशेरा को गड्ढे में फेंक दिया है!

पाकिस्तान में बढ़ती शर्मनाक घटनाएँ, फिर भी पश्चिमी देशों का दुलारा पाकिस्तान

अमेरिका की एक व्लॉगर पाकिस्तान में विषय में वीडियो बनाती थी। उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है और बलात्कार करने वाले उसके अपने वही दो दोस्त हैं, जिनके बुलावे पर वह पाकिस्तान आयी।

लिबरल खेमा वैश्विक उथल-पुथल से प्रफुल्लित क्यों है?

उनके हर्ष का विषय तीन वैश्विक घटनाएँ हैं। पहली है यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का इस्तीफा, दूसरी घटना है जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण घटना है श्रीलंका का दीवालिया होना और राष्ट्रपति आवास पर आम जनता का नियंत्रण होना!

उदयपुर की घटना : आतंकी हत्या पर सेक्युलरों ने सभी धर्मों को क्यों लपेटा?

उदयपुर में हुई जिहादी घटना ने जैसे सारा विमर्श ही मात्र एक विषय पर लाकर रख दिया है, और वह है कट्टरपंथी इस्लामिक जिहाद।...

गैंगवार के आतंक से फिर सहमा वासेपुर

भैया, यह वासेपुर है। कबूतर भी एक पंख से उड़ता है तो दूसरे पंख से इज्जत ढकता है। यहाँ अब इज्जत ढकने का सवाल नहीं है। जिंदा लोगों के लाशों में तब्दील होने की जंग है। इस बार जंग में शामिल है जेल में सजा काट रहे फहीम खान की सल्तनत के लिए चुनौती बन कर उभरा छोटे सरकार उर्फ प्रिंस खान। इस जंग में ड्रामा है, थ्रिल है, सस्पेंस है...

द कश्मीर फाइल्स : विवेक अग्निहोत्री ने उठा दी झूठ की दुकान

विवेक अग्निहोत्री की सफलता यही है कि उन्होंने विमर्श की दिशा मोड़ दी। उन्होंने बस दर्द को जस-का-तस परोस दिया, जो इतने वर्षों से झेलम नदी में कश्मीरियत की हरी काई के नीचे दबा था और अब वह दर्द बह कर नीचे उस मैदान में आ गया है, जहाँ तक आने से लिबरल जमात उसे रोक रही थी!

चुनाव

बिहार चुनाव में क्या फिर पलटी मारेंगे उपेंद्र कुशवाहा?

कभी उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार से बड़े नेता हुआ करते थे। लेकिन वक्त ने पलटा खाया और नीतीश कुमार काफी आगे बढ़ गये और कुशवाहा फर्श पर आ गये। उपेंद्र कुशवाहा उस अतीत से बाहर नहीं निकलना चाहते।

महागठबंधन से मुकाबले से पूर्व एनडीए में अंदरूनी घमासान

संदीप त्रिपाठी : 

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए में जबरदस्त रार मची हुई है। बिहार में एनडीए में कुल चार दल भाजपा, जदयू, लोजपा और हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) हैं।

बिहार में महागठबंधन की छोटी पार्टियों की बड़बोली माँगें

संदीप त्रिपाठी

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल पिछले चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा बन कर लड़ने वाली जदयू के गठबंधन से निकल जाने के बाद अब शेष बड़े दल राजद और कांग्रेस इस बार ज्यादा-से-ज्यादा सीटें अपने पास रखने के पक्ष में हैं।

सबरंग

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6 days ago

Desh Manthan

अभी तक किसी ने आईबी का सर्वे और आरएसएस का आंतरिक सर्वे नहीं छापा क्या!
इसके बिना तो चुनाव का मजा अधूरा रह जायेगा!
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2 weeks ago

Desh Manthan

वाल्मीकि रामायण में कितने स्त्री पात्रों के घूँघट में होने के विवरण मिलते हैं?
यह प्रश्न उनसे भी है जो बुरके को स्त्री की स्वतंत्रता और घूँघट को हिंदू समाज की कुरीति के रूप में दिखाते हैं, और उनसे भी है जो घूँघट के हटते ही अपनी संस्कृति को खतरे में देखने लगते हैं।
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2 weeks ago

Desh Manthan

जब राहुल और प्रियंका चुनाव लड़ने से डर रहे हैं, तो इसमें क्या आश्चर्य बचता है कि कांग्रेस के 2-3 प्रत्याशियों ने नाम वापस लेकर भाजपा को वाकओवर दे दिया...! ... See MoreSee Less

3 weeks ago

Desh Manthan

फेसबुक पर फर्जी तरीके से दूसरों के नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल करके लोगों को अपने जाल में फँसाने वाले जालसाजों की नजर अब निवेश मंथन पर भी पड़ गयी। इससे पहले वे एनएसई के एमडी-सीईओ आशीष कुमार चौहान Ashish Chauhan और सीएनबीसी आवाज के संपादक अनुज सिंघल Anuj Singhal के अलावा कई बाजार विशेषज्ञों के नाम से फर्जीवाड़ा कर चुके हैं। वहीं सेबी (Attn: Madhabi Puri Buch) के लिए शायद फेसबुक एक अनजान दुनिया है, क्योंकि लगता है कि इस प्लेटफॉर्म पर सेबी का आधिकारिक पेज तक नहीं है।
मैंने फेसबुक पर इस तरह के जितने भी फर्जी पोस्ट देखे, वे सबके सब फर्जीवाड़े फेसबुक पर चलने वाले विज्ञापन के रूप में हैं, यानी इसके लिए फेसबुक को पैसा मिलता है। ऐसा लगता है कि फेसबुक ने विज्ञापन से कमाई के चलते इन घोटालेबाजों को खुला मैदान दे रखा है। हमारी पत्रिका निवेश मंथन के एक अंक के मुखपृष्ठ को दिखाते हुए जो फर्जी पोस्ट मिले, वे भी विज्ञापन के रूप में ही चल रहे हैं। साथ लगे चित्रों को देखें, उन पर स्पॉन्सर्ड लिखा है।
सेबी को फेसबुक से पूछताछ करनी चाहिए कि इन विज्ञापनों को चलाने वाले कौन हैं, उनका नाम-पता, फोन नंबर, ईमेल और बैंक खाता वगैरह क्या है, क्योंकि फेसबुक इस तरह की जानकारियाँ जुटाने के बाद ही उनके विज्ञापन चलाता है।
फिलहाल, हम अपनी ओर से आप सभी सतर्क करना चाहते हैं कि फेसबुक पर निवेश मंथन पत्रिका या शेयर मंथन या व्यक्तिगत रूप से मेरे (राजीव रंजन झा) के नाम से आपको इस तरह के फर्जी पोस्ट दिखें तो उनके साथ कोई लेन-देन नहीं करें। ऐसे पोस्ट दिखने पर उनका स्क्रीनशॉट और पेज का लिंक हमारे पास भेजने का कष्ट करें, जिससे उचित रूप से उन पर कार्रवाई शुरू की जा सके। ध्यान रखें कि निवेश मंथन और शेयर मंथन या मेरे (राजीव रंजन झा) द्वारा व्यक्तिगत रूप से कोई भी सशुल्क निवेश सलाह सेवाएँ (पेड इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंसी) उपलब्ध नहीं करायी जाती हैं। किसी भी भ्रामक और फर्जी प्रचार के आधार पर यदि आप कोई लेन-देन या निवेश करते हैं, तो उसकी कोई जिम्मेदारी हमारी नहीं है।
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फेसबुक पर फर्जी तरीके से दूसरों के नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल करके लोगों को अपने जाल में फँसाने वाले जालसाजों की नजर अब निवेश मंथन पर भी पड़ गयी। इससे पहले वे एनएसई के एमडी-सीईओ आशीष कुमार चौहान Ashish Chauhan और सीएनबीसी आवाज के संपादक अनुज सिंघल Anuj Singhal के अलावा कई बाजार विशेषज्ञों के नाम से फर्जीवाड़ा कर चुके हैं। वहीं सेबी (Attn: Madhabi Puri Buch) के लिए शायद फेसबुक एक अनजान दुनिया है, क्योंकि लगता है कि इस प्लेटफॉर्म पर सेबी का आधिकारिक पेज तक नहीं है।
मैंने फेसबुक पर इस तरह के जितने भी फर्जी पोस्ट देखे, वे सबके सब फर्जीवाड़े फेसबुक पर चलने वाले विज्ञापन के रूप में हैं, यानी इसके लिए फेसबुक को पैसा मिलता है। ऐसा लगता है कि फेसबुक ने विज्ञापन से कमाई के चलते इन घोटालेबाजों को खुला मैदान दे रखा है। हमारी पत्रिका निवेश मंथन के एक अंक के मुखपृष्ठ को दिखाते हुए जो फर्जी पोस्ट मिले, वे भी विज्ञापन के रूप में ही चल रहे हैं। साथ लगे चित्रों को देखें, उन पर स्पॉन्सर्ड लिखा है।
सेबी को फेसबुक से पूछताछ करनी चाहिए कि इन विज्ञापनों को चलाने वाले कौन हैं, उनका नाम-पता, फोन नंबर, ईमेल और बैंक खाता वगैरह क्या है, क्योंकि फेसबुक इस तरह की जानकारियाँ जुटाने के बाद ही उनके विज्ञापन चलाता है।
फिलहाल, हम अपनी ओर से आप सभी सतर्क करना चाहते हैं कि फेसबुक पर निवेश मंथन पत्रिका या शेयर मंथन या व्यक्तिगत रूप से मेरे (राजीव रंजन झा) के नाम से आपको इस तरह के फर्जी पोस्ट दिखें तो उनके साथ कोई लेन-देन नहीं करें। ऐसे पोस्ट दिखने पर उनका स्क्रीनशॉट और पेज का लिंक हमारे पास भेजने का कष्ट करें, जिससे उचित रूप से उन पर कार्रवाई शुरू की जा सके। ध्यान रखें कि निवेश मंथन और शेयर मंथन या मेरे (राजीव रंजन झा) द्वारा व्यक्तिगत रूप से कोई भी सशुल्क निवेश सलाह सेवाएँ (पेड इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंसी) उपलब्ध नहीं करायी जाती हैं। किसी भी भ्रामक और फर्जी प्रचार के आधार पर यदि आप कोई लेन-देन या निवेश करते हैं, तो उसकी कोई जिम्मेदारी हमारी नहीं है।Image attachmentImage attachment

3 weeks ago

Desh Manthan

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी...
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जारी रहेगा विपक्ष का ईवीएम राग!
इसके बिना 4 जून को कैसे कुछ बोल पायेंगे भइया!
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शमशेरा : हिंदू घृणा और वामपंथी एजेंडा से भरी फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया

शमशेरा हिंदू घृणा से सनी ऐसी फिल्म है, जिसका साहित्य में परीक्षण हुआ, जैसा कि फर्स्ट पोस्ट आदि पर आयी समीक्षाओं से पता चलता है, और फिर बाद में परदे पर उतारा गया। परंतु जैसे साहित्य में फर्जी विमर्श को रद्दी में फेंक कर जनता ने नरेंद्र कोहली को सिरमौर चुना था, वैसे ही अब उसने आरआरआर एवं कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों को चुन लिया है और शमशेरा को गड्ढे में फेंक दिया है!

नेशनल हेराल्ड मामले का फैसला आ सकता है लोकसभा चुनाव से पहले

ईडी ने तो एक तरह से मामले को छोड़ दिया था। ईडी की पकड़ में यह मामला तब आया, जब कोलकाता में हवाला कारोबार करने वाली एक शेल कंपनी के यहाँ एजेएल और यंग इंडिया की हवाला लेन-देन की प्रविष्टि (एंट्री) मिली, और उसके तार ईडी की जाँच में गांधी परिवार तक गये। इसलिए गांधी परिवार से पूछताछ के बिना चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकती है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ हो चुकी है और अब सोनिया गांधी से पूछताछ हो रही है।

पाकिस्तान में बढ़ती शर्मनाक घटनाएँ, फिर भी पश्चिमी देशों का दुलारा पाकिस्तान

अमेरिका की एक व्लॉगर पाकिस्तान में विषय में वीडियो बनाती थी। उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है और बलात्कार करने वाले उसके अपने वही दो दोस्त हैं, जिनके बुलावे पर वह पाकिस्तान आयी।

लिबरल खेमा वैश्विक उथल-पुथल से प्रफुल्लित क्यों है?

उनके हर्ष का विषय तीन वैश्विक घटनाएँ हैं। पहली है यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का इस्तीफा, दूसरी घटना है जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण घटना है श्रीलंका का दीवालिया होना और राष्ट्रपति आवास पर आम जनता का नियंत्रण होना!

रॉकेट्री फिल्म के बहाने फिर सामने आयी हिंदुओं के प्रति वामपंथी घृणा!

रॉकेट्री फिल्म की इसलिए आलोचना की जा रही है कि इस फिल्म ने नारायणन की भक्ति को बार-बार दिखाया है। वे जब भी कठिनाई में फँसते हैं तो वे प्रार्थना करते हैं, वे एक सच्चे हिंदू देशभक्त हैं! क्या हिंदू देशभक्त होना अपराध है? क्या वह व्यक्तित्व, जिन्होंने अपने जीवन में तमाम कठिनाइयों का सामना किया और उनसे संघर्ष करने की शक्ति उन्हें अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से प्राप्त हुई, तो क्या वह बात इस फिल्म में दिखायी नहीं जानी चाहिए थी?

इन चार परिवारवादी दलों का भविष्य है अंधकार में

इन सभी पार्टियों के वर्तमान नेतृत्व को ऐसा लगता था कि हमारे साथ विरासत (लीगेसी) है, हमारा कोई क्या बिगाड सकता है। मगर पहले जनता, फिर कार्यकर्ताओं ने साथ छोड़ दिया। राजीव गांधी के समय से यह ग्राफ घटता जा रहा है। ऐसी सभी पार्टियों में अलग-अलग स्तरों पर असंतोष है। पार्टी और सत्ता का शीर्ष पद परिवार के लिए आरक्षित हो, तो बगावत तय होती है।

अर्थ सार

किसानों की आमदनी दोगुनी करने में कितना योगदान कर सकेगा बजट 2022?

क्या किसान की आमदनी 100 से बढ़ा कर 200 रुपये करने के लिए उपभोक्ता का खर्च 400 से बढ़ा कर 800 रुपये किया जाना ऐसा विकल्प है, जिसे लोग पसंद करेंगे? क्या आप तैयार हैं कि जो आटा 40 रुपये किलो खरीदते हैं, उसे 80 रुपये में खरीदने लगें और जो दाल 100 रुपये किलो खरीद रहे हैं, उसे 200 रुपये में खरीदने लगें? क्या किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मतलब यह है कि खाद्य महँगाई भी दोगुनी हो जायेगी?

चीन की सख्ती से बेदम बिटकॉइन

चीन ने अपने यहाँ क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाये हैं। अभी बुधवार 14 जुलाई को ही चीन के आनहुई प्रांत में क्रिप्टो-माइनिंग को रोकने के लिए बहुत व्यापक घोषणा की गयी है। दरअसल क्रिप्टो-माइनिंग में बिजली की खपत बहुत अधिक होती है, जिसके चलते चीन ने यह सख्ती की है।

निवेश मंथन : ग्राहक बनें

चुटकुले

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण

दसवीं की परीक्षा में गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण करने के लिए कहा गया। एक छात्र ने उसका चरित्र चित्रण कुछ इस तरह लिखा : 

तेज दौड़ने की गति परीक्षा

पुरुषों के लिए : आप की पत्नी कितना तेज दौड़ सकती है, यह देखना है तो जोर से यह चिल्लाइये - 

दवा जो पूरे शहर में नहीं मिली

मरीज - डॉक्टर साहब, आपने पर्चे के पीछे जो दवा लिखी है, वह पूरे शहर में कहीं नहीं मिल रही है। क्या करूँ?

सुंदर लड़की का हाथ पाने के लिए

एक लड़के ने बड़ी उत्कंठा से एक साधु बाबा से पूछा - बाबा जी, किसी सुंदर लड़की का हाथ पाने के लिए क्या करना चाहिए?

इसको कहीं देखा है

एक पागल आइने  में खुद को देख कर सोचने लगा कि यार इसको कहीं देखा है।

मच्छरों की विधवाएँ

मालिक ने नौकर से कहा - मच्छर मार दो, बहुत हो गये हैं...!

विमान में घर जैसा माहौल

आदमी हवाई जहाज़ से उतरा तो दरवाजे पर खड़ी एयर होस्टेस बोली -

सुख-साधन

रिलायंस ने पेश किया सस्ता 4जी स्मार्टफोन

देश मंथन डेस्क :

रिलायंस ने लाइफ के साथ मिलकर  2,999 रुपये में 4G स्मार्टफोन बाजार में उतारा है। यह फोन आपको चार वर्जन लाइफ फ्लेम3, फ्लेम4, फ्लेम5 और फ्लेम6 के नाम से मिलेंगे।

भारत में लॉन्च हुई सबसे सस्ती बाइक

देश मंथन डेस्क :

अमेरिका की लक्जरी मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी इंडियन मोटरसाइकिल ने स्काउट 60 बाइक को भारतीय बाजार में उतारा है।

महिंद्रा (Mahindra) ने पेश की केयूवी100 (KUV100) नाम से नयी एसयूवी

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ने अपनी एक नयी एसयूवी गाड़ी महिंद्रा केयूवी100 (Mahindra KUV100) नाम से बाजार में उतार दी है, जो 4 मीटर से कम लंबाई वाली श्रेणी में एक कॉम्पैक्ट एसयूवी है।

व्हाट्सऐप्प (Whatsapp) अब वेब पर भी उपलब्ध

लोकप्रिय मैसेजिंग सेवा व्हाट्सऐप्प का इस्तेमाल अब पर्सनल कंप्यूटर या लैपटॉप पर भी इंटरनेट के माध्यम से किया जा सकता है।

आम आदमी पार्टी

जनता के सारे भरम तोड़ डाले केजरीवाल ने

अभिरंजन कुमार :

केजरीवाल की बीमारी सिर्फ यह नहीं है कि वे खुद को छोड़ कर बाकी सबको चोर, बेईमान, भ्रष्ट मानते हैं, बल्कि उनकी बीमारी यह भी है कि वे खुद को छोड़ कर बाकी सबको मूर्ख, बेवकूफ और अनपढ़ भी मानते हैं।

आपका क्या होगा जनाबे आली

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर :

"मैं बिहार से आया हूँ। आप का प्रचार करने। सर किराये पर कमरा लेने गया तो पूछा किस लिए चाहिए। मैंने सही बता दिया कि अरविंद केजरीवाल का प्रचार करने आया हूँ।

वैधानिक चेतावनी : हिटलर और केजरीवाल की इन तस्वीरों में संबंध नहीं

जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियाँ परवान चढ़ रही हैं, वैसे-वैसे विभिन्न दलों के बीच जुबानी जंग भी तीखी होती जा रही है। लेकिन नेताओं की जुबानी जंग के बीच सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर लोगों की रचनात्मकता भी खूब गुल खिला रही है।

मुल्ला मुलायम और सलीम योगेंद्र यादव में फर्क क्या?

विकास मिश्रा, आजतक :

योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी के नेता हैं, बोलते हैं तो जुबां से मिसरी झरती है।

भाजपा

मुकुल रॉय के जाने से भाजपा के लिए सबक

पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल राय पार्टी छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में वापस चले गये। कांग्रेस से निकले, तृणमूल कांग्रेस बनायी। तृणमूल कांग्रेस से निकले, भारतीय जनता पार्टी में आये। भाजपा से निकले, फिर तृणमूल कांग्रेस में चले गये। तृणमूल कांग्रेस में उनका वापस जाना क्या बताता है तृणमूल कांग्रेस के लिए, भाजपा के लिए और सामान्य तौर पर राजनीति के लिए?

वैचारिक आत्मदैन्य से बाहर आती भाजपा

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

उत्तर प्रदेश अरसे बाद एक ऐसे मुख्यमंत्री से रूबरू है, जिसे राजनीति के मैदान में बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।

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