देश मंथन डेस्क
जिन्दगी में कुछ ऐसा करें जिससे संतोष मिले

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैंने तो पहले ही बता दिया था कि दो दिन पहले जब मथुरा से Pavan Chaturvedi भैया मेरे घर आए थे, तो उन्होंने मुझे कई कहानियाँ सुनाई थीं। एक नहीं, दो नहीं, तीन या चार भी नहीं, ढेरों कहानियाँ। मैंने उसी में से एक चिड़िया की कहानी आपको परसों सुनाई थी।
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा….

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
एक सपनीली दुनिया है खजियार मैदान में। खजियार ग्राउंड को देख कर कई फिल्मों के दृश्य अचानक ही जेहन में याद आने लगते हैं। अपने अनूठे सौंदर्य के कारण खजियार का सौंदर्य बालीवुड के निर्माताओं को हमेशा अपनी ओर खींचता है। 1942 लव स्टोरी फिल्म का गीत…एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...जैसे खिलता गुलाब...के कुछ दृश्यों खजियार के नजारे दिखाई देते हैं। इ
मुलायम मलमल बनाने वाले देश का दिल कठोर

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज ज्यादा नहीं लिखूँगा।
सच पूछिए तो आज बिल्कुल नहीं लिखूँगा। मेरा मन ही नहीं है आज कुछ भी लिखने का। कल से मन बहुत उदास है। कल ही बांग्लादेश से उस बच्ची का शव यहाँ लाया गया, जिसने अभी जिन्दगी की राह पर अपना पहला कदम ही आगे बढ़ाया था।
लक्ष्मी रुकेंगी, चरित्र के सभी अवगुणों को दूर करके

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज की पोस्ट खास तौर पर आपके लिए ही है। पर आज पोस्ट को पढ़ने के बाद आप अपने बच्चों से इसे साझा कीजिएगा। उन्हें अपने पास बिठा कर इस कहानी को जरूर सुनाइएगा, जिसे कल मेरे बड़े भाई Pavan Chaturvedi ने मुझसे साझा किया।
अब आइने में अपनी शक्ल देखे इस्लाम… डरावनी हो चली है!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
हमारे जम्मू-कश्मीर राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने उस सच्चाई को कबूल करने का साहस दिखाया है, जिसे तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले हमारे सुपर-सेक्युलर लोग समझते हुए भी स्वीकार करने को तैयार नहीं होते।
मंत्रिमंडल विस्तार के लिए यूपी का दाँव

संदीप त्रिपाठी :
मोदी कैबिनेट के मंगलवार की सुबह 11 बजे होने वाले विस्तार के लिए सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश चेहरों की है। आइये, देखते हैं विभिन्न वेबसाइटों में क्या-क्या चर्चा चल रही है
समस्या

प्रेमचंद :
मेरे दफ्तर में चार चपरासी हैं। उनमें एक का नाम गरीब है। वह बहुत ही सीधा, बड़ा आज्ञाकारी, अपने काम में चौकस रहने वाला, घुड़कियाँ खाकर चुप रह जानेवाला यथा नाम तथा गुण वाला मनुष्य है। मुझे इस दफ्तर में साल-भर होते हैं, मगर मैंने उसे एक दिन के लिए भी गैरहाजिर नहीं पाया।
खजियार से पुखरी गाँव की सैर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
खजियार ग्राउंड के आसपास देवदार के घने जंगल हैं। इन जंगलों में ट्रैकिंग करने का अपना मजा है। अगर आपके पास समय है तो घूमने के लिए वक्त निकालें। एक सुबह हमलोग टहलने निकले। यह खजियार ग्राउंड में पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के पीछे का इलाका था। इस सड़क पर चलते हुए आगे कोई गाँव आता है। पर गाँव से पहले रास्ते में दो चार होटल हैं। ये होटल ऐसे हैं जहाँ आप कोलाहाल से दूर प्रकृति की गोद में कुछ वक्त गुजार सकते हैं।
गाड़ी सायरन बजाते गुजरे तो मानव धर्म का निर्वाह करें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मैं अमेरिका के डेनवर शहर में था। वही डेनवर शहर, जहाँ शादी के बाद अपनी धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित भी रहती थीं।
माधुरी दीक्षित बेशक वहीं रहती थीं, पर आज मैं कहानी माधुरी दीक्षित की नहीं सुनाने जा रहा। आज मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, उसे सुन कर आप सोचने लगेंगे कि क्या सचमुच ऐसा होता है? पर क्योंकि मैं इस कहानी का चश्मदीद हूँ, इसलिए आप मेरी बात पर यकीन कीजिएगा कि मैं जो कुछ भी कह रहा हूँ, उसका एक-एक अक्षर सत्य है। क्योंकि यह कहानी आदमी की जिन्दगी से जुड़ी है, इसलिए आप इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा कीजिएगा। जितने लोगों को ये कहानी पता चलेगी, उतना फायदा हम सबका होगा।
पलायन सिर्फ कैराना में?

निभा सिन्हा :
हमारे गाँव-शहरों में भी तो पलायन हुआ, और होता रहा है और अब भी हो रहा है। गाँव के गाँव खाली हो गये, पूरा शहर वीरान हो गया, लोग उसके बारे में कभी बात नहीं करते। क्योंकि ये गाँव-शहर उजड़े अच्छे स्कूल-कॉलेज नहीं होने के कारण, नाम के स्कूलों और कॉलेज में अच्छे शिक्षक न होने के कारण और कुछ शिक्षक थे भी अच्छे तो बच्चों के भविष्य के बारे में कभी नहीं सोचे, उसके कारण।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
संदीप त्रिपाठी :
प्रेमचंद :
निभा सिन्हा :




