देश मंथन डेस्क
अपने पुरुषार्थ से पाकिस्तान को सबक सिखा सकते हैं

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
मोदी के समूचे भाषण के दौरान अमेरिकी संसद में लगातार तालियाँ बजती रहीं। यद्यपि उनकी अंग्रेजी से मैं कभी इम्प्रेस नहीं होता, फिर भी मनमोहन की अंग्रेजी से इसे बेहतर मानता हूँ। मनमोहन तो हिंदी बोलते थे या अंग्रेजी-कभी लगता ही नहीं था कि उनकी तबीयत ठीक-ठाक है।
सावित्री आसन है हृदयघात से बचाव

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी आज की पोस्ट को बहुत ध्यान से पढ़िएगा। आप इसे और लोगों से साझा भी कीजिएगा। आज की पोस्ट सिर्फ पोस्ट नहीं, बल्कि एक ऐसी जानकारी है जिसे हम सबको जानना और समझना चाहिए।
विजयवाड़ा शहर – पराठे और भरपेट थाली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आंध्र प्रदेश के शहरों में आमतौर पर भोजन की बात करें तो उसका मतलब भरपेट खाने की थाली होता है। यह थाली आमतौर पर चावल की होती है। विजयवाड़ा शहर में मार्च 2016 में भरपेट थाली मध्यम दर्जे के रेस्टोरेंट में मिल जाती है 70 रुपये की। यानी 70 रुपये में चाहे जितना मर्जी खाओ।
आर्य वैश्यों का तीर्थ पेनुगोंडा का वासवी धाम

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी जिले के पेनुगोंडा स्थित वासवी धाम दक्षिण भारत में आर्य वासव समुदाय के लोगों का बड़ा तीर्थ स्थल है। पेनुगोंडा को वासवी माता की जन्म स्थली माना जाता है। यहाँ पर विशाल वासवी कन्या परमेश्वरी मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में वासवी देवी की विशाल सुनहले रंग की मूर्ति है।
पैसा अधिक आने से नयी पीढ़ी पर असर

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कभी-कभी ऐसा कुछ होता है कि आप सामने वाले से सिर्फ इतना ही कह पाते हैं, ‘वेरी गुड’। बहुत अच्छा किया आपने।
मेरी पहली दो लाइनों को पढ़ कर आप मन ही मन सोचेंगे कि संजय सिन्हा सुबह-सुबह पहली क्यों बुझा रहे हो, सीधे-सीधे मुद्दे पर क्यों नहीं आते।
सही बात है, सीधी बात का कोई मुकाबला नहीं होता।
युवाओं के दिल में

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
विकट अज्ञान और कनफ्यूजन में दिन बीते साहब। पहले एक सर्वे में साफ हुआ था कि भारतीय सन्नी लियोन (वस्त्र मुक्ति अभियान की वरिष्ठ कार्यकर्ता) के दीवाने हैं। मैं तो मान रहा था कि युवाओं के दिल में सन्नी लियोन बसती हैं। पर नहीं, कल मेरे मुहल्ले में बहुत पोस्टर दिखे, जिसमें लिखा था कि देश के युवाओं के दिल में बसने वाले एक नेता को युवाओं की माँग पर आगे लाया गया है।
जिनके पास भावनाएँ हैं, वही जिन्दगी के मर्म को समझता हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरा एक दोस्त बहुत व्यस्त रहता है। सारा दिन काम में डूबा रहता है। उसके फोन की घंटियाँ थमने का नाम नहीं लेतीं। सारा दिन फोन कान पर ऐसे चिपका रहता है मानो फोन का अविष्कार नहीं हुआ होता तो वो जिन्दगी में कुछ कर ही नहीं पाता।
विजयवाड़ा से वासवीधाम की ओर एनएच 5 पर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मैं विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन सही समय पर पहुँच चुका था। यहाँ से आगे मुझे पहुँचना है वासवी धाम, पेनुगोंडा जो राजामुंदरी के पास है। शादी में शामिल होना है। रत्नाराव जी के बेटे बालगंगाधर की। रत्नाराव जी के लिए हम परिवार के सदस्य की तरह हैं। साल 2007 में हैदराबाद के वनस्थलीपुरम में उनके घर रहने के बाद एक रिश्ता बन गया।
भीतर से ही उड़ान संभव

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
बहुत दिनों बाद उड़ने वाले गुब्बारे की याद आयी। याद क्या आयी, समझ लीजिए कि मैं सावन में लगने वाले मेले में पहुँच गया। मुझे याद आने लगा कि माँ मुझे एक रुपया देती थी, सोमवारी मेले में जाने के लिए। मैं मिट्टी के खिलौने खरीदता, आलू टिक्की खाता, और आखिर में दस पैसे का गुब्बारा खरीदता। गुब्बारे को अपनी साइकिल की हैंडिल पर बांधता और दनदनाता हुआ घर पहुँचता।
अजीत जोगी और अखबार की ताकत

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
अखबार की ताकत पर याद आया। जनसत्ता में नौकरी शुरू की थी तो पाया कि दिल्ली में भी बिजली जाती थी और तो और दफ्तर की बिजली भी जाती थी पर अखबार छापने के लिए जेनरेटर नहीं था। मुझे याद नहीं है कि बिजली जाने पर एक्सप्रेस बिल्डिंग की लिफ्ट चलती थी कि नहीं और चलती थी तो कैसे? नहीं चलती थी तो कभी उसका कोई विरोध हुआ।



अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :




