देश मंथन डेस्क
बच्चे के मन को पहचानें, धन को नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
माँ की सुनाई तमाम कहानियों में से ये वाली कहानी मुझे हमेशा ऐसे वक्त में याद आती है, जब इसकी सबसे अधिक जरूरत पड़ती है।
कुछ दिन पहले मुझसे कोई कह रहा था कि उनका बेटा ठीक से पढ़ाई नहीं करता। उसके नंबर हमेशा कम आते हैं और सबसे दुख की बात ये है कि पति-पत्नी दोनों बच्चे को पूरा समय नहीं दे पाते।
विजयवाड़ा का कनक दुर्गा मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कनक दुर्गा का भव्य मंदिर विजयवाड़ा शहर के बीचों बीच पहाड़ी पर है। तिरूपति के बाद यह आंध्र प्रदेश के भव्य मंदिरों में से एक है। यहाँ पर सालों भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
जय-वीरु का ये कैसा वनवास…!!

तारकेश कुमार ओझा :
सत्तर के दशक की सुपरहिट फिल्म शोले आज भी यदि किसी चैनल पर दिखायी जाती है तो इसके प्रति दर्शकों का रुझान देख मुझे बड़ी हैरत होती है। क्योंकि उस समय के गवाह रहे लोगों का इस फिल्म की ओर झुकाव तो समझ में आता है लेकिन नयी पीढ़ी का भी इस फिल्म को चाव से देखना जरूर कुछ सवाल खड़े करता है।
श्री हुजुर साहिब सचखंड गुरुद्वारा – दशमेश पिता की याद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में स्थित हुजुर साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। खालसा पंथ के पाँच तख्तों में से एक सचखंड साहिब। इसे तख्त सचखंड श्री हुजुर अबिचल नगर साहिब के नाम से भी जाना जाता है।
मोतियों की तरह रिश्तों को संभालिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरे एक परिचित के दोनों बच्चे गर्मी की छुट्टियों में स्कूल से कहीं घूमने गये हैं। बच्चे हफ्ते भर से बाहर हैं, पति-पत्नी अकेले-अकेले बैठे रहते हैं, ऐसे में उन्होंने तय किया कि कुछ लोगों को घर बुलाया जाए, पार्टी की जाए। बहुत ही बेहतरीन आइडिया था। रोज-रोज की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी से थोड़ी राहत मिलेगी और जिनसे पता नहीं कब से नहीं मिले, उनसे मिलना हो जाएगा।
मन के पिंजरों से निकलिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी पोस्ट पर आप जो टिप्पणियाँ करते हैं, उन्हें मैं बहुत मनन करके पढ़ता हूँ। कभी-कभी तो पढ़ने के बाद दुबारा पढ़ता हूँ। सच में आपकी टिप्पणियाँ कई बार इतनी दिलचस्प और शानदार होती हैं कि मैं खुद सोच में पड़ जाता हूँ।
मोदी सरकार के दो साल

देवेन्द्र शास्त्री :
आप ने सुना? पढ़ा? विपक्ष ने आरोप लगाया? किसी अखबार ने रिपोर्ट किया, किसी टीवी ने कहा?
आइए फेयरी क्वीन को करें याद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव (इंजन) के इतिहास में फेयरी क्वीन का अपना अनूठा महत्व है। जब हम विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर निकलते हैं तो स्टेशन के लॉन में फेयरी क्वीन लोकोमोटिव खड़ी दिखायी देती है। मानो अभी चल पड़ने को तैयार हो। वास्तव में ये मूल फेयरी क्वीन नहीं है। पर रेलवे के इंजीनियरों ने इसका बिल्कुल वैसा ही रेप्लिका तैयार किया है। तो इस फेयरी क्वीन को भी देर तक निहारने की जी चाहता है।
कस्तूरबा गाँधी का घर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बापू का घर देख लिया तो अब चलिए बा यानी बापू की पत्नी कस्तूरबा गाँधी का घर देखने चलें। जब आप पोरबंदर में बापू का घर देखने जाते हैं तो बापू की पत्नी कस्तूरबा गाँधी का घर देखना नहीं भूलें। बा का घर कीर्ति मंदिर के ठीक पीछे है। कीर्ति मंदिर देख लेने के बाद इसके पिछवाड़े से ही बा के घर जाने का रास्ता है। रास्ते में घर जाने के लिए मार्ग प्रदर्शक लगा हुआ है।
शक्ल और रिजल्ट एक ही

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
एक कहानी तीन दिनों से अटकी पड़ी है। सोच रहा हूँ कि आज नहीं लिखा तो फिर कहीं पुरानी ही न पड़ जाए। इसलिए आज मैं संसार के सात आश्चर्यों की कहानी को छोड़ कर उस सत्य को आपके सामने परोसने जा रहा हूँ, जो कल्पना से भी अधिक काल्पनिक है, जिसके विषय में आपका विज्ञान इत्तेफाक कह कर पल्ला झाड़ लेगा। पर मैं कैसे निकल सकता हूँ? मैं तो गवाह हूँ समय का, जब मैंने इस आश्चर्य किंतु विचित्र सत्य को अपनी आँखों से घटित होते हुए देखा है।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तारकेश कुमार ओझा :
देवेन्द्र शास्त्री :




