देश मंथन डेस्क
सब को अपनी जिन्दगी जीने का हक मिले

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आज पोस्ट नहीं लिखूंगा। आज आपसे बातें करूंगा।
चामुंडा अनाज रखने के लिए बना था पटना का गोलघर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बिहार की राजधानी पटना की जिन इमारतों से पहचान है उनमे गोलघर भी एक है। गाँधी मैदान के पास स्थित गोलघर 33 मीटर यानी 96 फीट ऊँचा है। चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग सीढ़ियाँ हैं। कुल 146 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। आपको ज्यादा सीढ़ियाँ चढ़ने का इल्म नहीं है तो कुछ मुश्किल आ सकती है। क्योंकि रास्ते में कहीं ठहराव नहीं है।
मोदी राज में कैसे टॉप कर गए दलित और मुस्लिम छात्र?

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
मीडिया से पता चला कि इस बार आइएएस टॉपर दलित है और सेकेंड टॉपर मुसलमान। इससे एक बात तो साफ है कि हमारे लोकतंत्र ने धीरे-धीरे सबको बराबरी से आगे बढ़ने के मौके मुहैया कराये हैं और अब चाहे आप किसी भी जाति-धर्म के हों, अगर आपमें दम है और लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
अपने जातिवादी और सांप्रदायिक मित्रों से दो टूक

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
मेरे कई मित्रों की मुश्किल है कि जब मैं मोदी, बीजेपी और आरएसएस की आलोचना करता हूँ, तो वे पढ़ते नहीं या पढ़ कर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन जब मोदी, बीजेपी, आरएसएस के विरोधियों की आलोचना करता हूँ, तो वे हमारी निष्ठा पर सवाल उठाने लगते हैं।
‘हुआ-हुआ’ करने वालों के अच्छे दिन आ गये

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
रातों-रात पीएम बनने की महत्वाकांक्षा के चलते 49 दिन की तुगलकी सरकार से भाग कर जो शख्स भस्मासुर की तरह अपने ही सिर पर हाथ रख कर (राजनीतिक रूप से) मर चुका था, उसे बीजेपी के बौराए रणनीतिकारों ने अमृत छिड़क कर दोबारा जिला दिया, लेकिन अब भी उन्हें चेतना नहीं आयी है।
जुल्फों में संविधान

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
उत्तराखंड के प्रकरण पर गंभीर संवैधानिक बहस चल रही थी एक टीवी चैनल पर।
मार्गदर्शक बनें, रिंग मास्टर नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
हमारी बारहवीं की परीक्षा खत्म हो चुकी थी और आखिरी पेपर के बाद हम ढेर सारे बच्चे सिनेमा देखने गये थे। शाम को घर आये तो पिताजी ने कहा था कि अब तो तुम्हारी कई दिनों की छुट्टियाँ है, तुम बुआ के घर चले जाओ, वहाँ तुम्हारा मन लगेगा।
दुख दर्द पर फोकस करें डिग्री पर नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरा नाम संजय सिन्हा है।
मेरे पिताजी का नाम सुशील कुमार सिन्हा था।
मेरे दादाजी का नाम कृष्ण गोविंद नारायण था।
रोम-रोम में बसी है माँ

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
स्कूल में जब सारे बच्चे बात-बात पर विद्या कसम खा लेते थे, तब भी मैं विद्या कसम नहीं खाता था।
लेटे हुए हनुमान जी यानी भद्र मारूति

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देश में बजरंग बली के लाखों मंदिर होंगे, पर इनमें खुल्ताबाद का भद्र मारुति मंदिर काफी अलग है। एलोरा गुफाओं के बाद हमारा अगला पड़ाव था भद्र मारूति। खुल्ताबाद गाँव में स्थित इस मंदिर में लेटे हुए हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है। इस तरह के लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा देश में सिर्फ इलाहाबाद में हैं। एलोरा से भद्रा मारूति की दूरी तीन किलोमीटर है।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :




