देश मंथन डेस्क
मीडियाकर्मियों का वेतन देखेंगे तो शर्म आ जाएगी सांसद महोदय

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
गरीब सांसदों को वेतन में बढ़ोतरी चाहिए। लाखों रुपये जो बतौर वेतन भत्ते मिलते हैं, वे कम हैं। राज्य सभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि मीडिया ट्रायल की वजह से संसद डरती है। उन्होंने हवाला यह दिया कि संपादकों के वेतन का चौथाई भी मिल जाये, वही बहुत है।
प्यार की शब्दावली बनाम हिंदी फिल्म

सुशांत झा, पत्रकार :
हिंदी फिल्मों में प्रेमी-प्रेमिकाएँ एक दूसरे को जिस संबोधन से कम से कम गानों में पुकारते हैं, रीयल लाइफ में उसका कितना रिफ्लेक्शन है?
मौन की महिमा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
चंद्रवती हमारी जिन्दगी में जब आयी थी तब उसकी उम्र चालीस साल रही होगी। वो पिछले 25 वर्षों से हमारे साथ है।
धन धान्य की देवी माता शाकंभरी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
नौ देवियों में से एक हैं माँ शाकंभरी देवी। कल-कल छल-छल बहती नदी की जल धारा ऊँचे पहाड़ और जंगलों के बीच विराजती हैं माता शाकंभरी। कहा जाता है शाकंभरी देवी लोगों को धन धान्य का आशीर्वाद देती हैं। इनकी अराधना करने वालों का घर हमेशा शाक यानी अन्न के भंडार से भरा रहता है।
सुंदरबन – बंगाल का विश्व विरासत स्थल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सागर द्वीप यानी गंगा सागर विश्व प्रसिद्ध सुंदरबन के इलाके से जुड़ा है। सागर द्वीप 224 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसमें कुल 43 गाँव आते हैं। यह साउथ 24 परगना जिले का हिस्सा है। सागर द्वीप की आबादी 1.60 लाख के करीब है।
साड़ी नहीं पौधे माँगें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
“माँ, ये लाल वाला लहंगा मेरी शादी के लिए खरीद लो।”
माँ का दर्द दूर किया

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कहा न कहानियाँ चल कर नहीं, दौड़ कर अब मेरे पास आने लगी हैं और अगर कहानियों में माँ-बेटे के रिश्ते की बात हो, तो फिर कहना ही क्या।
मुंबई में पेट पूजा – आनंद भवन की शाकाहारी थाली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन के पास शाकाहारी खाने के लिए सबसे निकट में अच्छा विकल्प है, स्पेशल आनंद भवन। स्टेशन से बाहर निकलते ही मिंट रोड पर चलने पर दाहिनी तरफ स्पेशल आनंद भवन नजर आता है।
नई पीढ़ी के पेय और बचपन की यादें – पेपर बोट

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
आज सुबह के अखबार में अमरूद और लाल मिर्च की इस फोटू ने पुराने दिन याद करा दिये। पिछले कई साल से अमरुद तो आराम से उपलब्ध है ही, लाल मिर्च की भी कोई कमी नहीं रही। पर ऐसे अमरुद नहीं खाया। खाया नहीं क्या किसी ने खिलाया ही नहीं। बचपन में अमरुद बेचने वाला पूछ कर और कई बार बिना पूछे भी अमरुद इस तरह काट कर लाल मिर्च भर देता था। आज यह तस्वीर देख कर वो सब स्वाद याद आ गया। पुराने दिन याद आ गये। खाक अच्छे दिन-पुराने दिन बहुत अच्छे थे।
माँ की गोद

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मुझे मरने से डर नहीं लगता। पर मर जाने में मुझे सबसे बुरी बात जो लगती है, वो ये है कि आप चाह कर भी दुबारा उस व्यक्ति से नहीं मिल सकते, जिससे मिलने की तमन्ना रह जाती है।



पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
सुशांत झा, पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :




