Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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खून में सने बासित कुबूल नहीं

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

हालाँकि मैं गुलाम अली साहब की इस तकरीर से कतई सहमत नहीं हूँ कि सुरों से सरहद की दूरी कम होगी, चंद सियासतदां हिंदुस्तान-पाकिस्तान की दोस्ती में रोड़े अटका रहे हैं और दोनों मुल्क के बीच कलाकारों के जरिए रिश्ते मजबूत होंगे। वह सरासर बकवास कर रहे थे।

पहाड़ों की तलहटी में बाउ कालेश्वर मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

पहाड़ों की तलहटी में एक सुंदर सा मंदिर। मंदिर के एक तरफ झील तो दूसरी तरफ लहलहाते नारियल के पेड़। मुंबई की भीड़ भरी जिंदगी में इतना सुंदर मंदिर तो ईश्वर की अराधना में लीन होने का आनंद और भी बढ़ जाता है। कुछ ऐसा ही मुंबई के तुर्भे एमआईडीसी इलाके में स्थित बाऊ कालेश्वर का मंदिर। मंदिर परिसर में सफेद रंग के तीन खूबसूरत मंदिर बने हैं। 

और बुर्के पर चर्चा पूरी हुई

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :

तो तय यह हुआ कि बुर्का एकदम जरूरी है। बुर्के को जरूरी मानने वाले धर्म की महिलाएँ कम पढ़ी-लिखी, कम जागरूक हैं इसलिए इसपर किसी महिला को बोलने नहीं दिया जाएगा और चर्चा करने के लिए पुरुष अपने असली रूप में मैदान में डटे रहेंगे।

गलती को पुचकार कर सुधारें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

कल रात सोते हुए मैं फूला नहीं समा रहा था कि मैंने कड़वी चाय को दुरुस्त करने की कला के साथ-साथ रिश्तों में प्यार के फूल खिलाने की विद्या भी आपको सिखलायी। मैंने कल जो पोस्ट लिखी थी, उसमें जिन्दगी का निचोड़ डाल दिया था। 

कड़वे रिश्तों में मीठे बोल

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

लानत है मुझ पर। पिछले 26 सालों में कल पहला मौका था, जब मुझसे मेरी पत्नी ने कहा कि एक कप चाय बना कर पिला दो और मैं करवट बदल कर सो गया। 

इगतपुरी में महाराष्ट्र का बड़ा पाव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

हमारी यात्रा का दूसरा दिन है। मंगला लक्षदीप एक्सप्रेस में सुबह हुई तो मनमाड और नासिक पीछे छूट गए थे। मनमाड शिरडी के साईं बाबा जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन है। इगतपुरी नामक रेलवे स्टेशन आता है। इगतपुरी में ट्रेन 20 मिनट रूकी। सुबह नास्ते में मिला महाराष्ट्र का प्रसिद्ध बड़ा पाव। 15 रुपये में दो बड़ा पाव। कहीं 20 रुपये का तीन तो कहीं सात रुपये का एक भी।

सिंहस्थ कुंभ में श्रद्धालुओं का तांता

राकेश उपाध्याय, पत्रकार :

जिंदगी में अमृतत्व पाने की ये सबसे लंबी छलाँग है। जीवन की अनंत यात्रा से हमेशा के लिए पार उतरने के आकांक्षियों के सैलाब की ये सबसे गहरी डुबकी है। हजारों सालों से इसी तरह कुंभ में अमृत की दो बूंद पाने खिंचा चला आता है सनातन समाज शिप्रा किनारे बसी महाकाल की मोक्षदायिनी नगरी उज्जैन।

राजनीति और महात्वाकांक्षा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

माँ ने लिखा है

 “आज ट्रेन में यात्रा के दौरान मंगनू सिंह जी के बेटे से भेंट हुई। उनके बेटे डॉक्टर वीपी सिंह इस समय एनसीईआरटी, दिल्ली में हैं और आजमगढ़ से जुड़े हैं।

ग्रामोदय से भारत उदयः कितना संकल्प, कितनी राजनीति

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : :

क्या नरेंद्र मोदी ने भारत के विकास महामार्ग को पहचान लिया है या वे उन्हीं राजनीतिक नारों में उलझ रहे हैं, जिनमें भारत की राजनीति अरसे से उलझी हुयी है। गाँव, गरीब, किसान इस देश के राजनीतिक विमर्श का मुख्य एजेंडा रहे हैं। इन समूहों को राहत देने के प्रयासों से सात दशकों का राजनीतिक इतिहास भरा पड़ा है। कर्ज माफी से ले कर अनेक उपाय किए गये, किंतु हालात यह हैं कि किसानों की आत्महत्याएँ एक कड़वे सच की तरह सामने हैं।

जलन छोड़, अपनी किस्मत बदलें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

कुछ कहानियाँ पढ़ कर हंसी आती है। कुछ कहानियाँ पढ़ कर रोना आता है। जिन कहानियों को पढ़ कर हम हँसते या रोते हैं, उनके बारे में हम राय बना लेते हैं कि यह कहानी अच्छी है या बुरी है। पर हम यह सोचने की कोशिश नहीं करते कि हर कहानी कुछ न कुछ कहती है, संदेश देती है। जिस कहानी को सुन कर हमें कोई संदेश न मिले, वो कहानी उस फल की तरह है, जिसमें रस नहीं होता।