Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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बर्थडे पर खास : सर्वहारा हनुमान

सुशांत झा, पत्रकार :

आज बजरंग बली का बर्थ डे है। सभी भक्तों को बधाई और कॉमरेडों से सहानुभूति। वैसे देखा जाए तो हनुमान जी रामजी के सेवक थे, तो ऐसे में वे सर्वहारा हुए। कम्युनिस्टों को अभी तक क्लेम कर देना चाहिए था। कम से कम हनुमान भक्तों के एक विशाल तबके को वो अपनी तरफ खींच सकते थे।

गर्मी में उधारी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

यह निबंध कक्षा आठ के उस बच्चे की कापी से लिया गया है, जिसने ग्रीष्मकालीन क्रियेटिव राइटिंग कंपटीशन में टाप किया है-

प्रेम करने वाला सबको संग लेकर चलते हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मेरी नौकरी पहले लगी थी, पत्रकारिता की पढ़ाई में दाखिला बाद में मिला था। जिन दिनों मैं पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा था, एक लड़की से मेरी दोस्ती हुई। मेरी तरफ से दोस्ती सिर्फ दोस्ती तक सीमित थी, लेकिन अक्सर लड़कियाँ दोस्ती, प्रेम और शादी तीनों की चाशनी बना लेती हैं। उसने भी ऐसा ही किया और जिस दिन कॉलेज में मेरा आखिरी दिन था वो मेरे पास शादी का प्रस्ताव लेकर पहुँच गयी। 

मोदी की कार्य शैली का समर्थन हूँ, अंध भक्त नहीं

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के समर्थन में दलाई लामा जी का बयान जो एक मित्र ने हमारी पोस्ट के कमेंट में लगाया था। उसे मैंने अपनी वाल पर पोस्ट कर दिया। बहुमत संघ के पक्ष में था जो कमेंट्स आए पर कुछ लोगों को यह आपत्ति है कि धर्मगुरु दलाई लामा का यह बयान नहीं है और मुझे कोसा गया कि मैं अपने पत्रकारिता धर्म को भूल कर अंध भक्ति में लगा हुआ हूँ।

छिपाए गए सच में आदमी टूट कर गिरता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मैं अपनी माँ से पूछा करता था कि माँ, आपकी शादी पिताजी से कैसे हुई? 

माँ अपनी शादी को ईश्वरीय विधान बताती। कहती कि भगवानजी आये थे और उन्होंने सब तय कर दिया। बहुत से बच्चों की तरह मेरे मन में भी कौतूहल जगता कि माँ की शादी वाली तस्वीरों में मैं कहीं क्यों नहीं हूँ? माना कि मैं छोटा बच्चा रहा होऊँगा और मुमकिन है कि सो रहा होऊँगा, पर एक दो तस्वीरों में तो मुझे होना ही चाहिए था। 

चलिए मोनो रेल से देखें मुंबई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

मोनो रेल यानी एक पहिए पर चलने वाली रेल। देश में मुंबई शहर में चलने लगी है मोनो रेल। इस बार मुंबई की यात्रा में हमारी दिली तमन्ना थी कि मोनो रेल का सफर किया जाये। सो 20 फरवरी की सुबह-सुबह मैं और अनादि तैयार हो गये मोनो रेल के सफर पर जाने के लिए।

एक गमछात्मक पोस्ट

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

Anil Upadhyay जी के सौजन्य से बरसों बाद अपन गमछित हुए।

गर्मियों में गमछा बहुतै काम आता है। मेरे कई शौकों में से एक शौक यह है कि दिल्ली में मुँह उठा कर किसी भी दिशा में निकल जाना, इंडिया गेट से लेकर रोहिणी से लेकर द्वारिका तक के किसी पब्लिक पार्क में सोते हुए, आधे जागते हुए जमाने के हाल पर गौर फरमाना।

शापिंग मुंबई के फैशन स्ट्रीट से

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

मुंबई में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए खरीदारी करने का प्रिय स्थल है फैशन स्ट्रीट। पहले ये जान लेते हैं कि फैशन स्ट्रीट है कहाँ। तो जनाब ये वेस्टर्न लाइन के आखिरी स्टेशन चर्च गेट या फिर सेंट्रल लाइन के आखिरी टर्मिनल छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से बीच में है।

कोट मुक्ति मुद्रा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

यह भी तारीखों का ही एक खेल है कि बहुत साल पहले मैं अपने छोटे भाई के साथ 19 अप्रैल की सुबह बैठा हुआ था और अगले दिन होने वाली अपनी शादी की चर्चा कर रहा था। मेरी शादी में मेरा छोटा भाई ही माँ बना बैठा था, पिता बना बैठा था, सखा बना बैठा था।

दादर यानी मुंबई का दिल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

वैसे तो मुंबई बहुत बड़ी है। पर मुंबई का दिल तो दादर में बसता है। भला कैसे। अगर आप नक्शे में देखेंगे तो दादर मुंबई के लगभग बीच में है। मैंने अपने मुंबई के पुराने दोस्त आईपीएस यादव से पूछा की मुंबई में घूमने के लिए कुछ दिन रुकना हो तो कहाँ रुकना ठीक होगा। उन्होंने कहा, दादर में रुकिए। वहाँ से सारे स्थानों को जाने के लिए गाड़ियाँ मिल जाती है। वैसे दादर कहीं से भी बीच में है। यह काफी हद तक सही भी है।