Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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बैजनाथ पपरोला – कांगड़ा वैली रेल का खास स्टेशन

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

कांगड़ा वैली रेल के 164 किलोमीटर के सफर में आखिरी स्टेशन जोगिंदर नगर से थोड़ा पहले बैजनाथ पपरोला स्टेशन खास है। यह पठानकोट और जोगिंदर नगर के बीच में इस नौरो गेज नेटवर्क का सबसे बड़ा स्टेशन है। इस मायने में भी ये स्टेशन महत्वपूर्ण है कि नैरोगेज की सारी रेल गाड़ियाँ आखिरी स्टेशन जोगिंदर नगर तक नहीं जाती हैं। कई ट्रेनें पपरोला से ही वापस हो जाती हैं। तो कुछ यहीं से बन कर चलती हैं। 

बेटों को सबक, पिताओं को उम्मीद

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक 

1 मार्च, 1988

मालवा एक्सप्रेस तय समय पर नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रुकी थी। उसमें से एक दुबला-पतला लड़का हाथ में लोहे का बक्सा लिए नीचे उतरा था। 

ताकि रोज का यह टंटा खत्म हो!

क़मर वहीद नक़वी, वरिष्ठ पत्रकार :

बात गम्भीर है। खुद प्रधानमंत्री ने कही है, तो यकीनन गम्भीर ही होगी! पर इससे भी गम्भीर बात यह है कि प्रधानमंत्री की इस बात पर ज्यादा बात नहीं हुई। क्योंकि देश तब कहीं और व्यस्त था। उस आवेग में उलझा हुआ था, जिसके बारूदी गोले प्रधानमंत्री की अपनी ही पार्टी के युवा संगठन ने दाग़े थे! भीड़ फैसले कर रही थी। सड़कों पर राष्ट्रवाद की परिभाषाएँ तय हो रही थीं। पुलिस टीवी कैमरों के सामने हो कर भी कहीं नहीं थी। टीवी कैमरों को सब दिख रहा था। पुलिस को कुछ भी नहीं दिख रहा था। दुनिया अवाक् देख रही थी। लेकिन इसमें हैरानी की क्या बात? क्या ऐसा पहले नहीं हुआ है? याद कीजिए!

कांगड़ा का स्वाद – लुंगडू का अचार

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

जब भी मैं हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा की वादियों में जाता हूँ तो अचार और चायपत्ती जरूर लाने की कोशिश करता हूँ। कांगड़ा के बाँस के अचार का स्वाद सालों से जुबाँ पर है। पर इस बार यहाँ देखने को मिल लुंगड़ू का अचार । दुकानदार ने बताया यह सर्दिंयों के लिए अच्छा है। सो हमने एक पैकेट खरीद लिया। सर्दियों में बाँस का अचार भी खाना अच्छा रहता है। अब बात लुंगडू की। लुंगडू यानी ( Fiddle head fern)  का अचार कांगड़ा की खास विशेषता है।

पालमपुर – धौलाधार के धवल शिखर देखिए यहाँ से

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

कांगड़ा की हसीन वादियों के बीच पालमपुर शहर। शहर के अंदर तो बाकी शहरों की तरह भीड़भाड़ दिखायी देती है। पर यहाँ से धौलाधार पर्वत के उच्च शिखर दिखायी देते हैं। खास तौर पर जब इन शिखरों पर बर्फबारी हो गयी हो तो इनका सौंदर्य और बढ़ जाता है।

हम अंदर की कमजोरियाँ हारते हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

मेरी एक परिचित ने मुझे बताया कि उनकी बेटी, जिसकी शादी उन्होंने कुछ ही दिन पहले एक अमीर घर में की थी, वो किसी और से प्यार करने लगी है। जाहिर है शादी के बाद बेटी का किसी और से प्यार करना मेरी परिचित को नागवार गुजर रहा है। उन्होंने अपनी तकलीफ मुझसे साझा की। उनकी तकलीफ अब मेरी तकलीफ बन गयी है। मैं सारी रात सोचता रहा कि मैं इस विषय पर लिखूँ या नहीं। 

गाली लंगड़ी होती

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक : 

कायदे से ये कहानी मुझे कल ही लिखनी चाहिए थी। घटना कल की ही है। 

आनंदपुर साहिब से कांगड़ा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

आनंदपुर साहिब का बस स्टैंड छोटा सा है पर साफ-सुथरा। स्वच्छ भारत अभियान का असर दिखायी देता है। यहाँ से मैं कांगड़ा के लिए बस के बारे में पूछता हूँ। लोग बताते हैं कि नंगल चले जाइए वहाँ से मिली। नंगल जाने वाली बस में बैठ जाता हूँ। नंगल 20 किलोमीटर आगे है।

सिख इतिहास की दास्ताँ सुनाता – विरासत ए खालसा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

पवित्र शहर आनंदपुर साहिब में अब एक नया आकर्षण है विरासत ए खालसा। खालसा हेरिटेज के नाम से मशहूर इस विशाल इमारत में आप आडियो विजुअल प्रदर्शनी के माध्यम से 500 साल के सिख इतिहास से रूबरू होते हैं।

किसकी जेब के आठ लाख करोड़?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :  

हंगामा है, न गुस्सा। न चिन्ता है, न क्षोभ। 'ग्रेट इंडियन बैंक डकैती' हो गयी तो हो गयी। लाखों करोड़ रुपये लुट गये, तो लुट गये। खबर आयी और चली गयी। न धरना, न प्रदर्शन, न नारे, न आन्दोलन। न फेसबुकिया रणबाँकुरे मैदान में उतरे। न किसी ने पूछा कि कर्ज़ों का यह महाघोटाला करनेवाले कौन हैं?