Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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हम-दर्दों को दूर भगाओ, गम-दर्दों से राहत पाओ।

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

भारत जैसे जटिल देश की राजनीति भी बेहद शातिराना तरीके से खेली जाती है। इस ग्लोबल देश में व्यूह रचना¢एँ अब इस तरह से होने लगी हैं कि बिहार चुनाव को प्रभावित करना हो, तो दादरी में एक घटना करा दो और उसे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बना दो। एक आदमी बलि का बकरा बनेगा, तो हजारों-लाखों नेताओं-कार्यकर्ताओं-पूंजीपतियों-ठेकेदारों की देवियाँ और अल्लाह खुश हो जाएंगे। एक अखलाक को बलि का बकरा बनाने से आपको मालूम ही है कि कितनों की देवियाँ और अल्लाह उनपर मेहरबान हो गये!

तख्त श्री केशगढ़ साहिब – आनंदपुर साहिब

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

सिखों के पाँच तख्त हैं देश में। इनमें आनंदपुर साहिब का खास महत्व है। पंजाब के रूपनगर जिले में स्थित आनंदपुर साहिब  सिखों में अत्यंत पवित्र शहर माना जाता है। इस शहर की स्थापना 1665 में नौंवे गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने की थी। यह सिख धर्म में अत्यंत पवित्र शहर इसलिए है, क्योंकि यहीं पर खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। साल 1699 में बैशाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने की। इस दिन उन्होंने पाँच प्यारों को सबसे पहले अमृत छकवा कर सिख बनाया। आमतौर पर तलवार और केश तो सिख पहले से ही रखते थे। अब उनके लिए कड़ा, कंघा और कच्छा भी जरूरी कर दिया गया।

JNU में वामपंथियों की देश विरोधी करतूत

सुशांत झा, पत्रकार :

हाफिज़ सईद के JNU के कॉमरेडों को समर्थन देने की खबर IBN की साइट ने लगायी थी, बाद में जनसत्ता ने भी लगा दी। खबर का आधार संदेहास्पद था, IBN ने हटा दी। पहले Saurabh Dwivedi ने मुझे इनबॉक्स में इशारा किया, तब तक मैं उसे शेयर कर चुका था।

बुरे काम का बुरा नतीजा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मेरी आज की पोस्ट मेरे लिए है। मुझे बहुत यंत्रणा से गुजरना पड़ा अपनी आज की पोस्ट को लिखते हुए। बहुत बार हाथ रुके, पर हिम्मत करके मैं लिखता चला जा रहा हूँ। आसान नहीं होता, अपने विषय में ऐसा लिखना।

ऊपरवाले की कस्टमर केयर

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :

शनि के मंदिर, हाजी अली दरगाह पर बखेड़े खड़े हो रहे हैं, पर ऊपर से कोई रिस्पांस नहीं आ रहा है।

कस्टमर केयर के इस जमाने में जहाँ से कस्टमर केयर बिलकुल ही नहीं मिलती है, वह है ऊपरवाले का इलाका।

ट्रेड, टिंबर, ट्रूप मतलब पठानकोट

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

20 अक्तूबर 1993

शिविरों में अथवा ऐसे व्यस्त आयोजनों में अक्सर कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण तारीखें तो याद रहती हैं दिन (वार) भूल जाता हूँ। जैसे आज बुधवार है।

अच्छाई में भी कमियाँ दिखेंगी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

बच्चा पार्क में खेलने जा रहा था। 

दादी घर में अकेली थी। दादी ने बच्चे को रोका और कहा कि क्या तू दिन भर खेलता रहता है। कभी अपनी दादी के पास भी बैठा कर। बातें किया कर। 

पंजाब के आनंदपुर साहिब की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

सिख धर्म के पाँच पवित्र तख्त में से एक है श्री केशगढ़ साहिब यानी आनंदपुर साहिब। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से सुबह छह बजकर 10 मिनट पर नंगलडैम के लिए मेमू ट्रेन खुलती है। यह ट्रेन आनंदपुर साहिब या नैना देवी जाने के लिए आदर्श तरीका है। हालाँकि टिकट खिड़की से आधा किलोमीटर दूर 1ए प्लेटफार्म से ये ट्रेन हर रोज रवाना होती है। 

तरक्की की राह

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

पता नहीं किसने, लेकिन संजय सिन्हा फेसबुक परिवार के ग्रुप में किसी ने इस कहानी को साझा किया था। कहानी किसने लिखी है, पता नहीं। पर मुझे बहुत जरूरत थी इस कहानी की।

मैंने अपने एक परिजन की बीमारी के बीच लगातार अस्पतालों के चक्कर काटते हुए तीन दिनों से प्राइवेट अस्पताल और डॉक्टरों के भ्रष्टाचार की कहानी आपको सुना रहा हूँ।

राजनीति भूल गये मोदी जी!

राजीव रंजन झा :

इतना भी काम मत कीजिए मोदी जी। काम में उलझ कर राजनीति भूल गये हैं नरेंद्र मोदी। 

जी हाँ। गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी ने काम भी जम कर किया, और राजनीति भी जम कर की। विरोधियों के फेंके पत्थरों को चुन-चुन कर अपना राजनीतिक महल बनाते रहे। मगर दिल्ली आ कर शायद यह कला भूल गये मोदी।