देश मंथन डेस्क
‘पिच’ नहीं, समग्र प्रदर्शन से तोड़ी द. अफ्रीकियों की दुर्जेयता

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता पर चाहे जितना भी ग्रहण लगा हो, चाहे दर्शक संख्या में कितनी भी कमी आ रही हो। परंतु यह निर्विवाद स्वीकार करना ही होगा कि किसी भी टीम और खिलाड़ी की श्रेष्ठता का पैमाना यानी उसकी परख खेल के इस दीर्घावधि संस्करण में प्रदर्शन ही है, जिसमें केवल स्किल, तकनीकी पांडित्य ही नहीं, इसमें आपके धैर्य, मनोदशा और एकाग्रता का तेजाबी इम्तहान भी होता है।
न्याय क्या सबके लिए बराबर है?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
बड़ी-बड़ी अदालतें हैं। बड़े-बड़े वकील हैं। बड़े-बड़े कानून हैं। और बड़े-बड़े लोग हैं। इसलिए छोटे-छोटे मामले अक्सर ही कानून की मुट्ठी से फिसल जाते हैं! साबित ही नहीं हो पाते! और लोग चूँकि बड़े होते हैं, इतने बड़े कि हर मामला उनके लिए छोटा हो ही जाता है! वैसे कभी-कभार ऐसा हो भी जाता है कि मामला साबित भी हो जाता है। फिर? फिर क्या, बड़े लोगों को बड़ी सज़ा कैसे मिले? इसलिए सजा अक्सर छोटी हो जाती है! और अगर कभी-कभार सजा भी पूरी मिल जाये तो? तो क्या? पैरोल पर एक कदम जेल के अन्दर, दो कदम जेल के बाहर! वह भी न हो सके तो अस्पताल तो हैं ही न!
आज राह दिखी है

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
माँ गंगा की इस स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए आईए हम संकल्प लें, सौगंध खाएँ। आज राह दिखी है। वाकई ये अद्भुत दृश्य इसलिए ही नहीं हैं कि काशी में दो प्रधान मंत्रियों ने एक साथ माँ गंगा का पूजन किया और अत्यंत मनोयोग से पौने घंटे तक चली महा आरती का आनंद उठाया, बल्कि इसलिए भी कि माँ गंगा दशकों बाद इतनी निर्मल और स्वच्छ नजर आयीं। कहीं एक तिनका तक भी नहीं दिखा।
त्याग करती हैं महिलाएँ

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
भोपाल के हमीदिया कॉलेज में इतिहास वाले प्रोफेसर इंग्लैंड का इतिहास पढ़ाते हुए जब कभी महारानी एलिजाबेथ प्रथम के विषय में हमें बताते तो, उनकी दिलचस्पी ये बात बार-बार बताने में रहती कि एलिजाबेथ ने दुनिया के तमाम राजाओं को इस बात का झाँसा दे रखा था कि वो उन्हीं से विवाह करेंगी, पर महारानी ने कभी किसी से विवाह नहीं किया। यानी वो आजीवन अविवाहित रहीं।
दक्षिण की काशी कांचीपुरम – मंदिरों का शहर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कांची और काशी में कोई समानता है। है ना। तो कांचीपुरम यानी दक्षिण की काशी। जैसे काशी में ढेर सारे मंदिर हैं ठीक उसी तरह कांचीपुरम में भी मंदिर ही मंदिर हैं। चेन्नई सेंट्रल से कांचीपुरम की दूरी 80 किलोमीटर है। यहाँ से ट्रेन या बस से जाया जा सकता है। पर सुगम तरीका लोकल ट्रेन है। सस्ती भी अरामदेह भी। चूँकि हम चेन्नई के तांब्रम इलाके में ठहरे थे तो वहाँ से कांचीपुरम 67 किलोमीटर ही था। तांब्रम रेलवे स्टेशन भी वैसे कांचीपुरम जिले में ही आता है। मानो आधा चेन्नई शहर कांचीपुरम जिले में है।
जहाँ उम्मीद, वहीं जिन्दगी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
यह तो आप जानते ही हैं कि सबसे ज्यादा खुशी और सबसे ज्यादा दुख, दोनों अपने ही देते हैं।
सम-विषम नियम के पीछे प्रदूषण पर रोक की नीयत नहीं

संदीप त्रिपाठी :
दिल्ली के प्रदूषण पर आईआईटी, कानपुर की रिपोर्ट
‘पात्र’ को बड़ा करें

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मुझे एकदम ठीक से याद है कि पड़ोस वाली बेबी दीदी शादी के बाद घर लौट आयी थीं।
गोली और खेल एक साथ कैसे?

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता की लंबे अर्से बाद शुरुआत को एक अच्छी पहल जरूर कहा जा सकता है। मगर जो मुद्दे हैं क्या उनको लेकर पाकिस्तान संजीदा साबित होगा और क्या उसकी फौज, जो असली ताकत है, पहली बार जन्मपत्री को ठोकर मार अपनी सरकार के साथ सुर में सुर मिलाएगी?
प्रदूषण नहीं, अपनी जवाबदेही से बचने का शोशा

संदीप त्रिपाठी :
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने के लिए तारीख के हिसाब से वाहन चलाने का नियम बनाये जाने से कई सवाल खड़े होते हैं। क्या वाकई दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण रोकने के प्रति गंभीर है? क्या दिल्ली सरकार ने यह फैसला पूरी ईमानदारी से सभी संभावित विकल्पों पर भली-भांति विचार करने के बाद लिया है? या क्या केवल अदालत को दिखाने के लिए एक ऊटपटांग फैसला दिल्ली की जनता पर थोप दिया गया है?



पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संदीप त्रिपाठी :




