देश मंथन डेस्क
मुक्ति-मार्ग

प्रेमचंद :
सिपाही को अपनी लाल पगड़ी पर, सुन्दरी को अपने गहनों पर और वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों पर जो घमंड होता है, वही किसान को अपने खेतों को लहराते हुए देखकर होता है। झींगुर अपने ऊख के खेतों को देखता, तो उस पर नशा-सा छा जाता। तीन बीघे ऊख थी। इसके 600 रु. तो अनायास ही मिल जायेंगे। और जो कहीं भगवान् ने डाड़ी तेज कर दी तो फिर क्या पूछना ! दोनों बैल बुड्ढे हो गये। अबकी नयी गोई बटेसर के मेले से ले आयेगा। कहीं दो बीघे खेत और मिल गये, तो लिखा लेगा। रुपये की क्या चिंता। बनिये अभी से उसकी खुशामद करने लगे थे। ऐसा कोई न था जिससे उसने गाँव में लड़ाई न की हो। वह अपने आगे किसी को कुछ समझता ही न था।
सफेद बाघ से मुलाकात

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अरिगनार अन्ना जूलोजिकल पार्क जिसे चेन्नई में लोग वेंडालूर जू के नाम से भी जानते हैं। देश के सबसे पुराने और शानदार चिड़ियाघरों में शुमार है। चेन्नई में इस जू का भ्रमण करने के लिए हमने एक दिन नीयत रखा था। सो हम लोग तांब्रम रेलवे स्टेशन के बस स्टाप से लोकल बस में बैठने के थोड़ी देर बाद ही जू के प्रवेश द्वार पर थे। बड़ों का टिकट 30 रुपये बच्चों का 10 रुपये कैमरे का 30 रुपये अलग से। मोबाइल कैमरा, आईपैड, टैब आदि के लिए भी टिकट लेना जरूरी है। हैंडीकैम से सूट करना चाहते हैं तो 150 रुपये। जू सुबह 9 से 5 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार को बंद। हर रोज दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ होती है।
दलों में लोकतंत्र खत्म होने का नतीजा है वंशवाद

राजीव रंजन झा :
बिहार के चुनावी नतीजों और उसके बाद खास कर तेजस्वी यादव को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद एक बार फिर से वंशवाद पर बहस छिड़ गयी है। बिहार सरकार में तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री और तेज प्रताप यादव को कैबिनेट बनाये जाने पर लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती ने जवाब दिया है कि जनता ने उन्हें चुन कर भेजा है। यह वही तर्क है, जो कभी सारे कांग्रेसी राहुल गांधी के लिए और उससे पहले राजीव गांधी और उससे भी पहले इंदिरा गांधी के लिए देते रहे हैं।
विचित्र होली

प्रेमचंद :
होली का दिन था; मिस्टर ए.बी. क्रास शिकार खेलने गये हुए थे। साईस, अर्दली, मेहतर, भिश्ती, ग्वाला, धोबी सब होली मना रहे थे। सबों ने साहब के जाते ही खूब गहरी भंग चढ़ायी थी और इस समय बगीचे में बैठे हुए होली, फाग गा रहे थे। पर रह-रहकर बँगले के फाटक की तरफ झाँक लेते थे कि साहब आ तो नहीं रहे हैं। इतने में शेख नूरअली आकर सामने खड़े हो गये।
तमिलनाडु की ओर – वणक्कम चेन्नई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अगर आपको देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की लंबी यात्रा करनी हो तो रेल से बेहतर कुछ नहीं। एक के बाद दूसरे राज्य में प्रवेश करती रेल बदलता खानपान और बोली। यह रेल में ही दिखायी दे सकता है। पर दिल्ली से चेन्नई और हैदराबाद का सफर मैं कई बार रेल से कर चुका था। सो इस बार तीस घंटे रेल में गुजारने के बजाए तीन घंटे फ्लाइट में गुजारने का तय किया। इससे हमारे दो दिन की बचत भी होने वाली थी।
सौभाग्य के कोड़े

प्रेमचंद :
लड़के क्या अमीर के हों, क्या गरीब के, विनोदशील हुआ ही करते हैं। उनकी चंचलता बहुधा उनकी दशा और स्थिति की परवा नहीं करती। नथुवा के माँ-बाप दोनों मर चुके थे, अनाथों की भाँति वह राय भोलानाथ के द्वार पर पड़ा रहता था। रायसाहब दयाशील पुरुष थे। कभी-कभी एक-आधा पैसा दे देते, खाने को भी घर में इतना जूठा बचता था कि ऐसे-ऐसे कई अनाथ अफर सकते थे, पहनने को भी उनके लड़कों के उतारे मिल जाते थे, इसलिए नथुवा अनाथ होने पर भी दुखी नहीं था। रायसाहब ने उसे एक ईसाई के पंजे से छुड़ाया था। इन्हें इसकी परवा न हुई कि मिशन में उसकी शिक्षा होगी, आराम से रहेगा; उन्हें यह मंजूर था कि वह हिंदू रहे। अपने घर के जूठे भोजन को वह मिशन के भोजन से कहीं पवित्र समझते थे। उनके कमरों की सफाई मिशन की पाठशाला की पढ़ाई से कहीं बढ़कर थी। हिंदू रहे, चाहे जिस दशा में रहे। ईसाई हुआ तो फिर सदा के लिए हाथ से निकल गया।
पुडुचेरी बॉटानिकल गार्डन और चर्च

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पुडुचेरी के दर्शनीय स्थलों में से एक है बॉटानिकल गार्डन। यह गार्डन नए बस स्टैंड और पुराने बस स्टैंड के बीच लाल बहादुर शास्त्री स्ट्रीट पर स्थित है। इसे पुराना बुसी रोड भी कहते हैं। कई लोग इस सड़क को बीच रोड भी कहते हैं।
रिश्तों के साथ जीना

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
दीदी की शादी थी। एक रात पहले घर के सामने सड़क पर टेंट लगाया जा रहा था। कुर्सियाँ बिछायी जा रही थीं। हल्की-हल्की सर्दी थी। पिताजी, चाचा, मामा, मौसा, फूफा, ताऊ जी सब वहीं डटे थे। किसी को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गयी थी, सब के सब अपनी जिम्मेदारी समझ रहे थे।
अपेक्षित बनाम उपेक्षित

सुशांत झा, पत्रकार :
आधे से ज्यादा पत्रकारों और करीब 80% पब्लिक को पूछा जाए कि अपेक्षित और उपेक्षित में क्या फर्क है तो दाँत निपोड़ देंगे, लेकिन लालू के कुमार ने कह दिया तो मजे ले रहे हैं।
ताज मेरा है

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
सुप्री- कोर्ट ने यूपी सरकार को हड़काया है कि बरसों पहले ताजमहल बनाया जा सकता है तो आज सड़कें क्यों नहीं बनायी जा सकतीं।



प्रेमचंद :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राजीव रंजन झा :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुशांत झा, पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :




