देश मंथन डेस्क
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प्रेमचंद :
सारे गाँव में मथुरा का-सा गठीला जवान न था। कोई बीस बरस की उमर थी। मसें भीग रही थीं। गउएँ चराता, दूध पीता, कसरत करता, कुश्ती लड़ता था और सारे दिन बाँसुरी बजाता हाट में विचरता था। ब्याह हो गया था, पर अभी कोई बाल-बच्चा न था। घर में कई हल की खेती थी, कई छोटे-बड़े भाई थे।
बिहार चुनाव : विकास, गोकसी और आरक्षण का मुद्दा है भारी

संदीप त्रिपाठी :
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान होने में एक हफ्ते हैं। बीते महीने में विश्लेषक यह आकलन करते रहे कि दोनों प्रमुख चुनावी गठबंधनों, राजद + जदयू + कांग्रेस के महागठबंधन और भाजपा + लोजपा + रालोसपा + हम के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच बाजी किसके हाथ रहेगी। और यह भी कि तारिक अनवर के नेतृत्व में सपा + राकांपा + जन अधिकार पार्टी (पप्पू यादव) + समरस समाज पार्टी (नागमणि) + समाजवादी जनता पार्टी (देवेंद्र यादव) + नेशनल पीपुल्स पार्टी (पीए संगमा) का गठबंधन धर्मनिरपेक्ष समाजवादी मोर्चा इन दोनों प्रमुख गठबंधनों में कहाँ किसके वोटबैंक में सेंध लगायेगा। और यह भी कि हैदराबाद की राजनीतिक पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी बिहार के सीमांचल क्षेत्र में क्या गुल खिला पायेंगे और इससे किसको नुकसान और किसको फायदा होगा और इनके पीछे कौन है।
भरतपुर का संग्रहालय : 56 खंभे लाल दीवारें

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
भरतपुर किले के अंदर भरतपुर स्टेट म्यूजियम स्थित है जिसको देखे बिना आपकी भरतपुर यात्रा अधूरी है। ऑटो रिक्शा वाला मुझे भरतपुर किले के मुख्य द्वार पर छोड़ देता है। पुल पारकर अष्टधातु गेट से मैं अंदर प्रवेश करता हूँ। कई घोड़ा गाड़ी दिखायी देते हैं। यानी भरतपुर शहर में अभी भी घोड़ा गाड़ी चलते हैं। मैं देखता हूँ कि किले के मुख्य द्वार के अंदर भी आबादी बसी है। दुकाने हैं लोगों के घर हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर टाउन हाल आता है। यहाँ से बाईं तरफ चलने पर स्टेट म्यूजियम का पता पा लेता हूँ। गरमी है इसलिए रूक कर जूस पीता हूँ। संग्राहलय के प्रवेश द्वार पर टिकट घर है। प्रवेश टिकट 10 रुपये का है।
भारतीय क्रिकेट के ‘अन्ना’ शशांक के हाथों में कमान

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
स्वच्छ छवि के शशांक मनोहर दुबारा बीसीसीआई के मुखिया बन गये। पवार-ठाकुर गुट ने हाथ मिलाया। भारतीय क्रिकेट की छवि को श्रीनि के आपातकाल की याद दिलाने वाले कार्यकाल के दौरान जो गहरे दाग लगे थे, इससे व्यथित भारतीय क्रिकट प्रेमियों के लिए यह जबरदस्त खुशखबरी है। 2013 के आईपीएल फिक्सिंग कांड के समय जब बोर्ड के अन्य सभी बाहुबली मौन धारण किए बैठे थे तब यह क्रिकेट का 'अन्ना' अकेले दहाड़ा था - 'श्रीनिवासन गद्दी छोड़ो'।
मैं हिन्दू हूँ

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी कल की पोस्ट पर एक परिजन ने अपने कमेंट में मुझसे पूछा है, “भारत में कौन सी हिन्दू माँ अपने बेटे को ईसा मसीह की कहानी सुनाती है? ज्यादातर माँएँ तो यह भी नहीं जानती कि ईसा कौन आदमी था? आपने झूठी पोस्ट लिखी है। और माँ द्वारा कहानी तो गांधीजी की भी नहीं सुनाई जाती। भैया कौन से ग्रह से आए हो?”
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तब बहुत बदल चुका होगा देश!

कमर वहीद नकवी , वरिष्ठ पत्रकार :
तीन कहानियाँ हैं! तीनों को एक साथ पढ़ सकें और फिर उन्हें मिला कर समझ सकें तो कहानी पूरी होगी, वरना इनमें से हर कहानी अधूरी है! और एक कहानी इन तीनों के समानान्तर है। ये दोनों एक-दूसरे की कहानियाँ सुनती हैं और एक-दूसरे की कहानियों को आगे बढ़ाती हैं और एक कहानी इन दोनों के बीच है, जिसे अक्सर रास्ता समझ में नहीं आता। और ये सब कहानियाँ बरसों से चल रही हैं, एक-दूसरे के सहारे! विकट पहेली है। समझ कर भी किसी को समझ में नहीं आती!
स्वर्ग की देवी

प्रेमचंद :
भाग्य की बात! शादी-विवाह में आदमी का क्या अख्तियार! जिससे ईश्वर ने, या उनके नायबों- ब्राह्मणों ने तय कर दी, उससे हो गयी। बाबू भारतदास ने लीला के लिए सुयोग्य वर खोजने में कोई बात उठा नहीं रखी। लेकिन जैसा घर-वर चाहते थे, वैसा न पा सके। वह लड़की को सुखी देखना चाहते थे, जैसा हर एक पिता का धर्म है; किंतु इसके लिए उनकी समझ में सम्पत्ति ही सबसे जरूरी चीज थी। चरित्र या शिक्षा का स्थान गौण था। चरित्र तो किसी के माथे पर लिखा नहीं रहता और शिक्षा का आजकल के जमाने में मूल्य ही क्या? हाँ, सम्पत्ति के साथ शिक्षा भी हो तो क्या पूछना! ऐसा घर उन्होंने बहुत ढूँढ़ा, पर न मिला। ऐसे घर हैं ही कितने जहाँ दोनों पदार्थ मिलें? दो-चार मिले भी तो अपनी बिरादरी के न थे। बिरादरी भी मिली, तो ज़ायजा न मिला; जायजा भी मिला तो शर्तें तय न हो सकीं।
दीनदयाल उपाध्याय होने का मतलब

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
राजनीति में विचारों के लिए सिकुड़ती जगह के बीच पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ज्योतिपुंज की तरह सामने आता है। अब जबकि उनकी विचारों की सरकार पूर्ण बहुमत से दिल्ली की सत्ता में स्थान पा चुकी है, तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर दीनदयाल उपाध्याय की विचारयात्रा में ऐसा क्या है जो उन्हें उनके विरोधियों के बीच भी आदर का पात्र बनाता है।
खुशियाँ बाँटते हैं कपिल

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कल कपिल से मिला। कॉमेडी विद कपिल शर्मा वाले कपिल से।
पुण्य सलिला माँ गंगा का मन्दिर – गंगा महारानी मन्दिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गंगा महारानी का मन्दिर राजस्थान के भरतपुर शहर का बहुत ही सुंदर मन्दिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसके बनने में 90 साल का समय लगा था। यह मन्दिर भरतपुर किले के मुख्य द्वार के सामने स्थित है। मन्दिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। मन्दिर के अंदर मगरमच्छ पर सवार माँ गंगा की प्रतिमा है।



प्रेमचंद :
संदीप त्रिपाठी :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कमर वहीद नकवी , वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 




