देश मंथन डेस्क
डिसलाइक और फेसबुक कवि

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
जुकरबर्गजी फेसबुक पर डिसलाइक का विकल्प देनेवाले हैं, इस विकल्प से सबसे ज्यादा हैरान-परेशान फेसबुक कवि हैं।
रवीश कुमार की पीड़ा
खुद पर भरोसा

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
माँ कहती थी कि वो लोग किसी काम के नहीं होते जो खुद पर भरोसा नहीं करते, खुद की इज्जत नहीं करते। माँ मुझे ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह दिया करती थी जो खुद को कोसते हैं। वो कहती थी कि दुनिया को जीतना उतना मुश्किल नहीं होता, जितना खुद को जीतना होता है।
यह छोटा-सा कदम उठेगा हुजूर?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
शर्म कहीं मिलती है? दिल्ली में कहीं मिलती है? अपने देश में कहीं मिलती है? यहाँ तो कहीं नहीं मिलती! किसी को उसकी जरूरत ही नहीं है! यह देश की राजधानी का आलम है। जहाँ बड़ी-बड़ी सरकारें हैं। वहाँ अस्पतालों की ऐसी बेशर्मी, ऐसी बेहयाई है कि शर्म कहीं होती तो शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरती! लेकिन दिल्ली में कुछ नहीं हुआ। न अस्पतालों को, न सरकारों को! सब वैसे ही चल रहा है, जैसे कुछ हुआ ही न हो!
एक चार मीनार और रंग हजार

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हैदराबाद शहर की पहचान चार मीनार से है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्मारक है चार मीनार। 400 साल से ज्यादा हो गये, चार मीनार शान से खड़ा है। चार मीनार को मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने बनवाया था। सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह, कुतुब शाही राजवंश का पाँचवाँ शासक था। इसका निर्माण 1591 ई में हुआ।
उध्दार

प्रेमचंद :
हिंदू समाज की वैवाहिक प्रथा इतनी दूषित, इतनी चिंताजनक, इतनी भयंकर हो गयी है कि कुछ समझ में नहीं आता, उसका सुधार क्योंकर हो। बिरले ही ऐसे माता-पिता होंगे जिनके सात पुत्रों के बाद भी एक कन्या उत्पन्न हो जाय तो वह सहर्ष उसका स्वागत करें। कन्या का जन्म होते ही उसके विवाह की चिंता सिर पर सवार हो जाती है और आदमी उसी में डुबकियाँ खाने लगता है। अवस्था इतनी निराशामय और भयानक हो गयी है कि ऐसे माता-पिताओं की कमी नहीं है जो कन्या की मृत्यु पर हृदय से प्रसन्न होते हैं, मानो सिर से बाधा टली।
रिश्तों के कपड़े

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
“माँ, मैं इस बार लाल फूलों वाली कमीज नहीं पहनूँगा।”
स्त्री और पुरुष

प्रेमचंद :
विपिन बाबू के लिए स्त्री ही संसार की सुन्दर वस्तु थी। वह कवि थे और उनकी कविता के लिए स्त्रियों के रूप और यौवन की प्रशंसा ही सबसे चित्तकर्षक विषय था। उनकी दृष्टि में स्त्री जगत् में व्याप्त कोमलता, माधुर्य और अलंकारों की सजीव प्रतिमा थी। जबान पर स्त्री का नाम आते ही उनकी आँखें जगमगा उठती थीं, कान खड़े हो जाते थे, मानो किसी रसिक ने गान की आवाज सुन ली हो।
जय माँ कैला देवी में डाकू भी आते हैं मन्नत माँगने

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राजस्थान के करौली जिले में शक्ति की देवी कैला देवी का मन्दिर सुन्दर है। इस मन्दिर के प्रति राजस्थान, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के लोगों में अगाध आस्था है। यहाँ तक की चंबल के क्षेत्र में सक्रिय डाकू भी इस मन्दिर में माँ की आराधना करने आया करते थे।
अभी जिन्दगी जीओ

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मैंने एक नयी साइकिल खरीदी है। गियर वाली साइकिल मैंने दुकान में देखी और खरीद ली। हालाँकि पत्नी ने मुझे साइकिल खरीदते देखकर टोका भी था कि क्या करोगे? मैंने उसकी तरफ गंभीर नजरों से देखा और कहा कि तुम्ही तो कहती हो कि वजन बढ़ रहा है, तो अब साइकिल खरीद लूँगा और इसे चलाऊँगा। अब यह मत पूछना कि साइकिल चलाने से वजन कम होता है क्या?



आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :




