Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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स्टिंग ऑपरेशन और आजम खान

दीपक शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार :  

भड़ास4मीडिया वेबसाइट से मालूम हुआ कि आजम खान साहब ने मेरे ऊपर कई मुकदमे दर्ज कराये हैं। यह भी पता लगा कि विधान सभा की 2013 में गठित की गयी जाँच समिति ने मुजफ्फरनगर दंगों पर आजतक के दिखाए स्टिंग ऑपरेशन पर रिपोर्ट बना ली है।

बेटियों से उजाला होता है

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

अपने एक परिचित का हालचाल पूछने के लिए मुझे कल दिल्ली के मैक्स अस्पताल में जाना पड़ा। वहाँ ऑपरेशन थिएटर के पास मैं अपने परिचित के बाहर आने का इंतजार कर रहा था। एक-एक कर कई मरीज स्ट्रेचर पर बाहर लाये जा रहे थे। मैं सभी मरीजों और उनके परिजनों को गौर से देखता। जैसे ही कोई मरीजा बाहर आता, उनके परिजनों के चेहरे खिल उठते। डॉक्टर बाहर आकर पूछता कि क्या आप फलाँ के साथ हैं?

बालक

प्रेमचंद :

गंगू को लोग ब्राह्मण कहते हैं और वह अपने को ब्राह्मण समझता भी है। मेरे सईस और खिदमतगार मुझे दूर से सलाम करते हैं। गंगू मुझे कभी सलाम नहीं करता। वह शायद मुझसे पालागन की आशा रखता है। मेरा जूठा गिलास कभी हाथ से नहीं छूता और न मेरी कभी इतनी हिम्मत हुई कि उससे पंखा झलने को कहूँ। जब मैं पसीने से तर होता हूँ और वहाँ कोई दूसरा आदमी नहीं होता, तो गंगू आप-ही-आप पंखा उठा लेता है; लेकिन उसकी मुद्रा से यह भाव स्पष्ट प्रकट होता है कि मुझ पर कोई एहसान कर रहा है और मैं भी न-जाने क्यों फौरन ही उसके हाथ से पंखा छीन लेता हूँ।

चले जाना साइकिल मैन ऑफ इंडिया का…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

साल 2000 की कोई तारीख थी। मैं अमर उजाला जालंधर में शिक्षा बीट पर संवाददाता हुआ करता था। जालंधर नकोदर रोड पर एक रिजार्ट में रविवार की सुनहरी दोपहर में कई स्कूलों का एक संयुक्त आयोजन था, जिसका स्पांसर कंपनी हीरो साइकिल थी। सैकड़ों बच्चे हीरो की नयी-नयी साइकिलों पर रिजार्ट के अंदर फुदक रहे थे।

दूध का दाम

प्रेमचंद :

अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और जच्चेखानों में सुधार की आवश्यकता को मानते थे, लेकिन इसमें जो बाधाएँ थीं, उन पर कैसे विजय पाते ? कोई नर्स देहात में जाने पर राजी न हुई और बहुत कहने-सुनने से राजी भी हुई, तो इतनी लम्बी-चौड़ी फीस माँगी कि बाबू साहब को सिर झुकाकर चले आने के सिवा और कुछ न सूझा।

आ अब लौट चलें

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

सबको एक दिन घर लौटना होता है। भाग्यशाली होते हैं वो लोग, जिन्हें घर के बारे में पता होता है। मैं तो बहुत से लोगों से मिला हूँ, उन्हें पता ही नहीं कि उनका घर कहाँ है। वो हर रात सोते हैं, फिर सुबह होते ही भटकने लगते हैं, अपने घर की तलाश में। वो जिन्दगी जीने की तैयारी में अपने हिस्से की ढेर सारी जिन्दगी जाया कर चुके हैं।

मुस्लिम बहुल सीटें करेंगी लालू-नीतीश के भाग्य का फैसला

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

आमतौर पर यहीं माना जा रहा है कि इसबार महागठबंधन के पक्ष में और एनडीए के विरोध में अल्पसंख्यकों की गोलबंदी होगी। बिहार में 47 सीटें ऐसी हैं

इंसान सोच से ऊँचा होता है

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

पोप जॉन पॉल द्वितीय 1999 में भारत यात्रा पर आये थे। मैं उन दिनों जी न्यूज में रिपोर्टिंग करता था और मेरी ड्यूटी पोप के साथ लगायी गयी थी। पोप अपनी दिल्ली यात्रा में पालम स्थित सेना हवाई अड्डे पर उतरे थे और वहीं से मेरी रिपोर्टिंग शुरू हुई थी। सफेद लिबास में लिपटे, सिर पर छोटी सी टोपी लगाए पोप अपने विशेष विमान से दिल्ली पहुँचे थे। 

बासी भात में खुदा का साझा

प्रेमचंद :

शाम को जब दीनानाथ ने घर आकर गौरी से कहा, कि मुझे एक कार्यालय में पचास रुपये की नौकरी मिल गई है, तो गौरी खिल उठी। देवताओं में उसकी आस्था और भी दृढ़ हो गयी। इधर एक साल से बुरा हाल था। न कोई रोजी न रोजगार। घर में जो थोड़े-बहुत गहने थे, वह बिक चुके थे। मकान का किराया सिर पर चढ़ा हुआ था। जिन मित्रों से कर्ज मिल सकता था, सबसे ले चुके थे। साल-भर का बच्चा दूध के लिए बिलख रहा था। एक वक्त का भोजन मिलता, तो दूसरे जून की चिन्ता होती। तकाजों के मारे बेचारे दीनानाथ को घर से निकलना मुश्किल था।

हकीकत बना पटना दीघा रेल सह सड़क पुल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

देश का सबसे लंबा सड़क सह रेल पुल ( RAIL CUM ROAD BRIDGE) अब हकीकत बन चुका है। इसके साथ ही बिहार निवासियों के सपनों को पंख लग गये हैं। अब उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच करोड़ों लोगों का संपर्क सुलभ हो सकेगा। यह बिहार में गंगा पर बना दूसरा रेल पुल है। इससे पहले मोकामा में राजेंद्र पुल 1959 में शुरू हुआ था। दीघा सोनपुर रेल सह सड़क पुल का निर्माण इरकॉन इंटरनेशनल ने किया है। पाटलिपुत्र जंक्शन से सोनपुर रेलवे स्टेशन की दूरी 14.33 किलोमीटर है, जबकि गंगा ब्रिज की लंबाई 4.56 किलोमीटर है।