देश मंथन डेस्क
पोर्न साइट्स का ज्ञान

विकास मिश्रा, आजतक :
तब मेरी उम्र करीब 9-10 साल रही होगी। घर में बड़े भइया की पहली संतान का जन्म हुआ था। बेटा हुआ था और ये खबर मुझे स्कूल में मिली थी। उससे पहले हमें पता तक नहीं था कि भाभी संतान को जन्म देने वाली हैं। घर पहुँचे तो खुशियाँ अपरम्पार।
विरासत की याद – काँगड़ा घाटी रेलवे का स्टीम लोकोमोटिव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
काँगड़ा के रेल में सेवा देने वाले स्टीम लोकोमोटिव में जेडएफ 107 की चर्चा महत्वपूर्ण है। यह नैरोगेज रेलवे सिस्टम का एक शक्तिशाली लोकोमोटिव था। काँगड़ा घाटी रेलवे को लंबे समय तक सेवाएँ देने वाला एक लोकोमोटिव इन दिनों नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पहाड़ गंज वाले निकास द्वार के पास आराम फरमा रहा है।
देश को क्यों बाँट रहा है मीडिया

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकान्त झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे जैसे बहुत कम आयु और अनुभव में छोटे व्यक्ति से पूछा “आखिर देश का कौन सा प्रश्न या मुद्दा है जिस पर सभी देशवासी और राजनीतिक दल एक है?” जाहिर तौर पर मेरे पास इस बात का उत्तर नहीं था। आज जब झा साहब इस दुनिया में नहीं हैं, तो याकूब मेमन की फाँसी पर देश को बँटा हुआ देखकर मुझे उनकी बेतरह याद आयी।
सोच में बदलाव

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कल मैंने लिखा था कि मुझसे मेरे एक परिचित ने पूछा था कि फेसबुक पर रोज लिख कर मैं अपना समय क्यों जाया करता हूँ, तो मैंने बता दिया था कि यही वो मेला है, जहाँ मुझे अपने सारे खोया हुए रिश्ते मिले हैं।
कैदी

प्रेमचंद :
चौदह साल तक निरन्तर मानसिक वेदना और शारीरिक यातना भोगने के बाद आइवन ओखोटस्क जेल से निकला; पर उस पक्षी की भाँति नहीं, जो शिकारी के पिंजरे से पंखहीन होकर निकला हो बल्कि उस सिंह की भाँति, जिसे कठघरे की दीवारों ने और भी भयंकर तथा और भी रक्त-लोलुप बना दिया हो।
मोटर के छींटे

प्रेमचंद :
क्या नाम कि... प्रात:काल स्नान-पूजा से निपट, तिलक लगा, पीताम्बर पहन, खड़ाऊँ पाँव में डाल, बगल में पत्रा दबा, हाथ में मोटा-सा शत्रु-मस्तक-भंजन ले एक जजमान के घर चला। विवाह की साइत विचारनी थी। कम-से-कम एक कलदार का डौल था। जलपान ऊपर से। और मेरा जलपान मामूली जलपान नहीं है। बाबुओं को तो मुझे निमन्त्रित करने की हिम्मत ही नहीं पड़ती।
पराये मर्द का लाइक

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार
शिष्टाचार अलग है और फेसबुक का शिष्टाचार अलग है।
झुंझनू में रानी सती का मन्दिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राजस्थान के झुंझनू में स्थित है रानी सती का मन्दिर। शह के बीचों बीच स्थित मन्दिर झुंझनू शहर का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। बाहर से देखने में ये मन्दिर किसी राजमहल सा दिखायी देता है। पूरा मन्दिर संगमरमर से निर्मित है। इसकी बाहरी दीवारों पर शानदार रंगीन चित्रकारी की गयी है। मन्दिर में शनिवार और रविवार को खास तौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
प्यार

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
स्कूल में मास्टर साहब पढ़ा रहे थे। अचानक मास्टर ने क्लास में सभी बच्चों से पूछा, “बच्चों तुम्हें अचानक भगवान मिल जाएँ और तुमसे कहें कि तुम क्या माँगते हो, विद्या या धन, तो तुम क्या माँगोगे?”
याकूब मेमन और एक सवाल!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
याकूब मेमन को तो फाँसी हो चुकी। बहस जारी है और शायद अभी यह बहस जारी रहे। बहुत-सारी बातें हो चुकी हैं। मजहबी रंग की बातें हो चुकी हैं, राष्ट्रवादी जुमलों की तोपें चल चुकी हैं, कानूनी दाँव-पेंच हो चुके हैं। फिर भी बहस अभी जारी है कि याकूब को फाँसी होनी चाहिए थी या नहीं? लोगों के अपने-अपने निष्कर्ष हैं, जिससे वे डिगना नहीं चाहते।



विकास मिश्रा, आजतक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
प्रेमचंद :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:




