Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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मृत्यु घर वापसी?

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

माँ को पता था कि वो अब इस संसार से चली जाएगी। लेकिन माँ विचलित नहीं थी। उसे मृत्यु का खौफ नहीं था। माँ मुझे समझाती थी कि मौत के बाद का संसार किसी को नहीं पता, लेकिन मैंने ऐसा महसूस किया है कि यह घर वापसी की तरह है। 

मृत्यु घर वापसी? 

राजनीति में शुचिता के सवाल

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

राजनीति में शुचिता और पवित्रता के सवाल अब हवा हो गये लगते हैं। जोर अब सादगी, शुचिता और ईमानदारी पर नहीं है। आप हमसे अधिक भ्रष्ट हैं, यह कहकर अपने पाप कम करने की कोशिशें की जा रही हैं। समाज इस नजारे को भौंचक होकर देख रहा है। देश के हर राज्य में ऐसी कहानियाँ पल रही हैं और राजनीति व नौकरशाही दोनों इसे विवश खड़े देख रहे हैं। भ्रष्टाचार की तरफ देखने का हमारा दृष्टिकोण चयनित है। हमारे और तुम्हारे लोगों की जंग में देश छला जा रहा है।

चाहत का असर

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

आज अजय देवगन और तब्बू से मुलाकात होगी। आज हम साथ लंच करेंगे। 

मनोवृत्ति

प्रेमचंद :

एक सुंदर युवती, प्रात:काल, गाँधी-पार्क में बिल्लौर के बेंच पर गहरी नींद में सोयी पायी जाय, यह चौंका देनेवाली बात है।

कलियुग में हारे का सहारा हैं खाटू श्याम

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम का प्रसिद्ध मन्दिर है। देश भर से श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुँचते हैं। खाटू श्याम जी महाभारत की कथा के बबर्रीक हैं।

सत्यमेव पिटते की कहानी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार

सुपर-डुपर हिट पब्लिक स्कूल के पुराने छात्रों का गेट-टुगेटर चल रहा था। अचानक से एक बंदा खड़ा हुआ और चीखने लगा- मैं स्कूल पर मुकदमा करुँगा। मैं स्कूल के प्रबंधकों पर इस बात का मुकदमा चलाऊँगा कि मुझे सब गलत-सलत पढ़ाया, सिखाया गया। मैं स्कूल के खिलाफ कंजूमर फोरम जाऊँगा। 

हनुमान जी का अदभुत मन्दिर – सालासर बालाजी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

सालासर के बालाजी भगवान यानी हनुमान जी देश भर के बजरंगबली के भक्तों में काफी लोकप्रिय हैं। सालासर बालाजी का मन्दिर राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है। वर्ष भर में लाखों भारतीय भक्त दर्शन के लिए सालासर धाम जाते हैं। सालासर बालाजी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मन्दिर के आसपास भक्तों के आवास के लिए 180 से ज्यादा धर्मशालाएँ, सेवा सदन और होटल बने हैं।

रसिक संपादक

प्रेमचंद :

'नवरस' के संपादक पं. चोखेलाल शर्मा की धर्मपत्नी का जब से देहांत हुआ है, आपको स्त्रियों से विशेष अनुराग हो गया है और रसिकता की मात्रा भी कुछ बढ़ गयी है। पुरुषों के अच्छे-अच्छे लेख रद्दी में डाल दिये जाते हैं; पर देवियों के लेख कैसे भी हों, तुरंत स्वीकार कर लिये जाते हैं और बहुधा लेख की रसीद के साथ लेख की प्रशंसा कुछ इन शब्दों में की जाती है- आपका लेख पढ़कर दिल थामकर रह गया, अतीत जीवन आँखो के सामने मूर्तिमान हो गया, अथवा आपके भाव साहित्य-सागर के उज्जवल रत्न हैं, जिनकी चमक कभी कम न होगी। और कविताएँ तो हृदय की हिलोरें, विश्व-वीणा की अमर तान, अनंत की मधुर वेदना, निशा का नीरव गान होती थीं। प्रशंसा के साथ दर्शन की उत्कट अभिलाषा भी प्रकट की जाती थी। यदि आप कभी इधर से गुजरें तो मुझे न भूलिएगा। जिसने ऐसी कविता की सृष्टि की है, उसके दर्शन का सौभाग्य मुझे मिला, तो अपने को धन्य मानूँगा।

पाँच साल झेलें

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

एक साधु बाबा थे। बहुत पहुँचे हुए थे। उनके कई भक्त थे।

तमाशों के बताशे खाइए!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :  

क्या तमाशा है? इधर तमाशा, उधर तमाशा, यह तमाशा, वह तमाशा! और पूरा देश व्यस्त है तमाशों के बताशों में! तेरा तमाशा सही या उसका तमाशा सही? तेरी गाली, उसकी गाली, तेरी ताली, उसकी ताली, तू गाल बजा, वह गाल बजाये, तेरी पोल, उसकी पोल, कुछ तू खोल, कुछ वह खोले! और देश बैठ कर बताशे तोले कि चीनी कहाँ कम है? कौन कम गलत है? है न अजब तमाशा!