देश मंथन डेस्क
25 साल में तो पाँच बार चुनाव होंगे हुजूर

राजीव रंजन झा :
देश के प्रमुख सत्ताधारी दल का अध्यक्ष होने के नाते अमित शाह को यह भी भान होगा कि केवल अपने कार्यकर्ताओं से 25 साल माँग लेना काफी नहीं है। उन्हें ये 25 साल देश की जनता से भी माँगने होंगे और जनता ने उन्हें दिया भी तो एकमुश्त नहीं देगी, किस्तों में देगी।
पेशों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी एक जानने वाली ने बहुत पहले तय कर लिया था कि उनकी बेटी हुई तो उसे वो डॉक्टर बनाएँगी, बेटा हुआ तो इंजीनियर।
आज की शिक्षा व्यवस्था

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
जब मैं छोटा था, माँ मेरे लिए पैंट और कमीज हाथ वाली सिलाई मशीन से घर पर खुद सिला करती थी। वो हाथ और उँगलियों से ये नाप लिया करती थी कि मेरे लिए कितने कपड़ों की जरूरत है और उसकी सिलाई एकदम शानदार हुआ करती थी।
जब महादेव ने की चाकरी – उगना महादेव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महादेव यानी शिव का अदभुत मन्दिर है मधुबनी जिले के भवानीपुर गाँव में। उगना महादेव या उग्रनाथ मन्दिर के नाम से यह मन्दिर प्रसिद्ध है। कहा जाता है यहाँ भगवान शिव ने मैथिली के महाकवि विद्यापति की चाकरी की थी।
अनुभव

प्रेमचंद :
प्रियतम को एक वर्ष की सजा हो गयी। और अपराध केवल इतना था, कि तीन दिन पहले जेठ की तपती दोपहरी में उन्होंने राष्ट्र के कई सेवकों का शर्बत-पान से सत्कार किया था। मैं उस वक्त अदालत में खड़ी थी। कमरे के बाहर सारे नगर की राजनैतिक चेतना किसी बंदी पशु की भाँति खड़ी चीत्कार कर रही थी।
सुभागी

प्रेमचंद :
और लोगों के यहाँ चाहे जो होता हो, तुलसी महतो अपनी लड़की सुभागी को लड़के रामू से जौ-भर भी कम प्यार न करते थे। रामू जवान होकर भी काठ का उल्लू था। सुभागी ग्यारह साल की बालिका होकर भी घर के काम में इतनी चतुर, और खेती-बारी के काम में इतनी निपुण थी कि उसकी माँ लक्ष्मी दिल में डरती रहती कि कहीं लड़की पर देवताओं की आँख न पड़ जाय। अच्छे बालकों से भगवान को भी तो प्रेम है। कोई सुभागी का बखान न करे, इसलिए वह अनायास ही उसे डाँटती रहती थी। बखान से लड़के बिगड़ जाते हैं, यह भय तो न था, भय था - नजर का ! वही सुभागी आज ग्यारह साल की उम्र में विधवा हो गयी।
भारत-पाक रिश्तेः कब पिघलेगी बर्फ

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तानी प्रधान मन्त्री से मुलाकात और उनका पाकिस्तान जाने का फैसला साधारण नहीं है। आखिर एक पड़ोसी से आप कब तक मुँह फेरे रह सकते हैं? बार-बार छले जाने के बावजूद भारत के पास विकल्प सीमित हैं, इसलिए प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी की इस साहसिक पहल की आलोचना बेमतलब है।
परिवार और रिश्ते

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी साली के बेटे से स्कूल टीचर ने उसके परिवार की तस्वीर बनाने के लिए कहा।
नेताजी, मान लीजिए कि दाँव गलत पड़ गया

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
कुछ मित्र कह रहे हैं कि मुलायम सिंह ने अमिताभ ठाकुर को फोन किया वह धमकाना नहीं है। कुछ का कहना है कि फोन में आवाज मुलायम सिंह की नहीं है। किसी का कहना है फोन टेप करके उसे सार्वजनिक करना गलत है और यह भी कि मुलायम सिंह सत्तारूढ़ दल के प्रमुख हैं – सरकार तो धमकाती ही रहती है। उस लिहाज से मुलायम सिंह ने जो कहा वह धमकी नहीं है। या उस पर इतना बवाल क्यों।
‘सुधर जाइये, इत्ता ही कह दिया मैंने’ : मुलायम

राजीव रंजन झा :
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश पुलिस के नागरिक सुरक्षा आईजी अमिताभ ठाकुर के बीच लगभग दो मिनट तक फोन पर बातचीत ने यह दिखा दिया है कि इस राज्य में जो कुछ चल रहा है, उसे सीधे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का खुला समर्थन प्राप्त है।



संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन: 




