Tag: विद्युत प्रकाश मौर्य
दक्षिण की काशी कांचीपुरम – मंदिरों का शहर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कांची और काशी में कोई समानता है। है ना। तो कांचीपुरम यानी दक्षिण की काशी। जैसे काशी में ढेर सारे मंदिर हैं ठीक उसी तरह कांचीपुरम में भी मंदिर ही मंदिर हैं। चेन्नई सेंट्रल से कांचीपुरम की दूरी 80 किलोमीटर है। यहाँ से ट्रेन या बस से जाया जा सकता है। पर सुगम तरीका लोकल ट्रेन है। सस्ती भी अरामदेह भी। चूँकि हम चेन्नई के तांब्रम इलाके में ठहरे थे तो वहाँ से कांचीपुरम 67 किलोमीटर ही था। तांब्रम रेलवे स्टेशन भी वैसे कांचीपुरम जिले में ही आता है। मानो आधा चेन्नई शहर कांचीपुरम जिले में है।
चेन्नई में लें उत्तर भारतीय स्वाद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
जिस तरह से दक्षिण भारतीय व्यंजन उत्तर भारत के राज्यों में रेस्टोरेंट की शोभा बढ़ाते हैं ठीक उसी तरह उत्तर भारत के व्यंजन भी दक्षिण भारतीय थाली की शोभा बढ़ाने लगे हैं। दक्षिण के शहर चेन्नई में अब कई जगह आपको उत्तर भारतीय खानपान के स्टाल और रेस्टोरेंट दिखायी दे सकते हैं।
मुरुगन इडली शॉप – तमिल स्वाद का आनंद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई के बेसेंट नगर में टहलते हुए मुरुगन इडली शॉप का बोर्ड नजर आता है। वास्तव में यह शोप नहीं बल्कि भरापूरा रेस्टोरेंट है। यहाँ सिर्फ इडली ही नहीं बल्कि डोसा, साउथ इंडियन मिल के अलावा मिठाइयाँ और पेय पदार्थ सब कुछ मिलते हैं।
नल्लामल्ला पर्वत पर विराजते हैं मल्लिकार्जुन स्वामी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देवों के देव महादेव। उनके मंदिर बने हैं देश के हर हिस्से में। अगर 12 ज्योतिर्लिंगों की बात करें तो इनमें से दक्षिण भारत में हैं। पहला रामेश्वरम और दूसरा श्रीशैलम में। शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में दूसरे स्थान पर आते हैं श्रीशैलम के मल्लिकार्जन स्वामी। इसे दक्षिण में दिव्य क्षेत्रम माना जाता है। यहाँ पहुँच कर अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
1903 में आरंभ हुआ था बराक घाटी रेलमार्ग

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
ब्रिटिश काल में साल 1882 से 1887 के बीच असम के बराक घाटी में लमडिंग बदरपुर के बीच रेल नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनी। हालाँकि तब स्थानीय डिमासा जनजाति के लोग गोरों का अपने क्षेत्र में प्रवेश करने का काफी विरोध कर रहे थे। वे अपनी जीवन शैली में किसी बाहरी तकनीक का प्रवेश नहीं होने देना चाहते थे। पर इस विरोध की परवाह न करते हुए 25 अक्तूबर 1887 को गवर्नर जनरल ने इस क्षेत्र में रेल लाइन बिछाने की अनुमति प्रदान की। तब ब्रिटिश सरकार असम के पहाड़ी क्षेत्रों को चटगांव ( अब बांग्लादेश में) बंदरगाह को रेलवे से जोड़ना चाहती थी, जिससे एक विकल्प दिया जा सके और कोलकता बंदरगाह पर दबाव कम हो सके। साथ ही सरकार को लगता था ये रेल लाइन चाय बगानों से चाय की सप्लाई और कोयला ढुलाई के लिए मुफीद साबित होगी।
शाम ढलने के साथ बढ़ती है मरीना बीच पर रौनक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
शाम को ढलते हुए सूरज की रोशनी में मरीना बीच की रौनक देखने लायक होती है। यह संसार के सबसे लंबे समुद्र तटों में से एक है। शाम को चौपाटी सजी होती है और हजारों लोग बीच पर मौज मस्ती में जुटे रहते हैं।
श्रीरंगपट्टनम का रंगनाथस्वामी मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वैसे तो श्रीरंगपट्टनम को टीपू सुल्तान के शहर के तौर पर जाना जाता है। लेकिन टीपू सुल्तान के महल के अवशेषों के बीच स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर का इतिहास और भी पुराना है। इस शहर का नाम ही रंगनाथ स्वामी के नाम पर पड़ा है। श्रीरंगपट्टनम मैसूर शहर से महज 19 किलोमीटर आगे बंगलुरु के रास्ते पर है। ऐतिहासिकता की दृष्टि से श्रीरंग पट्टनम दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण स्थल है जो मध्य तमिल सभ्यताओं के केन्द्र बिन्दु के रूप में स्थापित था। कावेरी नदी के तट पर स्थित यह शहर इतिहास के कई कालखंड में काफी उन्नत शहर था।
जार्ज पंचम, जार्ज टाउन, मद्रास और चेन्नई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई के ब्राडवे बस स्टैंड के पास एनसी बोस रोड पर ब्रिटेन के सम्राट रहे जार्ज पंचम की विशाल प्रतिमा लगी है। चेन्नई में उनके नाम से जार्ज टाउन नामक इलाका भी है। यह चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास स्थित चेन्नई का सबसे पुराना नगरीय क्षेत्र है। पर जार्ज टाउन का नाम कभी ब्लैकटाउन हुआ करता था।
धन, धान्य वैभव की देवी – अष्टलक्ष्मी मंदिर चेन्नई

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई के आडयार समुद्र तट पर अष्टलक्ष्मी का सुंदर मंदिर स्थित है। अष्टलक्ष्मी मंदिर देवी लक्ष्मी के आठ रूपों को समर्पित है। इन सभी के बारे में माना जाता है कि यह धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की रूप है। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी थी। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी हमारे जीवन में काफी महत्व है। अष्ट लक्ष्मी हमें धन, विद्या, वैभव, शक्ति और सुख प्रदान करती हैं।
चेन्नई का कपालेश्वर मंदिर – यहाँ पार्वती ने किया था तप

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई शहर में सबसे पुराना और प्रसिद्ध मंदिर है कपालेश्वर मंदिर। ये महादेव शिव का मंदिर है। साल का कोई भी दिन हो यहाँ हमेशा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कपालेश्वर मंदिर चेन्नई के मैलापुर इलाके में स्थित है। मंदिर के सामने एक विशाल सरोवर है। आसपास में घना बाजार है।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





