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मीडिया की संलिप्तता से झुक गया सिर
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
अगस्ता वेस्टलैंड घूस कांड में नेता, नौकरशाह और सैन्य अधिकारियों के साथ मीडिया की भी संलिप्तता ने पत्रकार बिरादरी का सिर शर्म से झुका दिया। पेड न्यूज का घिनौना चेहरा खुल कर सामने आया।
मीडियाकर्मियों का वेतन देखेंगे तो शर्म आ जाएगी सांसद महोदय
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
गरीब सांसदों को वेतन में बढ़ोतरी चाहिए। लाखों रुपये जो बतौर वेतन भत्ते मिलते हैं, वे कम हैं। राज्य सभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि मीडिया ट्रायल की वजह से संसद डरती है। उन्होंने हवाला यह दिया कि संपादकों के वेतन का चौथाई भी मिल जाये, वही बहुत है।
खून में सने बासित कुबूल नहीं
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
हालाँकि मैं गुलाम अली साहब की इस तकरीर से कतई सहमत नहीं हूँ कि सुरों से सरहद की दूरी कम होगी, चंद सियासतदां हिंदुस्तान-पाकिस्तान की दोस्ती में रोड़े अटका रहे हैं और दोनों मुल्क के बीच कलाकारों के जरिए रिश्ते मजबूत होंगे। वह सरासर बकवास कर रहे थे।
मोदी की कार्य शैली का समर्थन हूँ, अंध भक्त नहीं
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के समर्थन में दलाई लामा जी का बयान जो एक मित्र ने हमारी पोस्ट के कमेंट में लगाया था। उसे मैंने अपनी वाल पर पोस्ट कर दिया। बहुमत संघ के पक्ष में था जो कमेंट्स आए पर कुछ लोगों को यह आपत्ति है कि धर्मगुरु दलाई लामा का यह बयान नहीं है और मुझे कोसा गया कि मैं अपने पत्रकारिता धर्म को भूल कर अंध भक्ति में लगा हुआ हूँ।
संघ मुक्त भारत का आह्वान : सपने मत देखिए नीतीश बाबू
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
जिस संघ के साथ दशकों नाता रहा, निजी महत्वाकांक्षा में अर्थात प्रधानमंत्री बनने की ललक में, उसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पानी पी-पी कर जिस तरह से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोसते हुए यहाँ तक कह दिया कि देश को संघ मुक्त करने के लिए सभी विपक्षी दल एक हों, उसे वाकई गिरी हरकत कहा जाएगा।
मिशन यूपी 2017 : भाजपा के लिए खुद में झांकने का समय
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
यह कहने में शायद ही किसी को हिचक होगी कि एक हजार साल बाद देश में वह राज आया है, जहाँ सत्ता का शिखर पुरुष छद्म धर्मनिरपेक्षता का स्वांग नहीं करता और ' सबका साथ सबका विकास' के मंत्र का जाप करने के बावजूद भारतीय संस्कृति को बेखौफ ओढ़ता है। देश की विरासत और धरोहरों को सर-आँखों पर रखते हुए अनथक देश की दशा और दिशा बदलने में सतत प्रयत्नशील है। जिस सिस्टम को 15 अगस्त 1947 में बदल जाना चाहिए था, उसको जिन लोगों ने अपने फायदे के लिए बरकरार रखा और लालची मीडिया को अपने पाले में रखते हुए जिन्होंने भ्रष्टाचार को लूटपाट में बदल दिया। उस विकृत हो चुकी व्यवस्था को बदलने की प्रक्रिया की भी देश ने विगत दो वर्षों के दौरान शुरुआत होते देखा।
इसलिए हुई ‘वायस आफ क्रिकेट’ हर्ष भोगले की बर्खास्तगी
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
किसी की निजी खुन्नस ने करोड़ों टीवी दर्शकों का दिल तोड़ा।
देश का सबसे सम्माननीय कमेंटेटर हर्ष भोगले जिसका अंग्रेजी और हिंदी पर समान अधिकार रहा है और जिसे 'वायस आफ इंडियन क्रिकेट' कहा जाता है, बीसीसीआई की तानाशाही का शिकार हो गया। आईआईएम हैदराबाद के इस गोल्ड मेडलिस्ट को अचानक ही देश में चल रही आईपीएल कमेंट्री टीम से बर्खास्त कर दिया गया। पौने दो माह तक चलने वाली इस क्रिकेट लीग में उनकी दिलकश आवाज से प्रशंसक महरूम रहेंगे।
सट्टेबाजों की बहार, चढ़ा आईपीएल का बुखार
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
टी-20 विश्वकप की गहमागहमी अभी बनी हुई ही थी कि आ गया सट्टेबाजों का सालाना त्यौहार यानी दुनिया के सबसे बड़े खेल ब्रांडों में एक आईपीएल -9 जो नौ अप्रैल से प्रारंभ होने जा रहा है और जिसमें सट्टेबाजी-फिक्सिंग के आरोपों के चलते निलंबित चेन्नई सुपर किंग और राजस्थान रायल्स के स्थान पर धोनी की अगुवाई में राइजिंग पुणे और सुरेश रैना के नेतृत्व वाली गुजरात लायंस राजकोट को बतौर नयी फ्रेंचाइजी लीग में शामिल किया गया है।
शेन वार्न से बढ़ कर कोई कोच नहीं दूजा
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
विश्व क्रिकेट में ऐसी कई शख्सियत रही हैं कुशाग्र मस्तिष्क की जिनसे उनके देश अधिकतम लाभ उठाने में असफल रहे हैं। मैं अपने करियर के दौरान जिनको जानता हूँ उनमें कर्नाटक के हरफनमौला सुब्रह्मण्यम, हैदराबादी एम एल जयसिम्हा, अशोक मांकड़ 'काका' और रवि शास्त्री ऐसे क्रिकेटर रहे हैं, जिनमें वह सब कुछ था जो एक चतुर कप्तान के लिए अपरिहार्य माना जाता है। लेकिन वे बोर्ड के कृपा पात्र नहीं थे इसलिए शास्त्री को अपवाद मान लें जिन्हें कप्तान के चोटिल होने से एकाध टेस्ट व एक दिनी में यह सुयोग हाथ लगा अन्यथा तो इनमें से किसी को देश की बागडोर नहीं सौंपी गयी।
सुनिश्चित हो ओस न फले और न ही दिल तोड़े
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
क्रिकेट बोर्ड को अब खेल के साथ मजाक करने से बाज आ जाना चाहिए। अकूत संपदा की मालिक बीसीसीआई ने जिस बैट-बल्ले से यह मुकाम हासिल किया, उसे अब इस खेल को ही सर्वोच्च वरीयता देनी होगी।