Tag: Death
सियाचिन-दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धस्थल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमालय के पूर्वी कारकोरम रेंज में स्थित सियाचिन दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धस्थलों में से एक है। सियाचिन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद ( ग्लेसियर) है। भारत पाकिस्तान के बीच सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन सियाचिन में तैनात फौजियों की जिंदगी काफी मुश्किल है।
शवयात्रा में क्रिकेट

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
मैं ऊपर वाले प्रार्थना करता हूँ, कि जीते जी वह चाहे जैसा सलूक करे मेरे साथ। पर मेरी मौत उस दिन ना शेड्यूल करे, जिस दिन भारत और पाकिस्तान का वन डे क्रिकेट मैच हो।
छात्र आंदोलन : खो गया है रास्ता

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमूला की आत्महत्या की घटना ने हमारे शिक्षा परिसरों को बेनकाब कर दिया है। सामाजिक-राजनीतिक संगठनों में काम करने वाले छात्र अगर निराशा में मौत चुन रहे हैं, तो हमें सोचना होगा कि हम कैसा समाज बना रहे हैं? किसी राजनीति या विचारधारा से सहमति-असहमति एक अलग बात है, किंतु बात आत्महत्या तक पहुँच जाए तो चिंताएँ स्वाभाविक हैं।
सामना, शहादत और मातम!

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
जग नहीं सुनता कभी दुर्बल जनों का शांति प्रवचन
पाकिस्तान के जन्म की कथा, उसकी राजनीति की व्यथा और वहाँ की सेना की मनोदशा को जान कर भी जो लोग उसके साथ अच्छे रिश्तों की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें दुआ कि उनके स्वप्न पूरे हों। हमें पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाते समय सिर्फ इस्लामी आतंकवाद की वैश्विक धारा का ही विचार नहीं करना चाहिए बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि आखिर यह देश किस अवधारणा पर बना और अब तक कायम है? पाकिस्तान सेना का कलेजा अपने मासूम बच्चों के जनाजों को कंधा देते हुए नहीं काँपा (पेशावर काण्ड) तो पड़ोसी मुल्क के नागरिकों और सैनिकों की मौत उनके लिए क्या मायने रखती है।
शतरंज के खिलाड़ी

प्रेमचंद :
वाजिदअली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफीम की पीनक ही में मजे लेता था। जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था। शासन-विभाग में, साहित्य-क्षेत्र में, सामाजिक अवस्था में, कला-कौशल में, उद्योग-धंधों में, आहार-व्यवहार में सर्वत्र विलासिता व्याप्त हो रही थी। राजकर्मचारी विषय-वासना में, कविगण प्रेम और विरह के वर्णन में, कारीगर कलाबत्तू और चिकन बनाने में, व्यवसायी सुरमे, इत्र , मिस्सी और उबटन का रोजगार करने में लिप्त थे। सभी की आँखों में विलासिता का मद छाया हुआ था। संसार में क्या हो रहा है, इसकी किसी को खबर न थी।
पराये मर्द का लाइक

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार
शिष्टाचार अलग है और फेसबुक का शिष्टाचार अलग है।
मृत्यु घर वापसी?

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
माँ को पता था कि वो अब इस संसार से चली जाएगी। लेकिन माँ विचलित नहीं थी। उसे मृत्यु का खौफ नहीं था। माँ मुझे समझाती थी कि मौत के बाद का संसार किसी को नहीं पता, लेकिन मैंने ऐसा महसूस किया है कि यह घर वापसी की तरह है।
मृत्यु घर वापसी?
सीबीआई की पहली चुनौती है अक्षय का मामला

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
पत्रकार अक्षय सिंह की मौत कैसे हुई? क्या वह व्यापम घोटाले के किसी नये सच तक पहुँचने के करीब थे? क्या नम्रता दामोर की संदिग्ध मौत की पड़ताल करते-करते अक्षय इस घोटाले के किसी और सिरे तक पहुँचने वाले थे?
‘बेब’ कहीं का

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
'बेब' - ये नाम सुअर के एक बच्चे का है।
इन मौतों की जिम्मेदारी तो लेनी होगी सीएम साहब

राजीव रंजन झा :
व्यापम - एक ऐसा घोटाला, जिसमें खुद मुख्यमंत्री के परिवार के लोगों के भी नाम उछले हैं। उन पर आरोप सही हैं या गलत, यह तो जाँच के बाद अदालत को बताना है। लेकिन राज्य में जिस घोटाले को लेकर सबसे ज्यादा उथल-पुथल है, उसके गवाह और अभियुक्त एक के बाद एक रहस्यमय ढंग से मरते जा रहे हैं और अब इस मामले की छानबीन करने दिल्ली से पहुँचा आजतक का संवाददाता भी अचानक बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के मर जाये तो इससे क्या समझा जाये?



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
प्रेमचंद :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
राजीव रंजन झा :





