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मोदी जी, भाषण के आगे क्या है?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
तो मोदी जी फिर तैयार हो रहे हैं। नहीं, नहीं, विदेश यात्रा के लिए नहीं! लाल किले से अपने दूसरे भाषण के लिए! क्या बोलना है, क्या कहना है? तैयारी हो रही है।
यादें – 12

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
अगर मैं जेपी आंदोलन, इमरजंसी, इन्दिरा गाँधी, दीदी, विमला दीदी को इतनी शिद्दत से लगातार याद करता हूँ, तो मुझे याद करना होगा 1984 की उस तारीख को जिस दिन इन्दिरा गाँधी की हत्या हुई थी। मुझे याद करना होगा उस 'जनसत्ता' अखबार को जहां मेरी किस्मत के फूल खिलने जा रहे थे। और मुझे याद करना होगा प्रभाष जोशी को, जिनसे 'जनसत्ता' में रहते हुए चाहे संपादक और उप संपादक के पद वाली जितनी दूरी रही हो, लेकिन अखबार छूटते ही हमने दिल खोल कर बातें कीं।
मोदी मुहिम से पड़ोसियों के दिलों में उतरता भारत

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की सफल बंगलादेश यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेतृत्व आत्मविश्वास से भरा हो तो अपार सफलताएँ हासिल की जा सकती हैं। बंगलादेश से लेकर नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका तक अब नरेन्द्र मोदी की यशकथा कही और सुनी जा रही है।
ऐप्प मोदी 2.2 को क्या अपडेट चाहिए?

कमर वहीद नकवी , वरिष्ठ पत्रकार
मोदी 2.1 पर तो खूब बहस हो चुकी। बहस अभी और भी होगी। सरकार का पहला साल कैसा बीता, मोदी सरकार अपनी कहेगी, विरोधी अपनी कहेंगे, समीक्षक-विश्लेषक अपनी कहेंगे, बाल की खाल निकलेगी। लेकिन क्या उससे काम की कोई बात निकलेगी? मोदी सरकार के पहले साल पर यानी मोदी 2.1 पर हमें जो कहना था, हम पहले ही कह चुके। अब आगे बढ़ते हैं।
पीएम, प्रेसिडेंट की जगह महापुरुषों तस्वीर क्यों नहीं?

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पैसे से मन्त्रियों और नेताओं की मार्केटिंग पर रोक लगा दी है।
देश का ऊंघता नेतृत्व

अजय अनुराग :
विदेश से दो महीने की गुमनामी छुटियाँ (चिंतन अवकाश) बिताकर स्वदेश लौटे राहुल गांधी द्वारा कल संसद में दिया गया भाषण बेहद हैरान व परेशान करने वाला है।
खेती करके वह पाप कर रहे हैं क्या?

कमर वहीद नकवी , वरिष्ठ पत्रकार
किसान मर रहे हैं। खबरें छप रही हैं। आज यहाँ से, कल वहाँ से, परसों कहीं और से। खबरें लगातार आ रही हैं। आती जा रही हैं। किसान आत्महत्याएँ कर रहे हैं। इसमें क्या नयी बात है? किसान तो बीस साल से आत्महत्याएँ कर रहे हैं।
कश्मीरी पंडितों की वापसी से कौन डरता है?

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने को लेकर अलगाववादी संगठनों की जैसी प्रतिक्रियायें हुयी हैं, वे बहुत स्वाभाविक हैं। यह बात साबित करती है कि कश्मीर घाटी में जो कुछ हुआ, उसमें इन अलगाववादियों की भूमिका और समर्थन रहा है।
तीन मूर्ति भवन : यहाँ विराजती है दिलकश हरियाली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दिल्ली का तीन मूर्ति भवन। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का निवास स्थान। नेहरू जी के बाद को संग्रहालय और पुस्तकालय में परिणत कर दिया गया है।
उम्मीदों के बोझ से दबे हैं मोदी और ओबामा

राजेश रपरिया :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उम्मीदों के भारी बोझ से दबे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति दिल्ली पहुँच चुके हैं। नाभिकीय, ट्रांसफर प्राइसिंग, रक्षा वैदेशिक व्यापार संबध, जलवायु परिवर्तन आदि मुद्दों पर सार्थक पहल की उम्मीद दोनों देशों को है।



कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :
अजय अनुराग :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
राजेश रपरिया :





