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नीतीश कुमार का अहंकार और स्वाभिमान

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
बिहार चुनाव के मद्देनजर, भारतीय जनता पार्टी को बहुत तकलीफ है कि नीतीश कुमार अहंकारी हैं। और नीतीश कुमार न जाने क्यों सफाई देते घूम रहे हैं कि वह अहंकारी नहीं, स्वाभिमानी हैं। इतने समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बाद अगर यह बताना पड़े कि मैं यह हूँ, वह हूँ या वह नहीं हूँ तो क्या सार्वजनिक जीवन जीया।
बीमारू की राजनीति

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
बीमारू पर बड़ा कनफ्यूजन है। मुझे नहीं। कंफ्यूजन जानबूझकर पैदा किया जा रहा है। मोदी जी कह रहे हैं कि बिहार को बीमारू राज्य से बाहर निकालेंगे। मने बाकी को बीमारू ही रहने देंगे। जहाँ भाजपा की सरकार है उसे भी। आपको शायद ना मालूम हो पर झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी बीमारू राज्य हैं। नीतिश कुमार मोदी की तरह होते तो बताते। लेकिन वो बुरा मान जाते हैं। झटका खा जाते हैं। मुझे नहीं लगता कि आम आदमी खासकर 80 के दशक में पैदा हुई आज की युवा पीढ़ी को बीमारू राज्य का मतलब भी पता है। अगर पता होता तो यह दावा ही नहीं किया जाता कि बिहार को बीमारू राज्य से अलग करेंगे। बिहार को बीमारू से अलग कर देंगे तो “मारू” बचेगा। और आप से वो नहीं संभलने वाला।
नेताजी, मान लीजिए कि दाँव गलत पड़ गया

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
कुछ मित्र कह रहे हैं कि मुलायम सिंह ने अमिताभ ठाकुर को फोन किया वह धमकाना नहीं है। कुछ का कहना है कि फोन में आवाज मुलायम सिंह की नहीं है। किसी का कहना है फोन टेप करके उसे सार्वजनिक करना गलत है और यह भी कि मुलायम सिंह सत्तारूढ़ दल के प्रमुख हैं – सरकार तो धमकाती ही रहती है। उस लिहाज से मुलायम सिंह ने जो कहा वह धमकी नहीं है। या उस पर इतना बवाल क्यों।
लोग क्या कहेंगे

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
समाज में लोग क्या कहेंगे - सबसे बड़ी समस्या है। कुछ भी करो मना करना हो तो सबसे साधारण पर सबसे लचर दलील यही है। इसलिए रेडियो सिटी 91.1 एफएम ने जब अक्षय और जीनत का मामला उठाया तो मुझे लगा अब हो गया लोग क्या कहेंगे - का इंतजाम।
यात्रियों को लूटने के और भी तरीके हैं प्रभु जी

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
प्लेटफॉर्म टिकट जब 30 पैसे का आता था, तब से ले कर अब, जब यह 10 रुपये में मिलेगा तब तक - बिहार के छोटे-बड़े स्टेशनों से लेकर दिल्ली, मुंबई,कोलकाता,चेन्नई सब जगह देख चुका हूँ।



संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन: 





