Wednesday, September 16, 2026
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कहानी इत्तेफाक की

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

सुनिए, आज एक कहानी इत्तेफाक की सुनिए। आज एक लड़का और एक लड़की की कहानी सुनिए। 

प्रेम पाने का एक मात्र उपाय है कि प्रेम करो

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

इस कहानी को लिखने से पहले मैंने कम से कम हफ्ता भर इंतजार किया है। चाहता तो एक हफ्ता पहले ही पूरी कहानी आपको सुना सकता था। महीना भर पहले मैं अपनी उस परिचित के घर गया था, जिनकी बेटी की शादी कुछ ही दिन पहले हुई है। शादी खूब धूम-धाम से हुई थी, लेकिन शादी के बाद ससुराल में अनबन शुरू हो गयी। जरा-जरा सी बात पर झगड़े होने लगे। मेरे पास लड़की की माँ का फोन आया था कि सोनू की उसके ससुराल में नहीं बन रही। 

जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा अच्छा होगा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

सच में मेरा मन बदल गया आज पोस्ट लिखते-लिखते। मैंने सोचा था कि आज इंग्लैंड की सिमरन की कहानी आपको सुनाऊंगा। सुबह नींद खुलते ही मेरे मन में कहानी का ताना-बाना बुन जाता है। मैंने बहुत बार कोशिश की है कि कभी एक रात पहले ही लिख कर सो जाऊं, ताकि सुबह मुझे जल्दी न जगना पड़े, लेकिन मेरे चाहने से ऐसा नहीं होता। मेरी उंगलियाँ रुक जाती हैं, कहानी आगे बढ़ती ही नहीं। 

हर दिल जो प्यार करेगा, वो इश्क-क्लिक देखेगा

संदीप त्रिपाठी :

22 जुलाई को रिलीज होने जा रही फिल्म इश्क-क्लिक के निर्माता सतीश त्रिपाठी का कहना है कि जिस हृदय में प्रेम लेश मात्र भी होगा, उसे इश्क क्लिक जरूर अच्छी लगेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक मासूम मोहब्बत की कहानी है जहाँ कोई गलत नहीं है। इश्क-क्लिक के निर्माता अजय जायसवाल-सतीश त्रिपाठी की जोड़ी के सतीश त्रिपाठी आज देश मंथन के कार्यालय आये और इश्क-क्लिक के बाबत ढेरों बातें कीं।

माँ की गोद

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मुझे मरने से डर नहीं लगता। पर मर जाने में मुझे सबसे बुरी बात जो लगती है, वो ये है कि आप चाह कर भी दुबारा उस व्यक्ति से नहीं मिल सकते, जिससे मिलने की तमन्ना रह जाती है।

मन की कमजोरी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

हाथी वाली कहानी आप सबने बचपन में ही सुन ली होगी। 

मैं जानता हूँ कि पहली पंक्ति पढ़ कर एक क्षण में आपके जेहन में न जाने हाथियों की कितनी कहानियाँ कौंध पड़ी होंगी।

रावण तुम्हें मर ही जाना चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

ये कहानी है गीता की। ये कहानी है परी की। ये कहानी है हैवानियत की। ये कहानी है इंसानियत की। 

जब तपस्या (बेटा) शाप बन जाए

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

कल मैंने वादा किया था कि उस बच्चे की कहानी जरूर सुनाऊँगा, जिसकी कहानी मैंने चौथी कक्षा में पढ़ी थी। 

अलग लोगों की होती हैं कहानियाँ

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

“माँ, आज कौन सी कहानी सुनाओगी?”

मन की खुशी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

मुझे ठीक से याद है कि गुलबवा की कहानी किसने सुनायी थी। इस सच्ची कहानी सुनाते हुए उसने बताया था कि हर आदमी में दो आदमी रहते हैं। एक बाहर का आदमी और दूसरा भीतर का आदमी। भीतर का आदमी मन है, बाहर का आदमी तन है। 

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