Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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पार्क में बैठे ओशो – मानो अभी बोल उठेंगे

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

पुणे शहर से कई लोगों को रिश्ता जुड़ा है। कभी यह गाँधी और अंबेडकर का शहर था। तो पुणे आध्यात्मिक गुरु आचार्य रजनीश यानी ओशो की भी स्थली रही है। ओशो अमेरिका से वापस आने के बाद अपने आखिरी वक्त में यहीं पर रहे। पुणे ही क्यों भला। एक तो पुणे का मौसम है जो काफी लोगों को अपनी ओर खिंचता है।

इसलिए हुई ‘वायस आफ क्रिकेट’ हर्ष भोगले की बर्खास्तगी

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

किसी की निजी खुन्नस ने करोड़ों टीवी दर्शकों का दिल तोड़ा।

देश का सबसे सम्माननीय कमेंटेटर हर्ष भोगले जिसका अंग्रेजी और हिंदी पर समान अधिकार रहा है और जिसे 'वायस आफ इंडियन क्रिकेट' कहा जाता है, बीसीसीआई की तानाशाही का शिकार हो गया। आईआईएम हैदराबाद के इस गोल्ड मेडलिस्ट को अचानक ही देश में चल रही आईपीएल कमेंट्री टीम से बर्खास्त कर दिया गया। पौने दो माह तक चलने वाली इस क्रिकेट लीग में उनकी दिलकश आवाज से प्रशंसक महरूम रहेंगे।

सिर्फ बिरयानी और फिल्में

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

पाकिस्तान से खबरें आ रही हैं, जिनके मुताबिक पाकिस्तान सरकार का कहना है कि पठानकोट में आतंकीकांड भारत सरकार ने खुद ही कराया है। पाकिस्तानी बयान के कुछ अंश इस प्रकार हैं-

कांग्रेस की सांप्रदायिक और देशद्रोही राजनीति का रिजल्ट है एनआईटी की घटना

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

हैदराबाद विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला और उसके साथियों ने मुम्बई धमाकों के गुनहगार याकूब मेमन के समर्थन में कार्यक्रम किये, लेकिन कांग्रेस और कम्युनिस्टों ने पूरे मामले को जातीय रंग दे कर उन लोगों को हीरो बना दिया।

आज के तुलसी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

“राम जी अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र थे। बहुत बहादुर थे। सभी लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे।”

सूखा बड़ा कि आईपीएल?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:

अक्ल बड़ी कि भैंस? सूखा बड़ा कि आईपीएल? पहले सवाल पर तो देश में आम सहमति है। आज से नहीं, सदियों पहले से। दूसरा सवाल अभी कुछ दिन पहले ही उठा है। और देश इसका जवाब खोजने में जुटा है कि सूखा बड़ा है कि आईपीएल? लोगों को पीने के लिए, खाना बनाने के लिए, मवेशियों को खिलाने-पिलाने के लिए, नहाने-धोने के लिए, खेतों को सींचने के लिए, अस्पतालों में ऑपरेशन और प्रसव कराने के लिए और बिजलीघरों को चलाने के लिए पानी दिया जाना ज्यादा जरूरी है या आईपीएल के मैचों के लिए स्टेडियमों को तैयार करने के लिए पानी देना ज्यादा जरूरी है?

एक मराठी शादी में….बारी बरसी खटन गया सी…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

फरवरी 16 साल 2016 की सुबह हमारा पुणे जाना हुआ था शादी में शामिल होने के लिए। शादी किसकी। हमारी साली साहिबा की। वे रेडियोलॉजिस्ट हैं। पटना की हैं पर मुंबई में रहते हुए उन्होंने अपने लिए मराठी दूल्हा ढूँढा। तो शादी की सारी रश्में मराठी रीति रिवाज से होनी थी।

सेक्स हौव्वा क्यों है?

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :

आज के समाज में जब लड़कियाँ नौकरी कर रही हैं, बड़े शहरों में परिवार से दूर अकेले रह रही हैं, किराए पर मकान लेने की समस्या है, शादी देर से हो रही है आदि कई कारण है जिनके आलोक में लिव-इन एक जरूरत है। लिव इन वालों के यौन संबंध के मामले में भी मेरी राय वही है - जरूरत है।

मरने वाली लड़की ही क्यों?

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :

इसका जो कारण मुझे समझ में आता है वह यही है कि अपने यहाँ लड़कियों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की अवधारणा ही नहीं है। लड़कियाँ आम तौर पर पिता के करीब होती हैं और पिता से जिन विषयों पर बात होती है उसकी सीमा है। ऐसे में जब वे फँसती हैं तो उनकी परेशानी शेयर करने वाला कोई नहीं होता। खासतौर से जब मामला ब्वायफ्रेंड का हो।

जीवन का मंदिर

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

दुनिया भर के धर्म प्रचारकों, अपने दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब देने के लिए व्याकुल वीर पुरुषों, अपने-अपने मजहब के लिए दूसरों के सिर कलम कर देने का दम दिखाने वालों, चंद रुपयों के लिए किसी के दिल पर नश्तर चला देने वाले महान मनुष्यों, आओ, मेरे साथ तुम जिन्दगी के उस सत्य को देखो, जिसे देख कर हजारों साल पहले सिद्धार्थ नामक एक राजकुमार सबकुछ छोड़ कर संन्यासी बन गया था।