देश मंथन डेस्क
दुस्साहसी माँ-बाप ही बेटियों को जेएनयू भेजेंगे!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
अगले सत्र से जेएनयू में प्रवेश लेने वाली लड़कियों की संख्या में खासी गिरावट आ सकती है। पिछले एक महीने में ऐसे कई अभिभावकों से बातचीत हुई, जो अपनी बेटियों को उच्च-शिक्षा के लिए किसी अच्छी यूनिवर्सिटी में भेजना चाहते हैं, लेकिन जेएनयू का नाम आते ही वे काँपने लगते हैं।
एक भारतीय की पाती

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
आज सभी से राजनीति से ऊपर उठ एक बात कहना चाहता हूँ कि आप लोगों की लाचारी देख मुझे ऐसा लग रहा है कि आप लोगों की हालत उन भारतीय सिपाहियों जैसी हो गयी है जो मुगलों और अंग्रेजों की सेनाओं में शामिल हो जाते थे और न चाहते हुए भी अपने सिद्धांतों से समझोता कर अपने ही लोगों के खिलाफ खड़े हो जाते थे और जबरन ज्यादती करते थे।
तीस्ता के साथ गंगटोक का सफर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तीस्ता नदी सी तू चंचला... येशुदास के आवाज में ये गीत बचपन से सुन रहा हूँ। सिलिगुड़ी से गंगटोक के रास्ते में सड़क के साथ-साथ लंबे समय तक तीस्ता नदी साथ-साथ चलती है। उछलती-कूदती बलखाती किसी अल्हड़ किशोरी की तरह। चंचल-चपल तीस्ता।
शक्ति को सृजन में लगाएँ मोदी

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : :
हाथ में आए ऐतिहासिक अवसर का करें राष्ट्रोत्थान के लिए इस्तेमाल
पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक जीवन में जैसी कड़वाहटें, चीख-चिल्लाहटें, शोर-शराबा और आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह बना रहे हैं, उससे हम देश की ऊर्जा को नष्ट होता हुआ ही देख रहे हैं। भाषा की अभद्रता ने जिस तरह मुख्य धारा की राजनीति में अपनी जगह बनायी है, वह चौंकाने वाली है। सवाल यह उठता है कि नरेंद्र मोदी के सत्तासीन होने से दुखीजन अगर आर्तनाद और विलाप कर रहे हैं तो उनकी रूदाली टीम में मोदी समर्थक और भाजपा के संगठन क्यों शामिल हो रहे हैं?
मानो तो गंगा माँ हूँ….

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गंगा अवतरण की कथा रामायण में मिलती है। अयोध्या के सूर्यवंशी राजा सगर अश्वमेध यज्ञ करने की ठानी। उनके अश्वमेध यज्ञ से डरकर इंद्र ने राक्षस रूप धारण कर यज्ञ के अश्व को चुरा लिया और पाताल लोक में ले जा कर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया।
महिलाओं को गिफ्ट में प्यार चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सिनेमा और हकीकत में कोई अंतर नहीं होता है।
याद कीजिए फिल्म सत्ते पे सत्ता का वो सीन जब अमिताभ बच्चन को हेमा मालिनी से प्यार हो जाता है, और वो उनसे पहली बार जब मिलने जाते हैं, तो अपने साथ बतौर गिफ्ट एक तरबूज लेकर जाते हैं। अमिताभ की इसी अदा पर वो मर मिटी थीं और उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन से शादी कर ली थी।
माँ हर मुसीबत से बचाती है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पिछले कई दिनों से मुझे खाँसी थी। दिन भर तो ठीक रहता, पर रात में खाँसी आती तो नींद खुल जाती।
गंगा सागर में राजा भगीरथ के हंस

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दूर तक फैली जलराशि के बीच पानी को काट रास्ता बनाती तेजी से आगे बढ़ती फेरी। फेरी के चारों तरफ मंडराते असंख्य हंसों का झुरमुट। हमारे साथ सफर कर रहे जहाज के यात्री ने बताया कि ये राजा भगीरथ के हंस हैं। कौन राजा भगीरथ, अरे वही जो गंगा को धरती पर लेकर आये थे। गंगा सागर के लिए मूरी गंगा नदी में रोज चलने वाली फेरी के चारों तरफ श्वेत धवल हंस मंडराते हैं। आने जाने वाले श्रद्धालु उन्हें आटे की गोलिया खिलाते हैं। वे गोलियों को लपक लेते हैं। इस तरह पता ही नहीं चलता है कब आठ किलोमीटर का नदी का चौड़ा सफर खत्म हो गया।
अपने कर्म सुधार लें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी दीदी की सास ने दीदी को बहुत तकलीफ दी थी। इतनी कि दीदी बिलख उठती थी। दीदी जब भी अपनी बात किसी को बताने की कोशिश करती, तो कोई यकीन नहीं कर पाता कि सचमुच उसके साथ ऐसा हुआ होगा। हम जब भी दीदी के घर जाते, उसकी सास हमें बहुत विनम्र और समझदार नजर आती।
गंगा सागर बार बार

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सारे तीरथ बार बार गंगा सागर एक बार। बुजुर्गों से ये कहावत बचपन से सुनते आए हैं। आखिर क्या है इस कहावत का राज। एक बुजुर्ग ने ही बताया कि कभी गंगासागर की यात्रा इतनी मुश्किल हुआ करती थी लोग यहाँ अंतकाल में ही जाने की सोचते थे। अगर नहीं लौटे रास्ते में ही ऊपर वाले का बुलावा आ जाए तो भी कोई बात नहीं। पर अब हालात बदल चुके हैं। रास्ता सुगम है और गंगा सागर की यात्रा बार-बार और सालों भर की जा सकती है।



अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : :




