Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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झूमते बाजरे के साथ चलता सफर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

श्रीमहाबीर जी से करौली जाना चाहता हूँ। छोटे से बस स्टैंड पर बसें कम आती हैं। लोग बताते हैं कि आप जीप से खेड़ा तक चले जाओ वहाँ से बसें मिल जाएँगी। खेड़ी की जीप में बैठता हूँ। रेलवे स्टेशन श्री महाबीर जी के पास जाकर जीप थोड़ी देर के लिए रूक जाती है। मैं सुबह के नाश्ते में कचौड़ियाँ खाता हूँ। जीप खेड़ा गाँव में पहुँचा देती है। पर वहाँ पता चलता है चौक से गली होकर मुख्य सड़क पर जाइए वहाँ से साधन मिल सकेगा। पैदल चलकर हिंडौन करौली हाईवे पर पहुँचता हूँ। एक जीप वाले मिलते हैं वे करौली ले जाने को तैयार हैं। जीप में बैठ जाता हूँ। सड़क के दोनों तरफ खेतों में बाजरे की फसल झूम रही है। 

कौशल

प्रेमचंद :

पंडित बालकराम शास्त्री की धर्मपत्नी माया को बहुत दिनों से एक हार की लालसा थी और वह सैकड़ों ही बार पंडितजी से उसके लिए आग्रह कर चुकी थी; किंतु पंडितजी हीला-हवाला करते रहते थे। यह तो साफ-साफ न कहते थे कि मेरे पास रुपये नहीं हैं- इससे उनके पराक्रम में बट्टा लगता था- तर्कनाओं की शरण लिया करते थे।

बंदर बना राजा

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

यह कहानी मुझे किसी ने सुनाई थी। इस कहानी को सुन कर मैं बहुत देर तक अकेले में हँसता रहा। नहीं, मैं हँस नहीं रहा था, दरअसल मैं रो रहा था। 

नैराश्य लीला

प्रेमचंद :

पंडित हृदयनाथ अयोध्याय के एक सम्मानित पुरुष थे। धनवान् तो नहीं लेकिन खाने-पीने से खुश थे। कई मकान थे, उन्हीं के किराये पर गुजर होता था। इधर किराये बढ़ गये थे, उन्होंने अपनी सवारी भी रख ली थी। बहुत विचारशील आदमी थे, अच्छी शिक्षा पायी थी। संसार का काफी तजुरबा था, पर क्रियात्मक शक्ति से वंचित थे, सबकुछ न जानते थे। समाज उनकी आँखों में एक भयंकर भूत था जिससे सदैव डरते रहना चाहिए। उसे जरा भी रुष्ट किया तो फिर जान की खैर नहीं। उनकी स्त्री जागेश्वरी उनका प्रतिबिम्ब थी, पति के विचार उसके विचार और पति की इच्छा उसकी इच्छा थी, दोनों प्राणियों में कभी मतभेद न होता था।

तुमको न भूल पाएँगे

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

देश के खेल पदाधिकारियों के प्रति सामान्य में लोगों की धारणा मुँह बिचकाने वाली ही ज्यादा होती है। खेलों का इन महानुभावों ने बेड़ा गर्क जो किया हुआ है। परंतु कुछ ऐसे अपवाद भी इसी देश में हैं, जिनको खिलाड़ी और खेल प्रेमियों से समान आदर और प्यार मिला है।

अति सुंदर नक्काशियों वाला महल – सिटी पैलेस करौली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

करौली बस स्टैंड की तरफ से पैदल चलते हुए बाजार की ओर बढ़ रहा हूँ। थोड़ी देर में एक गेट आता है। इसका नाम है हिंडौन गेट। गेट के आसपास घना बाजार है। आसपास में पतंगों की दुकानें लगी हैं। पर पुराना गेट अभी भी अच्छी हालत में है। किसी समय में करौली शहर में ऐसे छह दरवाजे थे। इसके अलावा दुश्मन का मुकाबला करने के लिए 11 परकोटे भी थे। करौली शहर पंचना नदी के तट पर बसा है। नदी पर बने डैम से शहर को पानी मिलता है। नदी पर बना बाँध मिट्टी का है।

प्यार से बढ़ कर संसार में कोई संपति नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

कभी-कभी मैं स्कूल से घर आता और खाना नहीं खाता था। माँ मुझसे कहती रहती कि हाथ धोकर खाना खाने बैठ जाओ बेटा, पर मैं माँ की बात अनसुनी कर देता। माँ आती, मुझे दुलार करती और कहती कि मेरे राजा बेटा को क्या हो गया है, क्यों चुप है। माँ और पुचकारती। फिर मैं खुश होकर खाना खाने बैठ जाता, माँ मुझे तोता-मैना कह कर खिलाने बैठ जाती।

निर्वासन

प्रेमचंद :

परशुराम- वहीं-वहीं, दालान में ठहरो!

सकारात्मक सोच से उम्मीदों को बल दें

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

कंगना रनावत मेरी दोस्त हैं। पिछले दिनों जब वो मुझसे मिली थीं, तब उन्होंने कहा था कि आप मेरी आने वाली फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ देखिएगा। आप फिल्म देख कर रो पड़ेंगे। मैं जानता हूँ कि कंगना बहुत शानदार एक्ट्रेस हैं और उन्होंने अपनी ऐक्टिंग के संदर्भ में मुझसे ऐसा कहा था। 

करौली का अदभुत मदन मोहन मन्दिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

कान्हा जी यानी मदन मोहन जी का मन्दिर करौली किले में मुख्य शहर में स्थित है। इस मन्दिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह ने करवाया था। इस मन्दिर में भगवान कृष्ण और देवी राधा की प्रतिमाएँ हैं। करौली के निवासियों में मदन मोहन के प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है। श्रीकृष्ण  भगवान के अनेक नामों में से एक प्रिय नाम मदन मोहन भी है।