देश मंथन डेस्क
नेऊर

प्रेमचंद :
आकाश में चांदी के पहाड़ भाग रहे थे, टकरा रहे थे गले मिल रहें थे, जैसे सूर्य मेघ संग्राम छिड़ा हुआ हो। कभी छाया हो जाती थी कभी तेज धूप चमक उठती थी। बरसात के दिन थे। उमस हो रही थी । हवा बदं हो गयी थी।
अहंकार मिटाता है

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कल मेरे दफ्तर में अनिल कपूर और जॉन अब्राहम आये थे। दोनों अलग-अलग गाड़ियों में थे। जॉन गाड़ी से पहले उतर गए, अनिल किसी से फोन पर बात कर रहे थे। मैं जॉन को लेकर गेस्ट रूम में चला गया और वहाँ उन्हें बिठा दिया। मैं उनसे चाय-कॉफी पूछ ही रहा था कि अपनी बात खत्म कर अनिल कपूर भी कमरे में चले आये।
बेटे नहीं होने से वंश खत्म नहीं होता

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कभी-कभी हम किसी के मुँह से ऐसा कुछ सुन लेते हैं कि मन खिल उठता है।
बिहार चुनावः अग्निपरीक्षा किसकी?

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
बिहार का चुनाव वैसे तो एक प्रदेश का चुनाव है, किन्तु इसके परिणाम पूरे देश को प्रभावित करेंगे और विपक्षी एकता के महाप्रयोग को स्थापित या विस्थापित भी कर देगें। बिहार चुनाव की तिथियाँ आने के पहले ही जैसे हालात बिहार में बने हैं, उससे वह चर्चा के केंद्र में आ चुका है। प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी वहाँ तीन रैलियाँ कर चुके हैं।
पाकिस्तान इंदिराजी से किस कदर खौफजदा था?

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
दो राय नहीं कि मैं कांग्रेस विरोध की संतान हूँ पर यह भी सच है कि महाराजा रणजीत सिंह के बाद देश को अंतरराष्ट्रीय विजय (पूर्वी पाकिस्तान का नाम नक्शे से मिटा कर बांग्लादेश का जन्म हुआ 1971) दिलाने वाली वीरांगना श्रीमती इंदिरा गाँधी का निजी तौर पर प्रशंसक भी हूँ, खास तौर पाकिस्तान के मोर्चे पर उनकी तैयारी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम होगी।
आम आदमी की पहली उड़ान

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आसमान में उड़ना भला किसे अच्छा नहीं लगता। हर कोई सोचता है कि काश उसके पास भी पंछियों की तरह परवाज होते और उड़ पाता। पर देश की आबादी के 2% लोग भी जीवन में उड़ पाते हैं। शायद नहीं। आप उड़कर दिल्ली से हैदराबाद दो घंटे में पहुँच सकते हैं पर ट्रेन से 20 घंटे में। पर उड़ना हमेशा महँगा सौदा रहा है। पर हम उस आदमी को कैसे भूल सकते हैं जिसने मध्य वर्ग के लोगों को उड़ने का सपना दिखाया।
समंदर की सैर

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
बहुत से लोग कभी बड़े नहीं होते। मैं भी उनमें से एक हूँ।
बहन की पाती भाइयों के नाम : अगले साल जरूर आना

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
हम चार भाइयों के परिवार में कुल छह बेटे और छह बेटियों में सबसे छोटी है श्वेता। बीस बरस की श्वेता राखी के दिन उदास थी। अकेले कमरें में आँसुओं के बीच उसने अपना दर्द कविता में उड़ेल दिया। छह मे तीन भाई विदेश में तो बचे तीन दूसरे शहरों में। चिकन पाक्स हो जाने से बंगलोर में निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग कर रही श्वेता हास्टल से बाहर नहीं निकली। डर था कि घर जाने से माँ इन्दिरा, भाभी रिंकू, भतीजी मिहिका और भतीजा प्रांशु भी कहीं चेचक की चपेट में न आ जाएँ।
प्यार का बँटवारा

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
दो दिन पहले मेरे पास एक मिस्त्री का फोन आया था। मैं उसे जानता था। तीन-चार साल पहले उसने मेरे घर में रंगाई-पुताई का काम किया था और तभी अपना नंबर मुझे दे गया था। मिस्त्री को पता था कि मैं पत्रकार हूँ। एक बार वो काम करके चला गया तो फिर मेरा उससे कोई संपर्क नहीं रहा।
नीतीश कुमार का अहंकार और स्वाभिमान

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
बिहार चुनाव के मद्देनजर, भारतीय जनता पार्टी को बहुत तकलीफ है कि नीतीश कुमार अहंकारी हैं। और नीतीश कुमार न जाने क्यों सफाई देते घूम रहे हैं कि वह अहंकारी नहीं, स्वाभिमानी हैं। इतने समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बाद अगर यह बताना पड़े कि मैं यह हूँ, वह हूँ या वह नहीं हूँ तो क्या सार्वजनिक जीवन जीया।



प्रेमचंद :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन: 




