इसलिए हुई ‘वायस आफ क्रिकेट’ हर्ष भोगले की बर्खास्तगी

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
किसी की निजी खुन्नस ने करोड़ों टीवी दर्शकों का दिल तोड़ा।
देश का सबसे सम्माननीय कमेंटेटर हर्ष भोगले जिसका अंग्रेजी और हिंदी पर समान अधिकार रहा है और जिसे 'वायस आफ इंडियन क्रिकेट' कहा जाता है, बीसीसीआई की तानाशाही का शिकार हो गया। आईआईएम हैदराबाद के इस गोल्ड मेडलिस्ट को अचानक ही देश में चल रही आईपीएल कमेंट्री टीम से बर्खास्त कर दिया गया। पौने दो माह तक चलने वाली इस क्रिकेट लीग में उनकी दिलकश आवाज से प्रशंसक महरूम रहेंगे।
सेक्स हौव्वा क्यों है?

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
आज के समाज में जब लड़कियाँ नौकरी कर रही हैं, बड़े शहरों में परिवार से दूर अकेले रह रही हैं, किराए पर मकान लेने की समस्या है, शादी देर से हो रही है आदि कई कारण है जिनके आलोक में लिव-इन एक जरूरत है। लिव इन वालों के यौन संबंध के मामले में भी मेरी राय वही है - जरूरत है।
मरने वाली लड़की ही क्यों?

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
इसका जो कारण मुझे समझ में आता है वह यही है कि अपने यहाँ लड़कियों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की अवधारणा ही नहीं है। लड़कियाँ आम तौर पर पिता के करीब होती हैं और पिता से जिन विषयों पर बात होती है उसकी सीमा है। ऐसे में जब वे फँसती हैं तो उनकी परेशानी शेयर करने वाला कोई नहीं होता। खासतौर से जब मामला ब्वायफ्रेंड का हो।
सट्टेबाजों की बहार, चढ़ा आईपीएल का बुखार

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
टी-20 विश्वकप की गहमागहमी अभी बनी हुई ही थी कि आ गया सट्टेबाजों का सालाना त्यौहार यानी दुनिया के सबसे बड़े खेल ब्रांडों में एक आईपीएल -9 जो नौ अप्रैल से प्रारंभ होने जा रहा है और जिसमें सट्टेबाजी-फिक्सिंग के आरोपों के चलते निलंबित चेन्नई सुपर किंग और राजस्थान रायल्स के स्थान पर धोनी की अगुवाई में राइजिंग पुणे और सुरेश रैना के नेतृत्व वाली गुजरात लायंस राजकोट को बतौर नयी फ्रेंचाइजी लीग में शामिल किया गया है।
प्रत्यूशा की मौत के बहाने

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
मैंने किसानों की आत्महत्या पर नहीं लिखा, डेल्टा मेघवाल की मौत पर भी नहीं लिखा लेकिन प्रत्यूशा बनर्जी की मौत पर लिख रहा हूँ। कारण इसी में है फिर भी ना समझ में आये तो उसपर फिर कभी बात कर लेंगे। फिलहाल प्रत्यूशा और उसके जैसी अभिनेत्रियों की मौत के कारणों को समझने की कोशिश करते हैं। जो छोटे शहरों से निकल कर बड़ा काम करती है। शोहरत और पैसा कमाती हैं, सब ठीक-ठाक चल रहा होता है और अचानक पता चलता है कि उसकी मौत हो गई (आत्महत्या कर ली, हत्या हो गई या शीना बोरा की तरह) या गायब हो गयी।
नो नेक्स्ट प्रत्यूषा

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
उफ्फ जैसे खिलता हुआ फूल खुद को ही तोड़ ले और अलग कर ले जिंदगी से।
शेन वार्न से बढ़ कर कोई कोच नहीं दूजा

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
विश्व क्रिकेट में ऐसी कई शख्सियत रही हैं कुशाग्र मस्तिष्क की जिनसे उनके देश अधिकतम लाभ उठाने में असफल रहे हैं। मैं अपने करियर के दौरान जिनको जानता हूँ उनमें कर्नाटक के हरफनमौला सुब्रह्मण्यम, हैदराबादी एम एल जयसिम्हा, अशोक मांकड़ 'काका' और रवि शास्त्री ऐसे क्रिकेटर रहे हैं, जिनमें वह सब कुछ था जो एक चतुर कप्तान के लिए अपरिहार्य माना जाता है। लेकिन वे बोर्ड के कृपा पात्र नहीं थे इसलिए शास्त्री को अपवाद मान लें जिन्हें कप्तान के चोटिल होने से एकाध टेस्ट व एक दिनी में यह सुयोग हाथ लगा अन्यथा तो इनमें से किसी को देश की बागडोर नहीं सौंपी गयी।
सुनिश्चित हो ओस न फले और न ही दिल तोड़े

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
क्रिकेट बोर्ड को अब खेल के साथ मजाक करने से बाज आ जाना चाहिए। अकूत संपदा की मालिक बीसीसीआई ने जिस बैट-बल्ले से यह मुकाम हासिल किया, उसे अब इस खेल को ही सर्वोच्च वरीयता देनी होगी।
मोहाली में ‘बल्लेबाजी देवता’ का ‘विराट’ करिश्मा

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
दो राय नहीं कि यह भारतीय गेंदबाजी थी कि जिसने पहले चार ओवरों में पिटने के बाद ऐसा जबरदस्त पलटवार किया कि कंगारू अंतिम 16 ओवरों में कुल जमा 107 रन ही जोड़ सके। टास हार कर पहले गेंदबाजी पर बाध्य भारतीयों के सम्मुख फिर भी ऐसे विकेट पर 161 का ऐसा लक्ष्य मिला था जो लगातार धीमी होती असमतल उछाल वाली पिच पर निस्संदेह चुनौतीपूर्ण स्कोर था और इसको पाने के लिए किसी एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज को डेथ ओवरों तक क्रीज में जमे रहना था।
करोड़ टके का सवाल : कंगारूओं से धोनी एंड कंपनी पार पा सकेगी?

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
बताने की जरूरत नहीं कि रविवार को मेजबान भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मोहाली में होने वाला ग्रुप बी का अंतिम लीग मैच, 'जो जीते सो मीर' यानी टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज से दो-दो हाथ करने के लिए टिकट पाने का होगा। एक कठोर सच यह भी है कि धोनी की सेना के लिए मुकाबला किसी तेजाबी परीक्षण से कम नहीं।
जेम्स हेडली चेज का ‘थ्रिलर’ भी पीछे छूटा, जबड़े से जीत छीन ली

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
अंतिम तीन गेंदों तक जीत रही टीम हार गयी...!!
वाकई यह जेम्स हेडली चेज के किसी भी थ्रिलर को मीलों पीछे छोड़ने वाला रोमांचक द्वंद्व था। एक टीम जो हारने के सारे जतन करती नजर आयी, जिसने प्रतिपक्षी टीम के रन बनाने वाले सभी बल्लेबाजों को जमने के पहले जीवनदान देने में कोताही नहीं की।
हम और हमारा राष्ट्रवाद

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
फकीरी यहाँ आदर पाती है और सत्ताएं लांछन पाती हैं।
देश में इन दिनों राष्ट्रवाद चर्चा और बहस के केंद्र में है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम भारतीय राष्ट्रवाद पर एक नई दृष्टि से सोचें और जानें कि आखिर भारतीय भावबोध का राष्ट्रवाद क्या है? ‘राष्ट्र’ सामान्य तौर पर सिर्फ भौगोलिक नहीं बल्कि ‘भूगोल-संस्कृति-लोग’ के तीन तत्वों से बनने वाली इकाई है। इन तीन तत्वों से बने राष्ट्र में आखिर सबसे महत्वपूर्ण तत्व कौन सा है? जाहिर तौर पर वह ‘लोग’ ही होगें। इसलिए लोगों की बेहतरी, भलाई, मानवता का स्पंदन ही किसी राष्ट्रवाद का सबसे प्रमुख तत्व होना चाहिए।



पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 





