अलविदा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मन था मुंबई ब्लास्ट पर लिखूँ। मन था कि याकूब को मिली फाँसी पर लिखूँ। कल देर रात दफ्तर में बैठा रहा, रात भर याकूब मेमन को बचाने की कोशिशों की खबरों का अपडेट करता रहा। सोचता रहा कि क्या लिखूँ।
कलाम साहब को ‘सशर्त श्रद्धाँजलियाँ’

सुशांत झा, पत्रकार :
मिथिला की एक लोककथा में एक ब्राह्मण का जिक्र आता है जो हर बात में मीन-मेख निकालता था। एक दिन पार्वती ने शिव से कहा कि हे महादेव मैं उस ब्राह्मण को भोजन पर निमंत्रित करना चाहती हूँ, वो मेरी पाक कला में कोई दोष नहीं ढ़ूँढ़ पायेगा।
चुप्पी

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
सर्दी के दिन थे। बुआ आँगन में चटाई बिछा कर अपने पोते को सरसों का तेल लगा रही थी। हम ढेर सारे बच्चे वहीं छुपन छुपाई खेल रहे थे।
पाँच साल झेलें

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
एक साधु बाबा थे। बहुत पहुँचे हुए थे। उनके कई भक्त थे।
तमाशों के बताशे खाइए!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
क्या तमाशा है? इधर तमाशा, उधर तमाशा, यह तमाशा, वह तमाशा! और पूरा देश व्यस्त है तमाशों के बताशों में! तेरा तमाशा सही या उसका तमाशा सही? तेरी गाली, उसकी गाली, तेरी ताली, उसकी ताली, तू गाल बजा, वह गाल बजाये, तेरी पोल, उसकी पोल, कुछ तू खोल, कुछ वह खोले! और देश बैठ कर बताशे तोले कि चीनी कहाँ कम है? कौन कम गलत है? है न अजब तमाशा!
मुफ्त कुछ नहीं मिलता

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरे एक परिचित की बिटिया की शादी थी।
मोदी जी, भाषण के आगे क्या है?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:
तो मोदी जी फिर तैयार हो रहे हैं। नहीं, नहीं, विदेश यात्रा के लिए नहीं! लाल किले से अपने दूसरे भाषण के लिए! क्या बोलना है, क्या कहना है? तैयारी हो रही है।
25 साल में तो पाँच बार चुनाव होंगे हुजूर

राजीव रंजन झा :
देश के प्रमुख सत्ताधारी दल का अध्यक्ष होने के नाते अमित शाह को यह भी भान होगा कि केवल अपने कार्यकर्ताओं से 25 साल माँग लेना काफी नहीं है। उन्हें ये 25 साल देश की जनता से भी माँगने होंगे और जनता ने उन्हें दिया भी तो एकमुश्त नहीं देगी, किस्तों में देगी।
नेताजी, मान लीजिए कि दाँव गलत पड़ गया

संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
कुछ मित्र कह रहे हैं कि मुलायम सिंह ने अमिताभ ठाकुर को फोन किया वह धमकाना नहीं है। कुछ का कहना है कि फोन में आवाज मुलायम सिंह की नहीं है। किसी का कहना है फोन टेप करके उसे सार्वजनिक करना गलत है और यह भी कि मुलायम सिंह सत्तारूढ़ दल के प्रमुख हैं – सरकार तो धमकाती ही रहती है। उस लिहाज से मुलायम सिंह ने जो कहा वह धमकी नहीं है। या उस पर इतना बवाल क्यों।
‘सुधर जाइये, इत्ता ही कह दिया मैंने’ : मुलायम

राजीव रंजन झा :
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश पुलिस के नागरिक सुरक्षा आईजी अमिताभ ठाकुर के बीच लगभग दो मिनट तक फोन पर बातचीत ने यह दिखा दिया है कि इस राज्य में जो कुछ चल रहा है, उसे सीधे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का खुला समर्थन प्राप्त है।
व्यापमं बाहर नहीं, अन्दर है!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
सब तरफ व्यापमं ही व्यापमं है! वह व्यापक है, यहाँ, वहाँ, जहाँ नजर डालो, वहाँ व्याप्त है! साहब, बीबी और सलाम, ले व्यापमं के नाम, दे व्यापमं के नाम! व्यापमं देश में भ्रष्टाचार का नया मुहावरा है, जिसमें कोई एक, दो, दस-बीस, सौ-पचास का भ्रष्टाचारी गिरोह नहीं, हजारों हजार भ्रष्टाचारी हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता

आनंद कुमार, डेटा एनालिस्ट :
भारतीय लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता एक लाइन में तय हो जाती है | संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में कुल दस शब्द भी नहीं हैं, लेकिन ये एक मौलिक अधिकार है। अगर कहीं ये सोच रहे हैं की मौलिक अधिकार है तो आप इसका हमेशा इस्तेमाल कर सकते हैं, तो आप गलत समझ रहे हैं।



संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
सुशांत झा, पत्रकार :
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय कुमार सिंह, संस्थापक, अनुवाद कम्युनिकेशन:
आनंद कुमार, डेटा एनालिस्ट :





