Saturday, February 14, 2026
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समाचार विचार

‪‎यादें‬

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

आदमी जिन्दगी का सफर तय करता है। मोटर-गाड़ियाँ सिर्फ सड़कों का सफर तय करती हैं। समय के साथ जिन्दगी के सफर में आदमी बहुत कुछ सीखता है और नया होता जाता है, जबकि सड़क के सफर में मोटर-कार घिसती हैं और पुरानी पड़ती जाती है। 

तोते वही बोलें, जो संघ बुलवाये!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:

लोकतन्त्र सुरक्षित है! आडवाणी जी की बातों में बिलकुल न आइए! उन्हें वहम है! इमर्जेन्सी जैसी चीज अब नहीं आ सकती! क्योंकि नरेन्द्र भाई ने देश को ट्वीट कर बताया है कि जीवन्त और उदार लोकतन्त्र को मजबूत बनाना कितना जरूरी है! इसीलिए 'उदार लोकतंत्र' में आडवाणी जैसों की कोई जगह नहीं, जिन्हें लगता हो कि लोकतन्त्र को कुचलने वाली ताकतें आज पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं!

मोदी मुहिम से पड़ोसियों के दिलों में उतरता भारत

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :    

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की सफल बंगलादेश यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेतृत्व आत्मविश्वास से भरा हो तो अपार सफलताएँ हासिल की जा सकती हैं। बंगलादेश से लेकर नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका तक अब नरेन्द्र मोदी की यशकथा कही और सुनी जा रही है।

चाय वाले का एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास

दीपक शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार :

मोदीजी का अडानी मुझे पसन्द नहीं है। मोदीजी की एक मंत्रानी भी मुझे पसन्द नहीं है। मोदीजी का सूटबूट भी मुझे पसन्द नहीं है। और ये नापसंदगी किसी वैचारिक धरातल पर नहीं मेरिट के तर्क पर आधारित है। लेकिन बावजूद इन सबके मोदी जी कि कुछ बातों का मैं समर्थन करता हूँ। उनके कुछ प्रयास सराहनीय हैं।

ध्रुवीकरण करने वाले नेताओं और एजेंट बुद्धिजीवियों से सावधान!

अभिरंजन कुमार :

मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि इस देश के आम, गरीब, अनपढ़, कम पढ़े-लिखे, ग्रामीण लोग धर्मनिरपेक्ष हैं, लेकिन प्रायः सभी राजनीतिक दल, नेता, बुद्धिजीवी, पढ़े-लिखे और शहरी लोग सांप्रदायिक हैं।

ललितगेट : कैसी लकीर खीचेंगे नमो?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:

सुना है लमो के बखेड़े से नमो बहुत परेशान हैं! सुनते हैं, अपने कुछ मंत्रियों से उन्होंने कहा कि लोग जो देखते हैं, उसी पर तो यकीन करते हैं! और यहाँ तो लोगों ने सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि लमो यानी ललित मोदी को सुना भी। यकीन न करते तो क्या करते? सच तो सामने है, बिना किसी खंडन-मंडन के! 

जिधर देखो, सब क्लीन ही क्लीन है!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार: 

न से नेता! जिसे कुछ नहीं होता! इसलिए राममूर्ति वर्मा को भी कुछ नहीं होगा! वह जानते हैं कि नेताओं का अकसर कुछ नहीं बिगड़ता। बाल भी बाँका नहीं होता!

चोर की दाढ़ी में तिनका

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार :

म्यांमार में की गई भारतीय सेना की कार्रवाई पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया देख कर कोई हैरानी नहीं हुई। उसका करुण क्रंदन और उसी रुआंसे स्वर में भारत को धमकी देने का अंदाज अपेक्षित था।

जागिए, मैगी ने झिंझोड़ कर जगाया है!

कमर वहीद नकवी , वरिष्ठ पत्रकार :

मैगी रे मैगी, तेरी गत ऐसी! क्या कहें? सौ साल से नेस्ले कम्पनी देश में कारोबार कर रही थी! दुनिया की जानी-मानी कम्पनी है।

इस गरमी पर एक छोटा-सा सवाल!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार:

लोग गरमी से मर रहे हैं। अब तक अठारह सौ से ज्यादा लोग मर चुके हैं। खबरें छप रही हैं। लोग मर रहे हैं। सरकारें मुआवजे बाँट रही हैं।

95 परसेंटवालों पे बंदिश

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :

कक्षा बारह के रिजल्ट जब आते हैं, तब गर्मी का मौसम होता है। विकट गर्मी और आग उन बच्चों के लिए हो जाती है, जिनके कक्षा बारह में 40 से 60% के बीच कहीं आये हैं।

खेती के जरिये ही साकार होगा अच्छे दिन का सपना

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार

26 मई 2016 नरेन्द्र मोदी सरकार और देश के 50 करोड़ माध्यम वर्ग के लिए खास होगा। मोदी के लिए इसलिए क्योंकि इसी दिन एक साल पहले वो सत्ता पर काबिज हुए थे और माध्यम वर्ग के लिए भी खास इसलिए कि उसने मोदी से अपने लिए अच्छे दिन लाने की उम्मीद से उन्हें सत्ता सौंपी थी।

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