Tag: विद्युत प्रकाश मौर्य
युद्ध में बहादुरी की दास्ताँ बयाँ करता एयरफोर्स म्यूजियम

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मेघालय की राजधानी शिलांग भ्रमण के दौरान वायु सेना म्युजियम देखना न भूलें। वास्तव में शिलांग में वायु सेना के ईस्टर्न कमांड (पूर्वी कमांड) का मुख्यालय है। पूरे देश में वायु सेना के पाँच कमांड हैं। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। इस कमांड का युद्ध और शांति दोनों की काल में बहुत बड़ा योगदान रहता है। युद्ध के समय आर्मी को हर तरीके से मदद करना तो शांति काल में फंसे हुए लोगों की मदद करने में वायु सेना की बड़ी भूमिका रहती है।
शिलांग की चोटी- यहाँ से शहर को देखो

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
लेटकोर पीक यानी शिलांग पीक। यहाँ से पूरे शिलांग शहर का नजारा देखना अदभुत अनुभव है। चोटी से जो विहंगम नजारा दिखायी देता है उसे आप कभी भूल नहीं सकते। वास्तव में ये शिलांग की सबसे ऊँची जगह है।
हरे-भरे पार्कों का शहर शिलांग

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वार्ड लेक पार्क, बोटानिकल गार्डन, लेडी, हैदरी पार्क, एलिफैंट फाल्स पार्क जैसे तमाम सुंदर पार्कों से सुसज्जित शिलांग शहर को पार्कों का शहर कहें तो गलत नहीं होगा। इन पार्कों में सुबह की हवा दिलोदिमाग को काफी सुकुन पहुँचाती है।
पलटन बाजार से पुलिस बाजार तक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गुवाहाटी से मेघालय की राजधानी शिलांग की दूरी सड़क मार्ग से तकरीबन 90 किलोमीटर है। नेशनल हाईवे नंबर 40 दोनों शहरों को जोड़ती है। यह सड़क अब हर मौसम के लिए मुफीद है। अगर आप बिना रूके चलें तो दो से ढाई घंटे में शिलांग पहुँच जाते हैं। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पलटन बाजार वाले बस स्टैंड के आसपास से शिलांग के लिए टैक्सी और सूमो आदि मिलती हैं। अगर आप छोटी टैक्सी शेयरिंग में करते हैं तो किराया 300 रुपये है और सूमो में किराया 170 रुपये प्रति व्यक्ति है।
न्यू जलपाईगुड़ी से गुवाहाटी – कंचनजंगा एक्सप्रेस से

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
न्यू जलपाईगुड़ी से गुवाहाटी के मार्ग में बंगाल का दुआर्स इलाका आता है। इस रास्ते में सुंदर चाय के बगान नजर आते हैं। फकीराग्राम से पहले श्रीरामपुर असम नामक स्टेशन पर ट्रेन असम में प्रवेश कर जाती है। ये असम का बोडोलैंड वाला इलाका है। इस बार मैं कंचनजंगा एक्सप्रेस में हूँ। कोलकाता से चलने वाली इस लंबी दूरी की ट्रेन में सिटिंग क्लास भी है। संयोग से मुझे सिटिंग क्लास में ही आरक्षण मिल पाया।
मेघालय यानी बादलों का घर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मेघालय यानी मेघों (बादलों) का घर। घर इसलिए की सबसे ज्यादा बारिश वाला इलाका चेरापूंजी मेघालय में ही आता है। 21 जनवरी 1972 को ये छोटा सा राज्य अस्तित्व में आया। साल 2011 की जनगणना में आबादी 30 लाख के करीब है। इसकी सीमाएँ असम और बांग्लादेश से लगती हैं।
वसंत पंचमी के दिन नहीं हुआ था बीएचयू का शिलान्यास

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सौ साल
हर साल वसंत पंचमी के दिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया जाता है पर वास्तव में देश के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय का नींव पत्थर जिस दिन रखा गया उस दिन वसंत पंचमी नहीं थी। बीएचयू का नींव पत्थर चार फरवरी 1916 को एक बड़े समारोह में रखा गया।
कब आएगा रेलवे मानचित्र पर गंगटोक…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गगंटोक से वापस लौट रहा हूँ। देवराली से ही टैक्सी बुक करता हूँ। यहाँ से वापसी का टैक्सी का फिक्स किराया है 200 रुपये। पर टैक्सी भरने पर ही चलती है। कोई टाइमटेबल नहीं है। टाइम टेबल से सिक्किम रोडवेज की बसें चलती हैं। मिनी बसों में किराया 160 रुपये है। बसें भी सुरक्षित और आरामदायक हैं। पर उनका चलने का समय निश्चित है।
सियाचिन-दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धस्थल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हिमालय के पूर्वी कारकोरम रेंज में स्थित सियाचिन दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धस्थलों में से एक है। सियाचिन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद ( ग्लेसियर) है। भारत पाकिस्तान के बीच सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन सियाचिन में तैनात फौजियों की जिंदगी काफी मुश्किल है।
हकीकत बना पटना दीघा रेल सह सड़क पुल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देश का सबसे लंबा सड़क सह रेल पुल (RAIL CUM ROAD BRIDGE) अब हकीकत बन चुका है। इसके साथ ही बिहार निवासियों के सपनों को पँख लग गये हैं। अब उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच करोड़ों लोगों का संपर्क सुलभ हो सकेगा।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





