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रेलवे की विरासत : मुजफ्फरपुर पहुँचा डेहरी-रोहतास का लोकोमोटिव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कभी डेहरी रोहतास लाइट रेलवे की मातृ कंपनी रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपनी सेवाएँ देने वाला लोकोमोटिव अब मुजफ्फरपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर शान से विराजमान है। ये लोकोमोटिव आते-जाते लोगों को स्टीम इंजन (भाप से चलने वाले) दौर की याद दिलाता है।
महाराष्ट्र का शहर जहाँ कोई मराठी नहीं बोलता

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महाराष्ट्र का एक ऐसा शहर जो मराठी नहीं बोलता। शहर के सारे साइन बोर्ड हिंदी में दिखायी देते हैं। यह 100% सच है। थोड़ा दिमाग दौड़ाइए। हम पहुँच गये हैं राइस सिटी के नाम से मशहूर गोंदिया में। गोंदिया विदर्भ क्षेत्र का जिला मुख्यालय है। एक बड़ा व्यापारिक शहर है। पर शहर की सीमा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के काफी करीब है। गोंदिया से मध्य प्रदेश की सीमा 22 किलोमीटर और छत्तीसगढ़ की सीमा 46 किलोमीटर है। दोनों राज्यों के लोग यहाँ बड़ी संख्या में व्यापार करने आते हैं।
आगरा का लालकिला – कभी था बादलगढ़

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दिल्ली का लालकिला तो देश भर में प्रसिद्ध है पर एक लाल किला आगरा में भी है। लाल किला क्यों.. क्योंकि यह लाल पत्थरों से बना है। अगर आकार की बात करें तो आगरा का लालकिला दिल्ली से भी विशाल है। यह 1983 से ही यूनेस्को की विश्वदाय स्मारकों की सूची में शामिल है। पर ताजमहल देखने आने वाले सैलानी कम ही आगरा के किले में पहुँचते हैं। इसे किला ए अकबरी के नाम से भी जानते हैं।
तेलंगाना के जंगलों से होकर दूरंतो से दिल्ली…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हैदराबाद से दिल्ली का सफर न जाने कितनी बार किया है। पर खास तौर पर हैदराबाद शहर से ट्रेन के बाहर निकलने के बाद महाराष्ट्र में प्रवेश करने तक के कुछ घंटे निहायत सुहाने लगते हैं। क्योंकि इस दौरान ट्रेन तेलंगाना राज्य के कई जिलों से होकर गुजरती है। आबादी कम नजर आती हैं। मस्ती में बातें करते जंगल ज्यादा नजर आते हैं।
यदाद्रि के बाला जी – श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद 2014 में तेलंगाना नया राज्य बना। पर देश का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध तिरूपति बाला जी का मंदिर अब आंध्र प्रदेश में रह गया। तब तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद से 62 किलोमीटर दूरी पर स्थित यदाद्रि के विष्णु मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने का संकल्प लिया है। मंदिर का नाम श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी वारी देवस्थानम है। मंदिर का पुराना नाम यादगिरी गट्टा था पर अब इसे छोटे नाम यदाद्रि के नाम से जाना जाता है। यहाँ विष्णु का मंदिर पहाड़ियों पर स्थित है। खास तौर पर रात में मंदिर क्षेत्र की खूबसूरती देखते ही बनती है।
बन-मस्का और ईरानी चाय का लुत्फ

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
अपने देश भारत के कुछ शहरों में आप ईरानी चाय का लुत्फ ले सकते है। खास तौर पर तेलंगाना के हैदराबाद, तमिलनाडु के मदुरै, चेन्नई, मामल्लापुरम और रामेश्वरम जैसे शहरों में आपको ईरानी चाय के स्टाल देखने को मिल जाते हैं।
हैदराबाद का बिरला मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हैदराबाद शहर के बीचों बीच स्थित है संगमरमर से बना विशाल वेंकटेश्वर मंदिर जिसे लोग बिरला मंदिर के नाम से भी जानते हैं। हैदराबाद के स्थानीय लोगों के बीच ये मंदिर आस्था का केंद्र है। देश भर में कई प्रमुख शहरों में बिरला परिवार द्वारा बनवाए गये मंदिर हैं जिन्हें लोग बिरला मंदिर के नाम से जानते हैं।
हैदराबाद का लकड़ी का पुल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
लकड़ी का पुल हैदराबाद। नाम सुन कर कुछ रोमांच होता है। पर यहाँ कहीं लकड़ी का पुल दिखायी नहीं देता। रहा जरूर होगा। तभी तो नाम है। अब इस नाम का एक लोकल रेलवे स्टेशन भी है। लकड़ी का पुल ( स्टेशन कोड -LKPL)। हैदराबाद से सिकंदराबाद रेल मार्ग पर 1.30 किलोमीटर की दूरी पर लकड़ी का पुल रेलवे स्टेशन आता है। तो इसके अंग्रेजी अनुवाद पर वुडब्रिज ग्रैंड नामक होटल भी है। पर जनाब लकड़ी का पुल हैदराबाद का दिल है। इसके आसपास हैदराबाद की प्रमुख बाजार है। हैदराबाद का मुख्य स्टेशन हैदराबाद जंक्शन यानी नामपल्ली भी इसके पास ही है।
द वुड्स आर लवली डार्क एंड डिप…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
वुड्स आर लवली डार्क एंड डीप..बट आई हैव प्रामिस टू कीप...आई हैव माइल्स टू गो बिफोर आई स्लीप...राबर्ट फ्रेस्ट की ये पंक्तिया याद आती हैं जब हम हैदराबाद से श्रीशैलम की ओर जाते समय घने जंगलों से होकर गुजरते हैं। घने जंगलों का ये इलाका नागार्जुन श्रीशैलम टाइगर रिजर्व का है। ये देश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है क्षेत्रफल के लिहाज है। इस अभ्यारण्य का विस्तार पाँच जिलों में है।
श्रीशैलम बांध – आंध्र और तेलंगाना को करता है आबाद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
श्रीशैलम के बाद हमारी वापसी हो रही थी। महादेव के दर्शन के बाद एक खास तरह का संतोष था मन में, कई साल पुरानी इच्छा पूरी जो हो गयी थी। जाते वक्त चालक महोदय ने का था कि वापसी में डैम दिखाउँगा। सो अपने वादे के मुताबिक। वह रुक गये। पातालगंगा के पास हमलोग श्रीशैलम बांध देखने के लिए रुके। यहाँ पर एक व्यू प्वांइट है जहाँ से आप जलाशय का नजारा कर सकते हैं। फोटो खिंचवा सकते हैं। सभी आने जाने वाली गाड़ियाँ यहाँ रुकती हैं। हालाँकि आप बिना अनुमति के जलाशय के पास तक नहीं जा सकते।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 





