हैदराबाद का लकड़ी का पुल

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विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 

लकड़ी का पुल हैदराबाद। नाम सुन कर कुछ रोमांच होता है। पर यहाँ कहीं लकड़ी का पुल दिखायी नहीं देता। रहा जरूर होगा। तभी तो नाम है। अब इस नाम का एक लोकल रेलवे स्टेशन भी है। लकड़ी का पुल ( स्टेशन कोड -LKPL)। हैदराबाद से सिकंदराबाद रेल मार्ग पर 1.30 किलोमीटर की दूरी पर लकड़ी का पुल रेलवे स्टेशन आता है। तो इसके अंग्रेजी अनुवाद पर वुडब्रिज ग्रैंड नामक होटल भी है। पर जनाब लकड़ी का पुल हैदराबाद का दिल है। इसके आसपास हैदराबाद की प्रमुख बाजार है। हैदराबाद का मुख्य स्टेशन हैदराबाद जंक्शन यानी नामपल्ली भी इसके पास ही है।

अब तेलंगाना राज्य का विधानसभा भवन भी लकड़ी के पुल के पास है। इस इलाके में कभी हैदराबाद का ब्रांड समझा जाने वाला कामत होटल भी है। किसी जमाने में लुधियाना रेलवे स्टेशन के पास भी एक लकड़ी का पुल हुआ करता था। वास्तव में यह रेलवे लाइन को पैदल पार करने के लिए फुट ओवर ब्रिज था जो लकड़ी का बना था। कुछ ऐसी ही कहानी हैदराबाद के लकड़ी के पुल के साथ भी हो सकती है। अब लकड़ी का पुल इलाके में कई प्रमुख होटल हैं। हैदराबाद जंक्शन और विधान सभा समेत तमाम सरकारी दफ्तरों से निकट होने के कारण लकड़ी का पुल बाहर से आने वालों के लिओ लोकप्रिय आवासीय स्थल है।

निजामी शान का नमूना है मोजम जाही मार्केट

मोजम जाही मार्केट हैदराबाद के नवाबों की याद दिलाता है। बाजार की इमारत को देखकर राजसी ठाठ का एहसास होता है। एबिड्स के पास स्थित मोजमजाही मार्केट हैदराबाद के अति प्राचीन बाजारों में से है। इस बाजार का निर्माण आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान के समय हुआ था। 1935 में बने इस बाजार की दुकानें पत्थरों की हैं। दूर से देखने में ये बाजार किसी महल सा ही लगता है। बाजार का नाम निजाम के दूसरे बेटे मोजम जाह के नाम पर पड़ा। जाम बाग फूल बाजार इस बाजार का हिस्सा है। 

वैसे मोजमजाही मार्केट मूल रूप से फलों का बाजार है। किसी समय में यहाँ बड़ा फलों का बाजार हुआ करता था। बाद में 1980 में फ्रूट मार्केट को कोतापेट में शिफ्ट कर दिया गया लेकिन अभी भी मोजमजाही मार्केट में फलों की दुकानें हैं। मार्केट के बीचों बीच एक टावर बना है, जिसमें घड़ियाँ लगी हैं। दूर से यह कुछ घंटाघर जैसा दिखायी देता है। नामपल्ली जाने वाली तमाम बसें मोजमजाही मार्केट से होकर गुजरती हैं। इसके पास ही हैदराबाद का मुख्य पोस्ट आफिस है जिसके बाहर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरु की कबूतर उड़ाती हुई प्रतिमा लगी है।   

पाँच रुपये में चावल-दाल

तमिलनाडु सरकार से प्रेरणा लेकर तेलंगाना सरकार ने गरीबों के लिए पाँच रुपये में चावल-सांभर का स्टाल आरंभ किया है। इस स्टाल पर कागज की प्लेट में महज पाँच रुपये में चावल सांभर और उसके साथ मिर्ची दी जाती है। पर खाना वितरण का समय तय है। दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच। ऐसे खाने का स्टाल मुझे हैदराबाद में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसपल काउंसिल के दफ्तर के पास चौराहे पर दिखायी देता है। तो इसी तरह का स्टाल सिकंदराबाद में भी देखने को मिलता है। 

(देश मंथन, 21 जनवरी 2016) 

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