Tuesday, March 24, 2026
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भाजपा के लिए कठिन परीक्षा हैं उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय  :

लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति का सिरमौर बनकर भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र की सत्ता पर तो काबिज हो गयी है पर अब इन दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी साख दाँव पर है।

बिहार भाग्य-विधाता?

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार

जनता परिवार का विलय का अधर में पड़ जाना और आरजेडी-जेडीयू के बीच गठबन्धन की संभावना का कमजोर होना, केवल लालू, नीतीश के लिए ही नहीं बल्कि बीजेपी के लिए और खासतौर पर बिहार की जनता के लिए भी एक बुरी खबर है।

हर ‘आम’ में है कुछ खास

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

आम फलों का राजा है। आम सिर्फ स्वाद में ही बेहतर नहीं है बल्कि यह अनेक गुणों का खजाना है।

चोरी का धन मोरी (नाली) में जाता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

सुबह से उठ कर फोन पर लगा था। इसी चक्कर में आज जो लिखने का मन था, वो लिख नहीं पाया और जो लिख रहा हूँ उसे लिखने का मन नहीं। पर मैं भी क्या करूँ, पहले ही बता चुका हूँ कि रोज-रोज फेसबुक पर लिखना सिर्फ मेरे मन पर नहीं निर्भर करता। ये कोई और है जो मुझसे लिखवाता है, मैं निमित मात्र बन कर टाइप करता चला जाता हूँ।

नहीं संभले तो मिट जायेंगे

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

शनिवार को भूकंप के झटके ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचायी। हजारों भवन ध्वस्त हो गये और 4,700 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इस भूकंप के झटके को पूरे उत्तर भारत में और सबसे ज्यादा बिहार में महसूस किया गया। बिहार में तीस से ज्यादा लोग मारे गये।

जनता परिवार : आर्थिक – पारिवारिक फोरम

सुशांत झा, पत्रकार : 

जनता परिवार के विलय में वहीं भावना छुपी है, जो आखिरी घड़ी में दिल्ली बीजेपी में किरण बेदी की ताजपोशी में छुपी थी।

बिहार बीजेपी वाया गिरिराज सिंह@ फेयर-इन-लवली

सुशांत झा, पत्रकार :

गिरिराज ने जो टीवी फुटेज खाया है उसमें उनकी पार्टी और उनका दोनों का हित सधता है। पहचान(!) का संकट बिहार में उन्हें पहले भी नहीं था, अब तो वो पहचान घनीभूत हो गयी है।

नकल की अकल वाया बिहार पॉलटिक्स

 

 

 

सुशांत झा, पत्रकार : 

सन् 1996 में पटना हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि अगर स्कूली परीक्षाओं में नकल की खबरें आयीं तो उस जिले का कलक्टर जिम्मेवार होगा! ऐसे में तमाम कलक्टरों ने अपनी गरदन बचाने के लिए भारी कड़ाई की थी और मुझे याद है कि उस जमाने में नकल वाले बच्चों को पुलिस अपराधी की तरह ले जाती थी और 2000 रुपये देकर ही जमानत मिल पाता थी।

बिहारी छात्र को हुआ इश्क दिल्ली की लड़की से

बानयान प्रोडक्शंस की निर्माणाधीन फिल्म की शूटिंग के दौरान हाल ही में अभिनेता संजय सिंह और अभिनेत्री अनु से देश मंथन की बातचीत हुई।

इस हार का मतलब क्या है?

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

चार राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा की वैसी दुर्गति तो नहीं हुई, जैसी उत्तराखंड में हुई थी याने कोई राज्य ऐसा नहीं है, जहाँ भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टी जीती न हो।

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