Monday, April 15, 2024
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सिद्धू तय करें कि किस तरफ हैं वे

[caption id="attachment_8929" align="alignnone" width=""]पाकिस्तानी जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिलते नवजोत सिंह सिद्धू[/caption]

संदीप त्रिपाठी 

कांग्रेस नेता, पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री, पूर्व क्रिकेटर, कॉमेडी शो के पूर्व जज नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण में जाना, वहाँ गुलाम कश्मीर के मुखिया के साथ बैठना और फिर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के गले लगना विवादों के घेरे में है। इस पूरे प्रकरण में में कई सवाल हैं।

चीन से दोस्ती नहीं, पर सहयोग संभव : जी. पार्थसारथी

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिनों की चीन यात्रा ने एक तरफ जहाँ कूटनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी तो दूसरी ओर विपक्ष ने इस यात्रा को लेकर सवाल उठाये कि इससे हासिल क्या हुआ है? इस यात्रा के मायने क्या हैं और उससे भारत-चीन संबंधों की गाड़ी किस दिशा में बढ़ी है, यह समझने के लिए देश मंथन की ओर से राजीव रंजन झा ने बातचीत की भारत के पूर्व राजदूत जी. पार्थसारथी से।  

वैचारिक आत्मदैन्य से बाहर आती भाजपा

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

उत्तर प्रदेश अरसे बाद एक ऐसे मुख्यमंत्री से रूबरू है, जिसे राजनीति के मैदान में बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।

भारतीय राजनीति का ‘मोदी समय’

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

चुनावों का संदेशः अपनी रणनीति पर विचार करे विपक्ष

सही मायनों में यह भारतीय राजनीति का ‘मोदी समय’ है। नरेंद्र मोदी हमारे समय की ऐसी परिघटना बन गए हैं, जिनसे निपटने के हथियार हाल-फिलहाल विपक्ष के पास नहीं हैं।

‘मदारी’

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

फिल्म ‘मदारी’ देख ली?

नहीं देखी तो कोई बात नहीं। पर मैंने देख ली। मैं अमूनन हर फिल्म देख लेता हूँ। अब आप इसे शौक कह लीजिए या मजबूरी। फिल्म कैसी है, इस पर मैं कतई टिप्पणी नहीं करूंगा और न ही मेरा काम है फिल्मों की समीक्षा लिखना। पर फिल्म में एक सीन की चर्चा मैं आज कर रहा हूँ, सिर्फ अपनी कल की पोस्ट को आगे बढ़ाने के लिए।

गौवंश की रक्षा की योजना बतायें मोदी

संदीप त्रिपाठी :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिनों पहले एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि 80% गौरक्षक फर्जी हैं। हो सकता है, उनकी बात सही हो। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह देखा गया कि तमाम ऐसे तत्वों, जिनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा या हिंदूवादी विचारधारा से कोई संबंध नहीं था, न ही वे कभी मोदी समर्थक रहे, ने छोटे-छोटे संगठन बना लिये जिनके नाम में हिंदू या गाय शब्द जोड़ लिये। इन संगठनों के नाम में हिंदू प्रतीकों की आड़ में ये तत्व अनाप-शनाप कार्य करने लगे, जिनकी हवा न मोदी को थी, न भाजपा को, न संघ को। लेकिन इन संगठनों के कार्यों से ये लोग बदनाम होते रहे। दिलचस्प यह कि ऐसे कई संगठनों के कर्ता-धर्ता ऐसे लोग पाये गये जो भाजपा विरोधी संगठनों के पदाधिकारी रहे।

क्या विजय रुपानी को मिलेगा जन्मदिन का तोहफा?

राणा यशवंत, प्रबंध संपादक, इंडिया न्यूज :

आनंदी बेन ने पद छोड़ने की इच्छा फेसबुक पर ज़ाहिर की, यह अपनी तरह की पहली घटना है। गुजरात में भाजपा कई सवालों में है और अगर अगले साल वह गुजरात हारती है तो प्रधानमंत्री मोदी के लिए उनके पाँच साल के कार्यकाल की (मैं अगले ढाई साल भी जोड़ ले रहा हूँ) यह सबसे बड़ी हार होगी। और, 2019 की मोदी की लड़ाई को बहुत कमजोर भी करेगी।

उत्तर प्रदेश में दाँव पर प्रशांत किशोर की साख

संदीप त्रिपाठी :

उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव किसके लिए वाटरलू साबित होगा?, यह सवाल बड़ा मौजू है। सामान्य तौर पर देखा जाये तो सबसे बड़ा दाँव मायावती की बहुजन समाज पार्टी और नरेंद्र मोदी-अमित शाह की भारतीय जनता पार्टी का है। समाजवादी पार्टी सरकार में होने के कारण बचाव की मुद्रा में है तो कांग्रेस अभी तक कहीं लड़ाई में नहीं आयी है। लेकिन इस विधानसभा में इन चारों दलों से बड़ा दाँव चुनाव रणनीतिकार और प्रबंधक के रूप में ख्यात प्रशांत किशोर का लगा है।

अफ्रीका जा कर चीन को घेरने की रणनीति

संदीप त्रिपाठी :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफ्रीकी महाद्वीप की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा के कई मायने होंगे, अलग-अलग विशेषज्ञ अलग-अलग पहलुओं पर बतायेंगे। लेकिन इस यात्रा के तीन मुख्य मंतव्य दिख रहें हैं। यह है भारत के आर्थिक लाभ, चीन के आर्थिक लाभों को सीमित करना और तीसरा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चीन और पाकिस्तान को कमजोर करना। मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और केन्या की मोदी की यात्रा से यही तस्वीर निकल कर सामने आती है।

बौद्धिक वर्ग से रिश्ते सुधारे मोदी सरकार

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :

अपने कार्यकाल के दो साल पूरे करने के बाद नरेंद्र मोदी आज भी देश के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक ब्रांड बने हुए हैं। उनसे नफरत करने वाली टोली को छोड़ दें तो देश के आम लोगों की उम्मीदें अभी टूटी नहीं हैं और वे आज भी मोदी को परिणाम देने वाला नायक मानते हैं।

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शमशेरा : हिंदू घृणा और वामपंथी एजेंडा से भरी फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया

शमशेरा हिंदू घृणा से सनी ऐसी फिल्म है, जिसका साहित्य में परीक्षण हुआ, जैसा कि फर्स्ट पोस्ट आदि पर आयी समीक्षाओं से पता चलता है, और फिर बाद में परदे पर उतारा गया। परंतु जैसे साहित्य में फर्जी विमर्श को रद्दी में फेंक कर जनता ने नरेंद्र कोहली को सिरमौर चुना था, वैसे ही अब उसने आरआरआर एवं कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों को चुन लिया है और शमशेरा को गड्ढे में फेंक दिया है!

नेशनल हेराल्ड मामले का फैसला आ सकता है लोकसभा चुनाव से पहले

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पाकिस्तान में बढ़ती शर्मनाक घटनाएँ, फिर भी पश्चिमी देशों का दुलारा पाकिस्तान

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