Thursday, February 5, 2026
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देश का ऊंघता नेतृत्व

अजय अनुराग :

विदेश से दो महीने की गुमनामी छुटियाँ (चिंतन अवकाश) बिताकर स्वदेश लौटे राहुल गांधी द्वारा कल संसद में दिया गया भाषण बेहद हैरान व परेशान करने वाला है।

रात तय करती है सुबह किसकी होगी

दीपक शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार : 

डूबती रात के अंधेरों में जब वासना से विरक्त होकर कोई अपने लक्ष्य से भिड़ता है तो जान लीजिए उसका मन किसी बड़ी दिशा की और बढ़ चुका है। 

आज सोनिया और राहुल ही आशा हैं

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक : 

कांग्रेस जैसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नेताओं में अब थोड़ा-बहुत साहस पैदा हो गया है। वे मुँह खोलने लगे हैं। अपने मालिकों के सामने ‘जी-हुजूर’ बोलने के अलावा वे कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं करते थे। पंजाब के कांग्रेसी नेता जगमीत सिंह बरार ने काफी प्राणलेवा बयान दे दिया है।

माँ-बेटा कांग्रेस पर कृपा करें

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

कांग्रेस ने इस चुनाव में जैसी मार खाई, क्या पहले कभी खाई? लेकिन कोई भी मुँह क्यों नहीं खोल रहा है? क्योंकि इस पार्टी के बड़े-बड़े नेपोलियन बोनापार्ट पिछले 40-45 साल में बौने हो गये हैं।

अब राहुल बचाओ!

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

कांग्रेस खुद को तो बचा न सकी। अब वह राहुल को बचाने में लगी हुई है। सोनिया गांधी के दरबारी सलाहकार, जिन्हें हम ‘बड़े नेता’ कहें तो उन्हें अच्छा लगता है, वे इकट्ठे होकर सोच रहे हैं कि अब क्या करें?

मुलायम की बिसात पर क्या राहुल क्या मोदी

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक :

नेताजी से ज्यादा यूपी की राजनीति कोई नहीं समझता। और सियासत की जो बिसात खुद को पूर्वांचल में खड़ा कर नेताजी ने बनायी है, उसे गुजरात से आये अमित शाह क्या समझे और पुराने खिलाड़ी राजनाथ क्या जाने।

प्रियंका के प्रति मेरी सहानुभूति

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

प्रियंका वाड्रा ने शिकायत की है कि उनके भाई और मां के चुनाव क्षेत्र में कई लोग ऐसी पुस्तिकाएँ बंटवा रहे हैं, जो घोर आपत्तिजनक हैं। ये पुस्तिकाएँ वे रात के अंधरे में लोगों के घरों में डलवा रहे हैं।

अमेठी का बदला बनारस में?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ संपादक (राजनीतिक), एनडीटीवी : 

इसे अघोषित समझौता कहें। या एक राजनीतिक परिपाटी। पर कुछ अपवादों को छोड़ ऐसा होता आया है। बड़े नेता चाहे देश भर में घूम-घूम कर एक-दूसरे पर तीखे और करारे हमले करें, मगर एक-दूसरे के चुनाव क्षेत्रों में प्रचार करने नहीं जाते।

तो अच्छे दिन ऐसे आयेंगे…

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक :

सोने का पिंजरा बनाने के विकास मॉडल को सलाम ..

एक ने देश को लूटा, दूसरा देश को लूटने नहीं देगा। एक ने विकास को जमीन पर पहुँचाया। दूसरा सिर्फ विकास की मार्केटिंग कर रहा है।

इति श्री रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) पुराण

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :

अमेरिका के अखबार वाल स्ट्रीट जनरल ने रॉबर्ट वाड्रा की जमीन की बात की है। भारतीय मीडिया रॉबर्ट वाड्रा की जमीन की बात करता रहता है। इतनी जमीन, उतनी कितनी जमीन, कांग्रेस में उनसे ज्यादा जमीन से जुड़ा नेता कौन है, बतायें?

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