Tag: Vidyut Prakash Maurya
गुरुद्वारा – किला आनंदगढ़ साहिब

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
आनंदपुर साहिब में रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने के बाद सबसे पहले किला आनंद गढ़ साहिब में पहुँचा जा सकता है। यह किला आनंदपुर साहिब शहर के बीच में स्थित है। दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने इलाके में पाँच किलों की स्थापना की थी, आनंद गढ़ साहिब उनमें से एक है। यह मुख्य गुरुद्वारा केशगढ़ साहिब से 800 मीटर की दूरी पर स्थित है। गुरु गोबिंद सिंह जी को 1689 से 1705 के बीच मुगलों और पहाड़ के राजाओं से कई युद्ध लड़ने पड़े थे।
तख्त श्री केशगढ़ साहिब – आनंदपुर साहिब

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सिखों के पाँच तख्त हैं देश में। इनमें आनंदपुर साहिब का खास महत्व है। पंजाब के रूपनगर जिले में स्थित आनंदपुर साहिब सिखों में अत्यंत पवित्र शहर माना जाता है। इस शहर की स्थापना 1665 में नौंवे गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने की थी। यह सिख धर्म में अत्यंत पवित्र शहर इसलिए है, क्योंकि यहीं पर खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। साल 1699 में बैशाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने की। इस दिन उन्होंने पाँच प्यारों को सबसे पहले अमृत छकवा कर सिख बनाया। आमतौर पर तलवार और केश तो सिख पहले से ही रखते थे। अब उनके लिए कड़ा, कंघा और कच्छा भी जरूरी कर दिया गया।
ट्रेड, टिंबर, ट्रूप मतलब पठानकोट

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
20 अक्तूबर 1993
शिविरों में अथवा ऐसे व्यस्त आयोजनों में अक्सर कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण तारीखें तो याद रहती हैं दिन (वार) भूल जाता हूँ। जैसे आज बुधवार है।
पंजाब के आनंदपुर साहिब की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सिख धर्म के पाँच पवित्र तख्त में से एक है श्री केशगढ़ साहिब यानी आनंदपुर साहिब। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से सुबह छह बजकर 10 मिनट पर नंगलडैम के लिए मेमू ट्रेन खुलती है। यह ट्रेन आनंदपुर साहिब या नैना देवी जाने के लिए आदर्श तरीका है। हालाँकि टिकट खिड़की से आधा किलोमीटर दूर 1ए प्लेटफार्म से ये ट्रेन हर रोज रवाना होती है।
मणिपुर में संतरे का कटोरा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हमारी टैक्सी मणिपुरी शाल के कस्बे तुपुल को पार करती हुई नोनी पहुँची। यहाँ भी चेकपोस्ट था। नोनी नुंगबा तहसील का एक छोटा सा गाँव है। जाँच औपचारिकताओं के बाद हम आगे बढ़े। 110 किलोमीटर की दूरी पर आया खोंगसांग नामक गाँव। यहाँ से एक रास्ता तामेंगलांग के लिए जा रहा था।
अभय मुद्रा में 80 फीट के गौतम बुद्ध

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
साल 2011 में सारनाथ में एक और आकर्षण जुड़ गया है, वह है विशाल बुद्ध प्रतिमा। वाराणसी के पास स्थित दर्शनीय स्थल सारनाथ में वैसे तो सैलानियों कई आकर्षण है। सारनाथ के इतिहास में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब जब आप सारनाथ जाएँगे तो वहाँ भगवान बुद्ध की चलायमान अभय मुद्रा में बनी देश की सबसे ऊँची लगभग 80 फीट प्रतिमा देखने को मिलेगी। हालाँकि सारनाथ में पहले से ही बुद्ध की प्रतिमा है लेकिन बुद्ध की चलायमान प्रतिमा अनूठी है।
सालों भर लुभाता है पश्चिमी घाट का सौंदर्य

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पश्चिमी घाट यानी दिलकश नजारे। यह कोई एक जगह नहीं। इसका विस्तार कई राज्यों में हैं। सौंदर्य ऐसा है चप्पे-चप्पे में कि इसे साल 2012 में में विश्व विरासत साइट का दर्जा मिला। इसके तहत कोई 1,600 किलोमीटर लंबी पर्वत श्रंखला आती है। माना जाता है कि ये पर्वत हिमालय से भी ज्यादा पुराने हैं। अपने पारिस्थित विभिन्नता के कारण इसे अलग पहचान मिली है। इसका विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे पांच राज्यों में है।
रेलवे की विरासत : मुजफ्फरपुर पहुँचा डेहरी-रोहतास का लोकोमोटिव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कभी डेहरी रोहतास लाइट रेलवे की मातृ कंपनी रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपनी सेवाएँ देने वाला लोकोमोटिव अब मुजफ्फरपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर शान से विराजमान है। ये लोकोमोटिव आते-जाते लोगों को स्टीम इंजन (भाप से चलने वाले) दौर की याद दिलाता है।
महाराष्ट्र का शहर जहाँ कोई मराठी नहीं बोलता

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महाराष्ट्र का एक ऐसा शहर जो मराठी नहीं बोलता। शहर के सारे साइन बोर्ड हिंदी में दिखायी देते हैं। यह 100% सच है। थोड़ा दिमाग दौड़ाइए। हम पहुँच गये हैं राइस सिटी के नाम से मशहूर गोंदिया में। गोंदिया विदर्भ क्षेत्र का जिला मुख्यालय है। एक बड़ा व्यापारिक शहर है। पर शहर की सीमा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के काफी करीब है। गोंदिया से मध्य प्रदेश की सीमा 22 किलोमीटर और छत्तीसगढ़ की सीमा 46 किलोमीटर है। दोनों राज्यों के लोग यहाँ बड़ी संख्या में व्यापार करने आते हैं।
आगरा का लालकिला – कभी था बादलगढ़

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दिल्ली का लालकिला तो देश भर में प्रसिद्ध है पर एक लाल किला आगरा में भी है। लाल किला क्यों.. क्योंकि यह लाल पत्थरों से बना है। अगर आकार की बात करें तो आगरा का लालकिला दिल्ली से भी विशाल है। यह 1983 से ही यूनेस्को की विश्वदाय स्मारकों की सूची में शामिल है। पर ताजमहल देखने आने वाले सैलानी कम ही आगरा के किले में पहुँचते हैं। इसे किला ए अकबरी के नाम से भी जानते हैं।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :





