देश मंथन डेस्क
डलहौजी से यादें जुड़ी हैं सरदार अजीत सिंह की

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
ये साल 1946 की बात है। देश आजादी के दहलीज पर खड़ा था। भारत की अंतरिम सरकार बन चुकी थी। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के महान सपूत सरदार अजीत सिंह को रिहा करवाया। सभी जानते हैं कि सरदार अजीत सिंह भगत सिंह के चाचा थे। वे पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन के प्रणेता थे।
रिश्तों को दस्तक दीजिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कोई 60 साल पुरानी बात है, एक लड़की की बहुत धूम-धाम से शादी हुई। शादी के बाद लड़की के पाँच बच्चे हुए। चार बेटियाँ, एक बेटा। पूरा परिवार खुश।
पहले बेटियों की शादी हुई, फिर बेटे की। कुछ दिनों बाद पति का निधन हो गया। बेटियाँ ससुराल में सेटल हो चुकी थीं, बेटा अमेरिका में सेटल हो गया था। रह गयी थी माँ।
जहाँ प्रेम, वही संसार

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
प्रेम में बहुत शक्ति है।
मेरी एक परिचित मुझसे जब भी मिलती हैं, वो ‘राधे-राधे’ कह कर बात की शुरुआत करती हैं।
आइए याद करें तिरंगे झंडे के डिजाइनर को – पिंगाली वेंकैया

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
क्या आपको पता है हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे झंडे को डिजाइन किसने किया था। वह थे बहुआयामी प्रतिभा वाले आंध्र के स्वतंत्रता सेनानी श्री पिंगाली वेंकैया। विजयवाड़ा के एमजी रोड यानी महात्मा गाँधी रोड पर स्थित है विक्टोरिया जुबली म्युजियम। एक छोटा सा संग्रहालय है जिसके साथ स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की कई स्मृतियाँ जुडी हैं। इस संग्रहालय का प्रबंधन आंध्र प्रदेश राज्य का पुरातत्व विभाग करता है।
हर साल सूखे की मार झेलता मराठवाड़ा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हर साल अप्रैल महीना शुरू होने के साथ ही महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र चर्चा में आ जाता है। चर्चा सूखे के कारण होती है। हमें सूखे की आहट अहमदनगर से मिलने लगती है। साल 2013 में जब शिरडी गया था तब वहाँ के स्थानीय लोग कह रहे थे पानी की भारी कमी है। इसलिए बाबा के दरबार में श्रद्धालु कम आ रहे हैं। साल 2015 का मार्च के महीने का आखिरी दिन हैं।
जीता वही सिकंदर, हार के बाद जीत

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मुझे नहीं पता कि ये मुहावरा किसने गढ़ा होगा कि जो जीता वही सिकंदर।
सोशल मीडिया के माध्यम से जनता देगी नया आयाम

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
तीस मई को बीत गया पत्रकारिता दिवस। सुबह अखबारों में देख रहा था वरिष्ठ पत्रकार भाई पुण्य प्रसून वाजपेयी का बीएचयू में सिद्धांत झाड़ने वाला व्याख्यान तो वाराणसी पत्रकार संघ और काशी विद्यापीठ में आयोजित संगोष्ठियों के समाचारों में एक समानता यह नजर आयी कि वक्ताओं नें लंबी चौड़ी बातें की और जताने की कोशिश की कि पत्रकारिता परवान चढ़ी है। परंतु किसी ने भी यह जमीनी सच कहने की हिम्मत नहीं की कि मुख्य धारा की पत्रकारिता राह से भटक चुकी है।
बौद्धिक वर्ग से रिश्ते सुधारे मोदी सरकार

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :
अपने कार्यकाल के दो साल पूरे करने के बाद नरेंद्र मोदी आज भी देश के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक ब्रांड बने हुए हैं। उनसे नफरत करने वाली टोली को छोड़ दें तो देश के आम लोगों की उम्मीदें अभी टूटी नहीं हैं और वे आज भी मोदी को परिणाम देने वाला नायक मानते हैं।
गाँधी हिल्स – बापू की याद में पहाड़ी पर स्मारक

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बापू की स्मृतियाँ जहाँ-जहाँ हम वहाँ-वहाँ। विजयवाड़ा के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है गाँधी हिल्स। ये पहाड़ी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 10 के सामने है। सड़क के बगल में प्रवेश द्वार है। यहाँ आपको 10 रुपये का टिकट लेकर प्रवेश करना पड़ता है। प्रवेश का समय शाम 4.30 बजे से रात्रि 8 बजे तक का है। शहर की एक पहाड़ी पर माँ कनक दुर्गा बसती हैं तो दूसरी पहाड़ी पर गाँधी जी। देश के आजाद होने के बाद बापू की याद में यह कोई पहला स्मारक है जो किसी पहाड़ी पर बना है।
हाँ, दिल्ली को एटम बम के धमाके से हिरोशिमा में बदलने की साजिश थी

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
परमाणु तकनीक की तस्करी और चोरी के बल पर पाकिस्तान के लिए एटम बम के, जिसे "इस्लामिक बम" भी करार दिया जाता है, निर्माता पाकिस्तानी वैज्ञानिक डाक्टर अब्दुल कादिर खाँ ने जो रहस्योदघाटन शनिवार को इस्लामाबाद में देश के परमाणु ताकत बनने के मौके पर आयोजित "यौम-ए-तकबीर" रैली में किया कि 1984 में हम कहूटा से दिल्ली को पाँच मिनट के भीतर टारगेट करने जा रहे थे पर ऐन समय में पाकिस्तान के सैन्य शासक तानाशाह जियाउल हक ने इजाजत नहीं दी, कहीं से गलत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उसी साल हम न्यूक्लीयर टेस्ट करना चाहते थे मगर जिया साहब ने यह कहते हुए रोक दिया कि टेस्ट करने से अमेरिका सहित सभी देश हमारी आर्थिक मदद रोक देंगे।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :
संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय :




