Saturday, March 28, 2026

देश मंथन डेस्क

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सियाचिन-दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धस्थल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

हिमालय के पूर्वी कारकोरम रेंज में स्थित सियाचिन दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धस्थलों में से एक है। सियाचिन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद ( ग्लेसियर) है। भारत पाकिस्तान के बीच सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन सियाचिन में तैनात फौजियों की जिंदगी काफी मुश्किल है।

ऐसे ही ‘टाइमपास’ होता रहे!

क़मर वहीद नक़वी, पत्रकार :

विजय माल्या कहाँ है? उनका ट्वीट कहता है कि वह जहाँ कहीं भी हैं, देश छोड़ कर भागे नहीं हैं। वह भगोड़े नहीं हैं, कानून का पालन करनेवाले सांसद हैं! और उनका एक और ट्वीट मीडिया के दिग्गजों के नाम हैं, जिसमें वह कहते हैं कि आप भूल न जायें कि मैंने आपके लिए कब, क्या-क्या किया, क्योंकि मेरे पास सबके दस्तावेजी सबूत हैं! माल्या जी मीडिया की पोल खोलें तो हो सकता है कि बड़ी चटपटी स्टोरी बने, लेकिन असली कहानी तो 'टाइमपास' की है, जो बरसों से चल रही है, चलती ही जा रही है। 

रावण तुम्हें मर ही जाना चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

ये कहानी है गीता की। ये कहानी है परी की। ये कहानी है हैवानियत की। ये कहानी है इंसानियत की। 

हकीकत बना पटना दीघा रेल सह सड़क पुल

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

देश का सबसे लंबा सड़क सह रेल पुल (RAIL CUM ROAD BRIDGE) अब हकीकत बन चुका है। इसके साथ ही बिहार निवासियों के सपनों को पँख लग गये हैं। अब उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच करोड़ों लोगों का संपर्क सुलभ हो सकेगा।

शवयात्रा में क्रिकेट

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार  :

मैं ऊपर वाले प्रार्थना करता हूँ, कि जीते जी वह चाहे जैसा सलूक करे मेरे साथ। पर मेरी मौत उस दिन ना शेड्यूल करे, जिस दिन भारत और पाकिस्तान का वन डे क्रिकेट मैच हो। 

जय भारत। जय पाकिस्तान। जय बांग्लादेश।

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

जब आप "भारत की बर्बादी के नारे" लगाएँ और "पाकिस्तान जिन्दाबाद" बोलें, तब यह देशद्रोह है, लेकिन अगर आप "भारत जिन्दाबाद" और "पाकिस्तान जिन्दाबाद" दोनों साथ-साथ बोलें और दोनों देशों की तरक्की की कामना करें, तो यह इस उप-महाद्वीप में शांति और सौहार्द्र की हमारी आकांक्षा है।

रिश्तों को जीने वाले आँखों से जीते हैं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मेरे एक फेसबुक परिजन ने मुझसे शिकायत की कि संजय सिन्हा आप बहुत झूठ बोलते हैं।

रिश्तों की विरासत

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

अब आप सोच रहे होंगे कि संजय सिन्हा के मन में सुबह-सुबह लड्डू क्यों फूट रहे हैं। तो मैं आज आपको ज्यादा नहीं उलझाऊँगा। 

गाल की महबूब ट्रेन-पदातिक एक्सप्रेस

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

पदातिक एक्सप्रेस - सियालदह सेन्यू जलपाईगुड़ी के बीच चलने वाली दार्जिलिंग मेल के बाद एक और ट्रेन। मैं सुबह-सुबह अपने साथी अनवारुल हक के साथ मालदा टाउन स्टेशन पर 12377- पदातिक एक्सप्रेस का इंतजार करता हूँ। पर इंतजार कहाँ। ट्रेन का सुबह 5.40 पहुँचने और 5.45 छूटने का समय है। लेकिन ट्रेन तो आधा घंटे पहले आकर प्लेटफार्म पर लग चुकी है। बीच के एसी कोच के सामने भारी सुरक्षा है।

आजादी माने खुन्नस?

अजय अनुराग:

राष्ट्रद्रोह और राष्ट्रभक्ति के बाद अब सबसे जटिल व उलझा हुआ शब्द है- 'आजादी'। आज देश में आजादी की चर्चा ऐसे की जा रही है मानों हम किसी गुलाम देश में हों। लेकिन नहीं, आजादी माँगने वालों का कहना है कि आजादी देश से नहीं, देश में चाहिए।