देश मंथन डेस्क
चेन्नई में लें उत्तर भारतीय स्वाद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
जिस तरह से दक्षिण भारतीय व्यंजन उत्तर भारत के राज्यों में रेस्टोरेंट की शोभा बढ़ाते हैं ठीक उसी तरह उत्तर भारत के व्यंजन भी दक्षिण भारतीय थाली की शोभा बढ़ाने लगे हैं। दक्षिण के शहर चेन्नई में अब कई जगह आपको उत्तर भारतीय खानपान के स्टाल और रेस्टोरेंट दिखायी दे सकते हैं।
लव और लगाव

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी एक परिचित ने मुझसे अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने मुझे बताया कि पिछले दिनों वो किसी के संपर्क में आईं और वो उन्हें अच्छा लगने लगा। यहाँ तक तो सब ठीक था। पर वो उन्हें इतना अच्छा लगने लगा कि वो उससे प्यार कर बैठीं।
सोनिया जी, यह न 1975 है, न 1986, इसलिए कोर्ट का सम्मान करें

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
सोनिया गाँधी सही कह रही हैं कि वह इंदिरा गाँधी की बहू हैं। वह इंदिरा गाँधी की बहू हैं, इसीलिए कोर्ट का भी आदर नहीं कर रही हैं। इंदिरा गाँधी ने भी 1975 में अपने निर्वाचन को अवैध करार देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को नहीं माना था और देश में इमरजेंसी लगा दी थी। उस वक्त उन्होंने विपक्ष के साथ जो किया था, राजनीतिक दुर्भावना और दुश्मनी उसे कहते हैं, न कि भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट समन कर दे तो उसे कहते हैं।
दुखों से मुक्ति मन के कोने में मिलेगी

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरे एक मित्र कल विदेश यात्रा पर निकल रहे हैं। कल उन्होंने फोन कर मुझे बताया कि वो कुछ दिनों के लिए बाहर घूम-फिर कर मन बहला आएँगे।
सरकार की (दोगली) आत्मा

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
नितीश कुमार का चुनावी वादा था - बिहार में शराब बंद की जायेगी।
मुरुगन इडली शॉप – तमिल स्वाद का आनंद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
चेन्नई के बेसेंट नगर में टहलते हुए मुरुगन इडली शॉप का बोर्ड नजर आता है। वास्तव में यह शोप नहीं बल्कि भरापूरा रेस्टोरेंट है। यहाँ सिर्फ इडली ही नहीं बल्कि डोसा, साउथ इंडियन मिल के अलावा मिठाइयाँ और पेय पदार्थ सब कुछ मिलते हैं।
नल्लामल्ला पर्वत पर विराजते हैं मल्लिकार्जुन स्वामी

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
देवों के देव महादेव। उनके मंदिर बने हैं देश के हर हिस्से में। अगर 12 ज्योतिर्लिंगों की बात करें तो इनमें से दक्षिण भारत में हैं। पहला रामेश्वरम और दूसरा श्रीशैलम में। शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में दूसरे स्थान पर आते हैं श्रीशैलम के मल्लिकार्जन स्वामी। इसे दक्षिण में दिव्य क्षेत्रम माना जाता है। यहाँ पहुँच कर अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
धर्म-निरपेक्ष कि पंथ-निरपेक्ष?

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :
पिछले हफ्ते बड़ी बहस हुई। सेकुलर मायने क्या? धर्म-निरपेक्ष या पंथ-निरपेक्ष? धर्म क्या है? पंथ क्या है? अँगरेजी में जो 'रिलीजन' है, वह हिन्दी में क्या है—धर्म कि पंथ? हिन्दू धर्म है या हिन्दू पंथ? इस्लाम धर्म है या इस्लाम पंथ? ईसाई धर्म है या ईसाई पंथ? बहस नयी नहीं है। गाहे-बगाहे इस कोने से, उस कोने से उठती रही है। लेकिन वह कभी कोनों से आगे बढ़ नहीं पायी!
1903 में आरंभ हुआ था बराक घाटी रेलमार्ग

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
ब्रिटिश काल में साल 1882 से 1887 के बीच असम के बराक घाटी में लमडिंग बदरपुर के बीच रेल नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनी। हालाँकि तब स्थानीय डिमासा जनजाति के लोग गोरों का अपने क्षेत्र में प्रवेश करने का काफी विरोध कर रहे थे। वे अपनी जीवन शैली में किसी बाहरी तकनीक का प्रवेश नहीं होने देना चाहते थे। पर इस विरोध की परवाह न करते हुए 25 अक्तूबर 1887 को गवर्नर जनरल ने इस क्षेत्र में रेल लाइन बिछाने की अनुमति प्रदान की। तब ब्रिटिश सरकार असम के पहाड़ी क्षेत्रों को चटगांव ( अब बांग्लादेश में) बंदरगाह को रेलवे से जोड़ना चाहती थी, जिससे एक विकल्प दिया जा सके और कोलकता बंदरगाह पर दबाव कम हो सके। साथ ही सरकार को लगता था ये रेल लाइन चाय बगानों से चाय की सप्लाई और कोयला ढुलाई के लिए मुफीद साबित होगी।
रेत पर दुख और पत्थर पर खुशियाँ उकेरें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
जा पाता हूँ। पर कई जगह जाना ही पड़ता है।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
अभिरंजन कुमार, पत्रकार :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार : 




