Thursday, February 19, 2026
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कश्मीर पर प्रचारक का हठ या नेहरू से आगे मोदी की नीति?

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक :

वक्त बदल चुका है। वाजपेयी के दौर में 22 जनवरी 2004 को दिल्ली के नॉर्थब्लाक तक हुर्रियत नेता पहुँचे थे और डिप्टी पीएम लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की थी। मनमोहन सिंह के दौर में हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान जाने का वीजा दिया गया और अमन सेतु से उरी के रास्ते मुजफ्फराबाद के लिए अलगाववादी निकल पड़े थे।

नियंत्रण रेखा पर छह दिन : आँखों-देखी

विवेक कुमार भट्ट, चैनल प्रमुख, संदेश :

नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर 40 आतंकवादी जम्मू कश्मीर में घुसे... पिछले कुछ दिनों मे 50 बार गोलीबारी हुई है, 20 जवान घायल हुए हैं और 4 जवानों ने जान गँवायी है।

बिहारी नेताओं का वाग्विनोद

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक : 

भारत की राजनीति में नेता लोग एक दूसरे पर इतने तीखे और भद्दे प्रहार करते हैं कि टीवी देखने वालों और अखबार पढ़ने वाले करोड़ों लोगों का मजा किरकिरा हो जाता है।

अभी जिंदा हैं बदलाव की संभावनाएँ!

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री द्वारा लोक लुभावन घोषणाएँ की जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इसी तरह की उम्मीद देश को थी। दरअसल प्रभु वर्ग जरुरी फैसले कम लोकप्रिय फैसले ज्यादा लेता है।

बिहार और भ्रष्टाचार की ट्रिकल डाउन थ्योरी

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का सार्वजनिक रूप से ये खुलासा कि जब वो मंत्री थे उन्हें बिजली बिल कम करवाने के लिए पाँच हजार रुपये की रिश्वत देनी पड़ी और उनकी यह स्वीकारोक्ति कि नीतीश कुमार के राज में विकास से ज्यादा रफ्तार से भ्रष्टाचार बढ़ा है, कई बड़े सवाल व्यवस्था को लेकर खड़ा करता है।

मोदी की भावना को समझें

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह-कारगिल में जो कुछ कहा, उसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने भारत-पाक मैत्री के विरुद्ध शंखनाद कर दिया है। यह हो सकता है कि उनके बयान पर पाकिस्तान की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया हो।

मोहन भागवत की चेतावनी

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक श्री मोहन भागवत ने कल भुवनेश्वर में जो कहा, वह सच तो है ही लेकिन वह एक चेतावनी भी है। इसका बड़ा महत्व है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पीछे असली ताकत संघ के स्वयंसेवकों की ही है।

रेखा और सचिन के बहाने

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

सिने तारिका रेखा और क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर का क्या दोष है? उन पर हमारे नेता लोग फिजूल ही बरस रहे हैं। उन्हें वे धमका रहे हैं कि आप लोग राज्य सभा के सदस्य हैं, लेकिन उसके सत्रों में आपकी न्यूनतम उपस्थिति भी नहीं होती।

संसद को क्यों चाहिए स्टार सांसद?

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

मनोनीत सांसदों क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और अभिनेत्री रेखा की गैरहाजिरी का मुद्दा शुक्रवार को राज्य सभा में गूंजा। सांसदों ने उनके लगातार अनुपस्थित रहने पर सवाल उठाया और उनकी राज्य सभा की सदस्यता रद्द करने की माँग की।

ये कैसी बर्खास्तगी?

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

मिजोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल को बुधवार को बर्खास्त कर दिए जाने को लेकर एकबार फिर से राज्यपालों को जबरिया हटाये जाने का मामला गरमा गया है। राज्यपाल को हटाये जाने का बहाना सरकार चाहे जो भी बनाये गुजरात के राज्यपाल के रूप में कमला बेनीवाल और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़वाहट भरे रिश्ते किसी से छुपे नहीं थे।

संसदीय कुंभकर्ण की करवट

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

कांग्रेस को क्या हो गया है? वह एक स्वस्थ विपक्ष की भूमिका क्यों नहीं निभाना चाहती है? संसद का यह पूरा सत्र ही उसने लगभग बर्बाद कर दिया। उसने ऐसे-ऐसे विधेयकों का विरोध किया, जो उसने स्वयं सत्ता में रहते हुए पेश किए थे।

प्रतीकात्मक कदम कब बनेगें हकीकत

श्रीकांत प्रत्यूष, संपादक, प्रत्यूष नवबिहार :

उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू हवाई अड्डे पर सामान्य यात्री की तरह कतार में खड़े होकर सुरक्षा-जाँच की प्रक्रिया से गुजरते हैं। आम यात्रियों की तरह बस में बैठ कर विमान तक जाते हैं। अशोक गजपति राजू राजघराने से आते हैं और देश के उड्डयन मंत्री भी हैं।

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