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तिरुवनमलै के शिव – अरुणाचलेश्वर महादेव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तमिलनाडु के जिले तिरुवनमलै में शिव का अनूठा मंदिर है। अनामलाई पर्वत की चोटी की तराई में इस मंदिर को अनामलार या अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर कहा जाता है। शिव के इस मंदिर में हर माह की पूर्णिमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। खासतौर कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है। श्रद्धालु यहाँ अनामलाई पर्वत की 14 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करके शिव से कल्याण की मन्नत माँगते हैं। माना जाता है कि शिव का विश्व में सबसे बड़ा मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण थेवरम और थिरुवासगम ने करवाया था।
महाबलीपुरम – यहाँ पत्थर बोलते हैं…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महाबलीपुरम शहर में आप जहाँ भी घूमें हर गली और नुक्कड़ पर मूर्तियों की दुकानें नजर आती है। नन्ही मूर्तियों से लेकर विशालकाय मूर्तियों तक। ये मूर्तियाँ यहीं के मूर्तिकार बनाते हैं। कई दुकानों पर तो मूर्तिकार आपको काम करते हुए दिखायी दे जाते हैं। अहले सुबह सूरज उगने के साथ काम शुरू होता है, देर रात तक छेनी हथौड़ी पर काम चलता रहता है।
महाबलीपुरम का लाइट हाउस

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बस स्टैंड से पंच रथ के रास्ते में महाबलीपुरम का लाइट हाउस भी पड़ता है। आप इस पर चढ़ायी भी कर सकते हैं। इस 42 मीटर ऊंचे लाइट हाउस के लिए प्रवेश टिकट है। लाइट हाउस समुद्र में चलने वाले नाव और जहाज को रास्ता दिखाने के मकसद से बनाया जाता है। साल 2011 में इस सैलानियों के लिए खोला गया।
इतना बड़ा माखन कान्हा ने खाया

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
मैया मोरी मैंने ही माखन खायो। बार-बार यशोदा के पूछने पर आखिर कान्हा को मानना ही पड़ा था कि माखन उन्होंने ही खाया। लेकिन आखिर कान्हा का माखन कितना बड़ा था। इसका जवाब मिलता है महाबलीपुरम में आकर। महाबलीपुरम के बस स्टैंड के पीछे की तरफ पहाड़ियों पर एक गोल सा पत्थर दिखायी देता है।
देश के सात अजूबों में एक समुद्र तटीय मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
समुद्र तटीय मंदिर तमिलनाडु के महाबलीपुरम का सबसे खास आकर्षण है। इसे देश के सात अजूबों में गिना जाता है। साथ ही यूनेस्को द्वारा विश्वदाय स्मारकों की सूची में भी 1984 से ही शामिल है। समुद्र तटीय मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यह आठवीं शताब्दी में निर्मित है और वास्तुकला की दृष्टि से भी अद्भुत है। वास्तव में ये स्थान पल्लव नरेशों की शिल्प साधना का अमर स्मारक है। यहाँ समुद्र तट पर द्रविड़ वास्तुकला के आधार पर तीन मंदिर बनाये गये हैं। केंद्र में भगवान विष्णु का मंदिर है, जबकि उसके दोनों ओर शिव मंदिर हैं।
मनमोहक महाबलीपुरम की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
दिन भर गोल्डेन बीच पर मस्ती करके हम थक चुके थे। बाहर निकल कर क्लाक रूम से अपना सामान रीलिज कराया और बस स्टाप पर आकर बैठ गये। ईस्ट कोस्ट रोड पर गोल्डेन बीच के प्रवेश द्वार के पास ही बस स्टैंड है। हमारे साथ कुछ विदेशी सैलानी भी महाबलीपुरम के लिए बस का इंतजार कर रहे थे।
यहाँ शिव और पार्वती करते हैं नृत्य – कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कांचीपुरम भ्रमण में हमारा आखिरी पड़ाव था कैलाशनाथ मंदिर। हमारे ऑटो वाले भाई ने कह दिया था कि यहाँ के बाद आपको बस स्टैंड छोड़ दूँगा। फिर मेरी सेवा समाप्त। सो हम कैलाश नाथ मंदिर को अच्छी तरह निहार लेना चाहते थे।
अति सुंदर नेत्रों वाली माँ – कांचीपुरम का कामाक्षी मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तमिलनाडु के मदुरै मे मीनाक्षी मंदिर है तो कांचीपुरम में कामाक्षी मंदिर। देवी कामाक्षी का मंदिर कांचीपुरम शहर के बीचों बीच स्थित है। हालाँकि ये मंदिर कांचीपुरम के बाकी मंदिरों की तरह विशाल परिसर वाला नहीं है। पर यह श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहाँ सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। डेढ़ एकड़ में फैला ये मंदिर देवी शक्ति के तीन सबसे पवित्र स्थानों में एक है। मदुरै और वाराणसी अन्य दो पवित्र स्थल हैं।
वामन मंदिर कांचीपुरम- विष्णु की अदभुत प्रतिमा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कांचीपुरम शहर के बिल्कुल मध्य में कामाक्षी देवी मंदिर के पास ही वामन मंदिर स्थित है। वैसे तो इस मंदिर का परिसर बहुत बड़ा नहीं पर यह कांचीपुरम के अनूठे मंदिरों में से एक है। यहाँ भगवान विष्णु की अदभुत प्रतिमा देखने को मिलती है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर जिस असुर महाबली को हराया था, उसी की याद में उनका नाम वामन पड़ा था।
गोल्डेन बीच पर मस्ती भरी दुपहरिया

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
इस बार के चेन्नई प्रवास में हमने अपना एक दिन गोल्डेन बीच के नाम कर रखा था। ट्रेन से कांचीपुरम जाते समय मोबाइल से ही टिकट न्यूडाटकाम से गोल्डेन बीच की तीन टिकटें गोल्डेन क्राउन श्रेणी की बुक कर डाली। 17 अक्तूबर की दोपहर हम गोल्डेन बीच के प्रवेश द्वार पर थे। ईटिकट का स्क्रीन शाट दिखाकर पीआरओ काउंटर से अपना टिकट प्राप्त किया।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : 





