जैसलमेर में तनोट देवी का चमत्कारी मंदिर

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विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

देश के कुछ चमत्कारी मंदिरों में शामिल है तनोट भवानी का मंदिर। यह मंदिर राजस्थान में जैसलमेर शहर से 130 किलोमीटर दूर पाकिस्तान की सीमा पर है। तनोट भवानी मंदिर को पाकिस्तान हिंगलाज भवानी का रूप माना जाता है।

यह सीमा सुरक्षा बल की आराध्य देवी हैं। तनोट माँ को तन्नोट माँ के नाम से भी जानते हैं। हिंगलाज भवानी का ही एक रूप मानी जाने वाली तनोत माता राजस्थान और आसपास के भक्तो में अगाध श्रद्धा है। हिंगलाज माता का मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है। वहाँ जाना मुश्किल है, पर तनोट तक पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं है। 

बड़ी संख्या में यहाँ आने वाले श्रद्धालु मन्नत भी माँगते हैं। मन्नत माँगने वाले श्रद्धालु रुमाल में रुपये बाँध कर यहाँ रख जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर वापस आ कर रुमाल खोल कर रुपये दानपात्र में चढ़ा जाते हैं।

तनोट माता के मंदिर का निर्माण छह शताब्दी में हुआ था। भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने विक्रम संवत 828 में तनोट का मंदिर बनवा कर मूर्ति को स्थापित की थी। इसके बाद भाटी तथा जैसलमेर के पड़ोसी इलाकों के लोग भी तनोट माता की पूजा करते आ रहे है। कहा जाता है देश आजाद होने से पूर्व सिंध और अफगानिस्तान जाने वाले व्यापारियों के ऊंटों का कारवाँ यहीं से गुजरता था। तनोट राय मंदिर में हर साल दो बार नवरात्र के दौरान मेला लगता है। हर सुबह शाम मंदिर में विधि पूर्वक आरती होती है।

जब 1965 में चमत्कार हुआ

भारत पाकिस्तान के बीच 1965 कि लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से करीब 3000 बम गिराए गये पर इन बमों से इस मंदिर पर खरोच तक नहीं आई। यहाँ तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं। अब सीमा सुरक्षा बल की ओर से इन बमों को सहेज कर रखा गया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु उन्हें देख सकते हैं। तभी से सीमा सुरक्षा बल के जवान काफी श्रद्धा भाव रखते है और तनोट माता को युद्ध की देवी भी कहा जाता है। मंदिर का पूरा प्रबंधन सीमा सुरक्षा बल की यहां मौजूद बटालियन करती है। तनोट में भारत पाकिस्तान युद्ध की याद में एक विजय स्तंभ का भी निर्माण कराया गया है।

श्रद्धालुओं के रहने का इंतजाम 

आस्था स्थल तनोट राय माता मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और भोजन की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। राजस्थान के देवस्थान विभाग की ओर से करीब 1.03 करोड़ की लागत से विश्राम गृह बनवाया गया है। विश्राम गृह का संचालन मंदिर की सेवा और पूजन व्यवस्था करने वाली बीएसएफ की बटालियन न लाभ न हानि के आधार पर करती है।

परिचय पत्र जरूरी 

चूंकि यह इलाका सामरिक दृष्टि से संवेदनशील सीमा क्षेत्र में है इसलिए विश्राम गृह में श्रद्धालुओं को पूरी जाँच और परिचय पत्र होने पर ही रात्रि को ठहरने की अनुमति दी जाती है। तीन बीघा जमीन पर बने विश्राम गृह में 60.94 लाख की लागत से कुल 7 कक्ष बनाये गये हैं। टॉयलेट ब्लॉक में 3 टॉयलेट और 2 बाथरूम के अलावा 42.23 लाख से भोजन शाला में एक हॉल, किचन व स्टोर रूम बनाया गया है। तनोट माता मंदिर की व्यवस्था एक पंजीकृत ट्रस्ट देखता  है।

कैसे पहुँचे 

राजस्थान के जैसलमेर शहर से तनोट जाने  के लिए आप टैक्सी बुक कर सकते हैं। आधे दिन का समय रखने पर जैसलमेर से तनोट जाकर लौट सकते हैं। राजस्थान रोडवेज की बस रोज शाम को 4 बजे तनोट के लिए जाती है। इसमें जाने वाले श्रद्धालु वहीं रुक जाते हैं। बस अगले दिन सुबह जैसलमेर वापस लौटती है।

(देश मंथन, 15 फरवरी 2017)

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