माँ

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संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :  आज मेरी कहानी सुनने से पहले आप अपनी आँखें पोंछ लीजिए। मन को मजबूत कर लीजिए। और इसी वक्त जा कर अपनी माँ के गले से लग जाइए। संभव हो तो उनकी गोद में एक बार बैठ भी जाइए। अगर आप ऐसा कर पाएंगे, तो यकीन कीजिए आप संसार की […]

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

आज मेरी कहानी सुनने से पहले आप अपनी आँखें पोंछ लीजिए। मन को मजबूत कर लीजिए। और इसी वक्त जा कर अपनी माँ के गले से लग जाइए। संभव हो तो उनकी गोद में एक बार बैठ भी जाइए। अगर आप ऐसा कर पाएंगे, तो यकीन कीजिए आप संसार की सारी मुसीबतों से, हर तरह के भय से इसी पल मुक्त हो जाएंगे। मेरी माँ तो मेरे साथ बहुत दिनों तक नहीं रह पाई क्योंकि भगवान जी को जल्दी थी उसे अपने पास बुलाने की। 

आप ऐसा बिल्कुल मत सोचिएगा कि आदमी जो चीज खो देता है, उसे अधिक याद करता है। हकीकत यही है कि इस संसार में माँ की गोद से बढ़ कर कोई दूसरी जगह नहीं होती। मेरी माँ नहीं है, लेकिन बहुत से लोगों की माँएं हैं। और जिनकी भी माँएं हैं, उनसे मैं प्रार्थना करता हूँ कि आज संजय सिन्हा की कहानी सुनने के बाद वो अपनी माँ के पास जाएं, उनके पाँव छू लें। उनकी गोद में बैठ जाएं। 

अब आप सोच रहे होंगे कि कहीं आज मदर्स डे जैसा कोई त्योहार तो नही, जो सुबह-सुबह संजय सिन्हा माँ का गुणगान करने बैठ गए। 

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। पर इतना सत्य है कि जैसे मजनूं लैला को हर पल याद करता था, जैसे प्रह्ललाद ईश्वर को हमेशा याद करता था, जैसे आदमी हर क्षण सांस लेता है, वैसे ही मैं हमेशा माँ को याद करता हूँ। मेरे लिए उससे बड़ा भाग्यशाली इस संसार में नहीं जिसे माँ की गोद नसीब होती है। 

न्यूटन एक बगीचे में सेब के गिरने से जितना हैरान हुआ था, उससे अधिक हैरान मैं कई बार माँ की गोद में बैठ कर हुआ हूँ। ये मेरा दुर्भाग्य रहा कि माँ की गोद मुझे ग्यारह साल से अधिक मयस्सर नहीं हुई, पर मैं आज भी उस गोद की खुशबू को रोम-रोम से बयां कर सकता हूँ। 

एक शाम चंदन के साथ क्रिकेट खेल कर जब मैं घ लौट रहा था, तो अंधेरा हो गया था। चंदन ने मुझे बताया कि उस पेड़ की ओर मत देखना। वहाँ भूत रहता है और बच्चों को पकड़ लेता है। मैं डर गया था। भागा-भागा घर आया और माँ की गोद में दुबक गया। 

माँ ने पूछा कि क्या हुआ? माँ के पेट में सिर घुसेड़ कर मैंने कहा, “माँ, उधर पार्क के पास पेड़ पर भूत रहता है।”

माँ हंसने लगी। कहने लगी कि तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं। मैं हूँ न!

अगले दिन उधर से लौटते हुए जब चंदन ने फिर पेड़ की ओर देखने से मना किया, तो मैं नहीं डरा। चंदन हैरान था। कहने लगा कि क्या तुम भूत से नहीं डरते?

“नहीं डरता।”

“क्यों?”

“माँ ने कहा है कि मुझे डरने की जरूरत नहीं। तुम भी मत डरो। चलो उस पेड़ के पास चलते हैं। भूत मिलेगा तो बता देंगे कि अगर उसने हमें तंग किया तो हम दोनों की माँएं यहाँ आकर उसकी बहुत पिटाई करेंगी।”

फिर हम दोनों उस पेड़ के पास गये। पेड़ के पास जाकर मैंने कहा कि ऐ भूत तुम नीचे उतरो। देखो, हमें डराना मत। माँ ने कहा है कि अगर तुम हमें परेशान करोगे, तो वो आकर तुम्हारी बहुत पिटाई करेंगी। 

भूत डर के मारे पेड़ से उतरा ही नहीं। मैंने ऊपर भी देखा था, वो पत्तों के बीच कहीं छुपा बैठा होगा, मुझे नहीं दिखा। 

मैं घर आया था और माँ की गोद में दुबक कर खूब खुश हुआ था। 

“माँ, मैंने भूत को आज डरा दिया। कह दिया कि माँ आएगी और फिर तुम्हारी खैर नहीं।”

अब भी कोई मुझे डरा नहीं सकता। माँ नहीं है लेकिन माँ की एक तस्वीर मैंने अपने कमरे में रखी है और कहीं आते-जाते मैं उन्हें प्रणाम करके निकलता हूँ। मेरा विश्वास है कि माँ हर पल मेरे साथ होती है।

कल जब दफ्तर गया तो मेरे पास एक रिपोर्ट आई थी। मुमकिन है आपने अखबार में खबर पढ़ी भी हो। पर उस खबर ने मेरे यकीन को और पुख्ता कर दिया है कि जिनके साथ माँ होती है, उनका संसार में कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।

खबर मुंबई से आई थी। 

मुंबई में संजय गांधी नेशनल पार्क के पास आर्य कॉलोनी में रहने वाली 23 साल की एक महिला जिसका नाम प्रमिला था, शौच के लिए बाहर निकली। उसे नहीं पता था कि उसका तीन साल का बेटा, प्रणय भी उसके साथ पीछे-पीछे निकल आया था। वो कुछ दूर ही गई होगी कि अचानक एक बच्चे के चीखने की आवाज आई। उसने देखा कि उसके पीछे एक तेंदुआ उसके बेटे को पकड़े हुए है। 

लाल आँखें, तलवार से दाँत और भाले जैसा पंजा, कोई भी उस तेंदुए को देखता तो थम जाता। काँपने लगता। पर वो एक माँ थी। कोई शेर, कोई बाघ, कोई तेंदुआ भला एक माँ से शक्तिशाली क्या होता। 

माँ ने आव न देखा ताव, वो तेंदुए पर कूद पड़ी। जैसे ही वो तेंदुए पर कूदी, तेंदुआ डर के मारे काँपता हुआ उसके बेटे को छोड़ कर भाग गया। 

अखबार और टीवी की दुनिया में उसे बहादुर माँ कहा गया। सबने माँ की बहुत तारीफ की। लेकिन कोई मुझसे पूछता तो मैं बता देता कि इस संसार में हर माँ इतनी ही बहादुर होती है। माँ बनना ही बहुत बहादुरी का काम होता है। इस संसार में किसी माँ के सामने कोई उसके बच्चे को उठा कर ले जाने की कोशिश करेगा, तो माँ उस पर ऐसे ही कूद जाएगी। 

मैंने शुरू में कहा है कि जिनके पास माँ होती है, वो संसार में सबसे भाग्यशाली होते हैं। अगर आपको लगता है कि आप बहुत बड़े हो गये हैं और अब माँ की गोद में आप नहीं बैठ सकते, तो मेरा यकीन कीजिए, आप चाहे जितने बड़े हो जाएं, माँ की गोद से बड़े नहीं हो सकते। इसीलिए मैंने आपसे अनुरोध किया है कि आज संजय सिन्हा की कहानी सुनने के बाद आप माँ के पास जाइए और उनके गले लग जाइए। उनसे कहिए कि माँ मुझे अपनी गोद में कुछ देर बिठा लो। आप बैठ कर देखिए, आपके मन से हर दुख और हर भय मिट जाएगा।

(देश मंथन, 25 मार्च 2016)

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