Wednesday, March 18, 2026
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विजयवाड़ा का कनक दुर्गा मंदिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

कनक दुर्गा का भव्य मंदिर विजयवाड़ा शहर के बीचों बीच पहाड़ी पर है। तिरूपति के बाद यह आंध्र प्रदेश के भव्य मंदिरों में से एक है। यहाँ पर सालों भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

श्री हुजुर साहिब सचखंड गुरुद्वारा – दशमेश पिता की याद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में स्थित हुजुर साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। खालसा पंथ के पाँच तख्तों में से एक सचखंड साहिब। इसे तख्त सचखंड श्री हुजुर अबिचल नगर साहिब के नाम से भी जाना जाता है।

मोतियों की तरह रिश्तों को संभालिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मेरे एक परिचित के दोनों बच्चे गर्मी की छुट्टियों में स्कूल से कहीं घूमने गये हैं। बच्चे हफ्ते भर से बाहर हैं, पति-पत्नी अकेले-अकेले बैठे रहते हैं, ऐसे में उन्होंने तय किया कि कुछ लोगों को घर बुलाया जाए, पार्टी की जाए। बहुत ही बेहतरीन आइडिया था। रोज-रोज की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी से थोड़ी राहत मिलेगी और जिनसे पता नहीं कब से नहीं मिले, उनसे मिलना हो जाएगा।

मन के पिंजरों से निकलिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

मेरी पोस्ट पर आप जो टिप्पणियाँ करते हैं, उन्हें मैं बहुत मनन करके पढ़ता हूँ। कभी-कभी तो पढ़ने के बाद दुबारा पढ़ता हूँ। सच में आपकी टिप्पणियाँ कई बार इतनी दिलचस्प और शानदार होती हैं कि मैं खुद सोच में पड़ जाता हूँ।

आइए फेयरी क्वीन को करें याद

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव (इंजन) के इतिहास में फेयरी क्वीन का अपना अनूठा महत्व है। जब हम विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर निकलते हैं तो स्टेशन के लॉन में फेयरी क्वीन लोकोमोटिव खड़ी दिखायी देती है। मानो अभी चल पड़ने को तैयार हो। वास्तव में ये मूल फेयरी क्वीन नहीं है। पर रेलवे के इंजीनियरों ने इसका बिल्कुल वैसा ही रेप्लिका तैयार किया है। तो इस फेयरी क्वीन को भी देर तक निहारने की जी चाहता है।

कस्तूरबा गाँधी का घर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

बापू का घर देख लिया तो अब चलिए बा यानी बापू की पत्नी कस्तूरबा गाँधी का घर देखने चलें। जब आप पोरबंदर में बापू का घर देखने जाते हैं तो बापू की पत्नी कस्तूरबा गाँधी का घर देखना नहीं भूलें। बा का घर कीर्ति मंदिर के ठीक पीछे है। कीर्ति मंदिर देख लेने के बाद इसके पिछवाड़े से ही बा के घर जाने का रास्ता है। रास्ते में घर जाने के लिए मार्ग प्रदर्शक लगा हुआ है।

शक्ल और रिजल्ट एक ही

 संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

 

एक कहानी तीन दिनों से अटकी पड़ी है। सोच रहा हूँ कि आज नहीं लिखा तो फिर कहीं पुरानी ही न पड़ जाए। इसलिए आज मैं संसार के सात आश्चर्यों की कहानी को छोड़ कर उस सत्य को आपके सामने परोसने जा रहा हूँ, जो कल्पना से भी अधिक काल्पनिक है, जिसके विषय में आपका विज्ञान इत्तेफाक कह कर पल्ला झाड़ लेगा। पर मैं कैसे निकल सकता हूँ? मैं तो गवाह हूँ समय का, जब मैंने इस आश्चर्य किंतु विचित्र सत्य को अपनी आँखों से घटित होते हुए देखा है।

अति व्यस्त रेलवे स्टेशन पर कायम है स्वच्छता – विजयवाड़ा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

वैसे तो विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश का सबसे भीड़भाड़ वाला रेलवे स्टेशन है। स्टेशन पर कुल 10 प्लेटफार्म हैं। रोज सैकड़ों गाड़ियाँ गुजरती हैं। पर स्टेशन पर साफ सफाई का जो आलम है उसमें रेलवे को धन्यवाद देने का जी चाहता है। हमारी मिलेनियम एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर 7 पर पहुँची। समय से पहले। हमारे पास दो घंटे का समय था। कुल 29 घंटे ट्रेन में था।

जागता आदमी सच को समझता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

जब मैं छोटा था, तब माँ मुझे कहानियाँ सुना कर सुलाया करती थी। उन्हीं ढेर सारी कहानियों में से एक आज मुझे याद आ रही है।

चेत जाइये नहीं तो कुछ भी नहीं होगा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

आज चौथा दिन है जब बुखार ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा है। बुखार क्यों हुआ, नहीं पता। मैंने खाने-पीने में ऐसी कोई बदपरहेजी नहीं की। पर बुखार हो गया। एक दिन का बुखार होता है तो पत्नी की सेवा से ठीक हो जाता हूँ। दो दिन का बुखार होता है तो बिस्तर पर लेटे-लेटे ऊटपटांग सपने देखने लगता हूँ। तीसरे दिन तो डॉक्टर को दिखला ही लेना चाहिए। क्रोसिन और कालपोल से तीसरे दिन काम नहीं चलाना चाहिए। तो कल मैं डॉक्टर को दिखला आया।

आदमी सबकुछ के बिना रह सकता है, पर प्यार के बिना नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :

अब शिफ्ट होने का समय आ गया है। समझ लीजिए कि आधा शिफ्ट हो भी गए। मैं चीजें बहुत खरीदता हूँ, पर मुझे चीजों से मोह नहीं। जाहिर है मैं बहुत सी चीजें यहीं पुराने घर में छोड़ जाऊंगा। इनका क्या होगा, क्या करूंगा, यह सब बाद में तय होगा।

चामुंडा अनाज रखने के लिए बना था पटना का गोलघर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

बिहार की राजधानी पटना की जिन इमारतों से पहचान है उनमे गोलघर भी एक है। गाँधी मैदान के पास स्थित गोलघर 33 मीटर यानी 96 फीट ऊँचा है। चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग सीढ़ियाँ हैं। कुल 146 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। आपको ज्यादा सीढ़ियाँ चढ़ने का इल्म नहीं है तो कुछ मुश्किल आ सकती है। क्योंकि रास्ते में कहीं ठहराव नहीं है। 

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