तख्त श्री केशगढ़ साहिब – आनंदपुर साहिब

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सिखों के पाँच तख्त हैं देश में। इनमें आनंदपुर साहिब का खास महत्व है। पंजाब के रूपनगर जिले में स्थित आनंदपुर साहिब सिखों में अत्यंत पवित्र शहर माना जाता है। इस शहर की स्थापना 1665 में नौंवे गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने की थी। यह सिख धर्म में अत्यंत पवित्र शहर इसलिए है, क्योंकि यहीं पर खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। साल 1699 में बैशाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने की। इस दिन उन्होंने पाँच प्यारों को सबसे पहले अमृत छकवा कर सिख बनाया। आमतौर पर तलवार और केश तो सिख पहले से ही रखते थे। अब उनके लिए कड़ा, कंघा और कच्छा भी जरूरी कर दिया गया।
बुरे काम का बुरा नतीजा

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
मेरी आज की पोस्ट मेरे लिए है। मुझे बहुत यंत्रणा से गुजरना पड़ा अपनी आज की पोस्ट को लिखते हुए। बहुत बार हाथ रुके, पर हिम्मत करके मैं लिखता चला जा रहा हूँ। आसान नहीं होता, अपने विषय में ऐसा लिखना।
ट्रेड, टिंबर, ट्रूप मतलब पठानकोट

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
20 अक्तूबर 1993
शिविरों में अथवा ऐसे व्यस्त आयोजनों में अक्सर कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण तारीखें तो याद रहती हैं दिन (वार) भूल जाता हूँ। जैसे आज बुधवार है।
पंजाब के आनंदपुर साहिब की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
सिख धर्म के पाँच पवित्र तख्त में से एक है श्री केशगढ़ साहिब यानी आनंदपुर साहिब। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से सुबह छह बजकर 10 मिनट पर नंगलडैम के लिए मेमू ट्रेन खुलती है। यह ट्रेन आनंदपुर साहिब या नैना देवी जाने के लिए आदर्श तरीका है। हालाँकि टिकट खिड़की से आधा किलोमीटर दूर 1ए प्लेटफार्म से ये ट्रेन हर रोज रवाना होती है।
चोर मचाये शोर

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
विजय और रवि दोनों सगे भाई थे। एक दिन विजय और रवि के पिताजी घर छोड़ कर कहीं चले गये। वो मजदूरों के नेता थे। इस तरह अचानक उनके घर छोड़ कर चले जाने से नाराज कुछ लोगों ने विजय को पकड़ कर उसकी कलाई पर लिख दिया, "मेरा बाप चोर है।" विजय का बाप चोर नहीं था। लेकिन बड़ा होकर विजय चोर बन गया और रवि पुलिस अफसर।
मणिपुर में संतरे का कटोरा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
हमारी टैक्सी मणिपुरी शाल के कस्बे तुपुल को पार करती हुई नोनी पहुँची। यहाँ भी चेकपोस्ट था। नोनी नुंगबा तहसील का एक छोटा सा गाँव है। जाँच औपचारिकताओं के बाद हम आगे बढ़े। 110 किलोमीटर की दूरी पर आया खोंगसांग नामक गाँव। यहाँ से एक रास्ता तामेंगलांग के लिए जा रहा था।
अभय मुद्रा में 80 फीट के गौतम बुद्ध

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
साल 2011 में सारनाथ में एक और आकर्षण जुड़ गया है, वह है विशाल बुद्ध प्रतिमा। वाराणसी के पास स्थित दर्शनीय स्थल सारनाथ में वैसे तो सैलानियों कई आकर्षण है। सारनाथ के इतिहास में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब जब आप सारनाथ जाएँगे तो वहाँ भगवान बुद्ध की चलायमान अभय मुद्रा में बनी देश की सबसे ऊँची लगभग 80 फीट प्रतिमा देखने को मिलेगी। हालाँकि सारनाथ में पहले से ही बुद्ध की प्रतिमा है लेकिन बुद्ध की चलायमान प्रतिमा अनूठी है।
सालों भर लुभाता है पश्चिमी घाट का सौंदर्य

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पश्चिमी घाट यानी दिलकश नजारे। यह कोई एक जगह नहीं। इसका विस्तार कई राज्यों में हैं। सौंदर्य ऐसा है चप्पे-चप्पे में कि इसे साल 2012 में में विश्व विरासत साइट का दर्जा मिला। इसके तहत कोई 1,600 किलोमीटर लंबी पर्वत श्रंखला आती है। माना जाता है कि ये पर्वत हिमालय से भी ज्यादा पुराने हैं। अपने पारिस्थित विभिन्नता के कारण इसे अलग पहचान मिली है। इसका विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे पांच राज्यों में है।
भूमि नहीं, मन बंजर होता है

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
कहानी क्या होती है?
घटनाओं का ब्योरा? नहीं। घटनाओं का ब्योरा तो रिपोर्टिंग हो गयी। रिपोर्टिंग मतलब, जो देखा उसे बयाँ कर दिया।
रेलवे की विरासत : मुजफ्फरपुर पहुँचा डेहरी-रोहतास का लोकोमोटिव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
कभी डेहरी रोहतास लाइट रेलवे की मातृ कंपनी रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपनी सेवाएँ देने वाला लोकोमोटिव अब मुजफ्फरपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर शान से विराजमान है। ये लोकोमोटिव आते-जाते लोगों को स्टीम इंजन (भाप से चलने वाले) दौर की याद दिलाता है।
जैसी सोच वैसा जीवन

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आपने दो बैलों की कथा पढ़ी होगी। आपने दो शहरों की कहानी भी पढ़ी होगी।
आज मैं आपको दो चिट्ठियों की कहानी सुनाता हूँ। मैंने आपसे कहा था न कि पिछले दिनों घर से फालतू कागजों की सफाई में मेरी यादों का लंबा पुलिंदा खुल गया। उन्हीं यादों में से मैं आज आपके लिए ख़ास तौर पर लेकर आया हूँ, दो चिट्ठियों की कहानी।
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सीक्रेट डायरी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार
सलमान खान
वाऊ, पीएम मोदी तो सिर्फ सिटीज को स्मार्ट डिक्लेयर कर रहे हैं, पर बिना डिक्लेयर किये इंडिया की जेलें कितनी स्मार्ट हो गयी हैं। संजय दत्त ने जेल में अपनी बाडी सिक्स-पैक-एब्सवाली बना ली। कर्नाटक की एक जेल में अभी रिपब्लिक डे पर एक डांसर का नाच हुआ। कसम से, ऐसी ही जेलें और स्मार्ट होती रहीं, तो अगली बार अपने सारे मामलों में मैं खुद ही जेल जाने की डिमांड कर लूँगा।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आजतक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार





