बच्चा बाबू का जहाज और एलसीटी सेवा

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
रेलवे स्टीमर के अलावा पटना और पहलेजा घाट के बीच लोगों के लिए दो और स्टीमर सेवा चलती थी। बाँस घाट से बच्चा बाबू की स्टीमर सेवा भी काफी लोकप्रिय थी। बच्चा बाबू सोनपुर के रईस थे, जिनकी निजी कंपनी बाँस घाट से पहलेजा घाट के बीच स्टीमर सेवा का संचालन करती थी।
जहाँ उम्मीद, वहीं जिन्दगी, जहाँ प्यार, वहीं संसार

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आपने ये पढ़ा होगा कि ‘जहाँ उम्मीद है, वहीं जिन्दगी है’। आपने सुना होगा कि ‘जहाँ प्यार होता है, वहीं संसार होता है’।
पनिया के जहाज से पलटनिया बनी अइह सैंया..

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
पानी के जहाज पर पहला सफर भला कौन भूल सकता है। भोजपुरी में शारदा सिन्हा का लोकप्रिय गीत है...पनिया के जहाज से पलटनिया बनी अइह सैंया... तो पहले उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच पानी का जहाज ही चलता था।
तिरुवनमलै के शिव – अरुणाचलेश्वर महादेव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
तमिलनाडु के जिले तिरुवनमलै में शिव का अनूठा मंदिर है। अनामलाई पर्वत की चोटी की तराई में इस मंदिर को अनामलार या अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर कहा जाता है। शिव के इस मंदिर में हर माह की पूर्णिमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। खासतौर कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है। श्रद्धालु यहाँ अनामलाई पर्वत की 14 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करके शिव से कल्याण की मन्नत माँगते हैं। माना जाता है कि शिव का विश्व में सबसे बड़ा मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण थेवरम और थिरुवासगम ने करवाया था।
मैं ‘माँ’ बनूँगा

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आज मेरा एक बहुत बड़ा सपना पूरा होने जा रहा है। अब से कुछ देर बाद मुझे 'माँ' बनने का सौभाग्य मिलेगा।
अंत में सेल और पहले भी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :
साल का अंत आ पहुँचा है और अखबारों, टीवी-चैनलों पर इयर-एंड सेल के इश्तिहार शुरू हो गये हैं। जी अगले हफ्ते आप न्यू ईयर सेल के इश्तिहार भी देख रहे होंगे। साल की शुरुआत सेल से होती है और अंत भी।
महाबलीपुरम – यहाँ पत्थर बोलते हैं…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
महाबलीपुरम शहर में आप जहाँ भी घूमें हर गली और नुक्कड़ पर मूर्तियों की दुकानें नजर आती है। नन्ही मूर्तियों से लेकर विशालकाय मूर्तियों तक। ये मूर्तियाँ यहीं के मूर्तिकार बनाते हैं। कई दुकानों पर तो मूर्तिकार आपको काम करते हुए दिखायी दे जाते हैं। अहले सुबह सूरज उगने के साथ काम शुरू होता है, देर रात तक छेनी हथौड़ी पर काम चलता रहता है।
पौधे को भी जीने के लिए रिश्ते चाहिए

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
अब से कुछ देर बाद मैं जबलपुर में पहुँच जाऊँगा।
महाबलीपुरम का लाइट हाउस

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
बस स्टैंड से पंच रथ के रास्ते में महाबलीपुरम का लाइट हाउस भी पड़ता है। आप इस पर चढ़ायी भी कर सकते हैं। इस 42 मीटर ऊंचे लाइट हाउस के लिए प्रवेश टिकट है। लाइट हाउस समुद्र में चलने वाले नाव और जहाज को रास्ता दिखाने के मकसद से बनाया जाता है। साल 2011 में इस सैलानियों के लिए खोला गया।
जब तपस्या (बेटा) शाप बन जाए

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कल मैंने वादा किया था कि उस बच्चे की कहानी जरूर सुनाऊँगा, जिसकी कहानी मैंने चौथी कक्षा में पढ़ी थी।
सुंदर पिचाई पर कोई क्यों नहीं बनाता फिल्म…!!
तारकेश कुमार ओझा :
80 के दशक में एक फिल्म आयी थी, नाम था लव-मैरिज। किशोर उम्र में देखी गयी इस फिल्म के अत्यंत साधारण होने के बावजूद इसका मेरे जीवन में विशेष महत्व था। इस फिल्म के एक सीन से मैं कई दिनों तक रोमांचित रहा था। क्योंकि फिल्म में चरित्र अभिनेता चंद्रशेखर दुबे एक सीन पर मेरे शहर खड़गपुर का नाम लेते हैं।
आत्मा से रिश्ता

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
एक पिता ने मुझसे गुहार लगायी है कि मैं उनके बेटे को समझाऊँ। बेटा पिता की बात नहीं सुनता। वो पिता के साथ अभद्र व्यवहार करता है। मैंने सोच लिया था कि मैं चौथी कक्षा में पढ़ी वो कहानी उसे जरूर सुनाऊँगा, जिसे पढ़ते हुए मैं बहुत गहरी सोच में डूब जाया करता था।



विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :





