कर्मों की कमाई

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
जब हम छोटे बच्चे थे, तब दशहरा के मौके पर मोहल्ले में छोटा सा स्टेज बना कर नाटक किया करते थे। मोहल्ले के सारे लोग वहाँ जुट जाते और हम 'रसगुल्ला-गुलाब जामुन' वाला नाटक करते। करने को तो हम 'कलुआ की माई वाला नाटक' भी करते, पर मेरा पसंदीदा नाटक 'रसगुल्ला-गुलाब जामुन' हुआ करता था।
आधार

प्रेमचंद :
सारे गाँव में मथुरा का-सा गठीला जवान न था। कोई बीस बरस की उमर थी। मसें भीग रही थीं। गउएँ चराता, दूध पीता, कसरत करता, कुश्ती लड़ता था और सारे दिन बाँसुरी बजाता हाट में विचरता था। ब्याह हो गया था, पर अभी कोई बाल-बच्चा न था। घर में कई हल की खेती थी, कई छोटे-बड़े भाई थे।
भरतपुर का संग्रहालय : 56 खंभे लाल दीवारें

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
भरतपुर किले के अंदर भरतपुर स्टेट म्यूजियम स्थित है जिसको देखे बिना आपकी भरतपुर यात्रा अधूरी है। ऑटो रिक्शा वाला मुझे भरतपुर किले के मुख्य द्वार पर छोड़ देता है। पुल पारकर अष्टधातु गेट से मैं अंदर प्रवेश करता हूँ। कई घोड़ा गाड़ी दिखायी देते हैं। यानी भरतपुर शहर में अभी भी घोड़ा गाड़ी चलते हैं। मैं देखता हूँ कि किले के मुख्य द्वार के अंदर भी आबादी बसी है। दुकाने हैं लोगों के घर हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर टाउन हाल आता है। यहाँ से बाईं तरफ चलने पर स्टेट म्यूजियम का पता पा लेता हूँ। गरमी है इसलिए रूक कर जूस पीता हूँ। संग्राहलय के प्रवेश द्वार पर टिकट घर है। प्रवेश टिकट 10 रुपये का है।
मैं हिन्दू हूँ

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
मेरी कल की पोस्ट पर एक परिजन ने अपने कमेंट में मुझसे पूछा है, “भारत में कौन सी हिन्दू माँ अपने बेटे को ईसा मसीह की कहानी सुनाती है? ज्यादातर माँएँ तो यह भी नहीं जानती कि ईसा कौन आदमी था? आपने झूठी पोस्ट लिखी है। और माँ द्वारा कहानी तो गांधीजी की भी नहीं सुनाई जाती। भैया कौन से ग्रह से आए हो?”
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स्वर्ग की देवी

प्रेमचंद :
भाग्य की बात! शादी-विवाह में आदमी का क्या अख्तियार! जिससे ईश्वर ने, या उनके नायबों- ब्राह्मणों ने तय कर दी, उससे हो गयी। बाबू भारतदास ने लीला के लिए सुयोग्य वर खोजने में कोई बात उठा नहीं रखी। लेकिन जैसा घर-वर चाहते थे, वैसा न पा सके। वह लड़की को सुखी देखना चाहते थे, जैसा हर एक पिता का धर्म है; किंतु इसके लिए उनकी समझ में सम्पत्ति ही सबसे जरूरी चीज थी। चरित्र या शिक्षा का स्थान गौण था। चरित्र तो किसी के माथे पर लिखा नहीं रहता और शिक्षा का आजकल के जमाने में मूल्य ही क्या? हाँ, सम्पत्ति के साथ शिक्षा भी हो तो क्या पूछना! ऐसा घर उन्होंने बहुत ढूँढ़ा, पर न मिला। ऐसे घर हैं ही कितने जहाँ दोनों पदार्थ मिलें? दो-चार मिले भी तो अपनी बिरादरी के न थे। बिरादरी भी मिली, तो ज़ायजा न मिला; जायजा भी मिला तो शर्तें तय न हो सकीं।
खुशियाँ बाँटते हैं कपिल

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कल कपिल से मिला। कॉमेडी विद कपिल शर्मा वाले कपिल से।
पुण्य सलिला माँ गंगा का मन्दिर – गंगा महारानी मन्दिर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
गंगा महारानी का मन्दिर राजस्थान के भरतपुर शहर का बहुत ही सुंदर मन्दिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसके बनने में 90 साल का समय लगा था। यह मन्दिर भरतपुर किले के मुख्य द्वार के सामने स्थित है। मन्दिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। मन्दिर के अंदर मगरमच्छ पर सवार माँ गंगा की प्रतिमा है।
झूमते बाजरे के साथ चलता सफर
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
श्रीमहाबीर जी से करौली जाना चाहता हूँ। छोटे से बस स्टैंड पर बसें कम आती हैं। लोग बताते हैं कि आप जीप से खेड़ा तक चले जाओ वहाँ से बसें मिल जाएँगी। खेड़ी की जीप में बैठता हूँ। रेलवे स्टेशन श्री महाबीर जी के पास जाकर जीप थोड़ी देर के लिए रूक जाती है। मैं सुबह के नाश्ते में कचौड़ियाँ खाता हूँ। जीप खेड़ा गाँव में पहुँचा देती है। पर वहाँ पता चलता है चौक से गली होकर मुख्य सड़क पर जाइए वहाँ से साधन मिल सकेगा। पैदल चलकर हिंडौन करौली हाईवे पर पहुँचता हूँ। एक जीप वाले मिलते हैं वे करौली ले जाने को तैयार हैं। जीप में बैठ जाता हूँ। सड़क के दोनों तरफ खेतों में बाजरे की फसल झूम रही है।
कौशल

प्रेमचंद :
पंडित बालकराम शास्त्री की धर्मपत्नी माया को बहुत दिनों से एक हार की लालसा थी और वह सैकड़ों ही बार पंडितजी से उसके लिए आग्रह कर चुकी थी; किंतु पंडितजी हीला-हवाला करते रहते थे। यह तो साफ-साफ न कहते थे कि मेरे पास रुपये नहीं हैं- इससे उनके पराक्रम में बट्टा लगता था- तर्कनाओं की शरण लिया करते थे।
नैराश्य लीला

प्रेमचंद :
पंडित हृदयनाथ अयोध्याय के एक सम्मानित पुरुष थे। धनवान् तो नहीं लेकिन खाने-पीने से खुश थे। कई मकान थे, उन्हीं के किराये पर गुजर होता था। इधर किराये बढ़ गये थे, उन्होंने अपनी सवारी भी रख ली थी। बहुत विचारशील आदमी थे, अच्छी शिक्षा पायी थी। संसार का काफी तजुरबा था, पर क्रियात्मक शक्ति से वंचित थे, सबकुछ न जानते थे। समाज उनकी आँखों में एक भयंकर भूत था जिससे सदैव डरते रहना चाहिए। उसे जरा भी रुष्ट किया तो फिर जान की खैर नहीं। उनकी स्त्री जागेश्वरी उनका प्रतिबिम्ब थी, पति के विचार उसके विचार और पति की इच्छा उसकी इच्छा थी, दोनों प्राणियों में कभी मतभेद न होता था।
अति सुंदर नक्काशियों वाला महल – सिटी पैलेस करौली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
करौली बस स्टैंड की तरफ से पैदल चलते हुए बाजार की ओर बढ़ रहा हूँ। थोड़ी देर में एक गेट आता है। इसका नाम है हिंडौन गेट। गेट के आसपास घना बाजार है। आसपास में पतंगों की दुकानें लगी हैं। पर पुराना गेट अभी भी अच्छी हालत में है। किसी समय में करौली शहर में ऐसे छह दरवाजे थे। इसके अलावा दुश्मन का मुकाबला करने के लिए 11 परकोटे भी थे। करौली शहर पंचना नदी के तट पर बसा है। नदी पर बने डैम से शहर को पानी मिलता है। नदी पर बना बाँध मिट्टी का है।
प्यार से बढ़ कर संसार में कोई संपति नहीं

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
कभी-कभी मैं स्कूल से घर आता और खाना नहीं खाता था। माँ मुझसे कहती रहती कि हाथ धोकर खाना खाने बैठ जाओ बेटा, पर मैं माँ की बात अनसुनी कर देता। माँ आती, मुझे दुलार करती और कहती कि मेरे राजा बेटा को क्या हो गया है, क्यों चुप है। माँ और पुचकारती। फिर मैं खुश होकर खाना खाने बैठ जाता, माँ मुझे तोता-मैना कह कर खिलाने बैठ जाती।



संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :
प्रेमचंद :
विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :
प्रेमचंद :





